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ईडी ने रिलायंस इंफ्रा के खिलाफ PMLA केस दर्ज किया, ₹187 करोड़ हाईवे फंड के गबन का आरोप

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ईडी ने रिलायंस इंफ्रा के खिलाफ PMLA केस दर्ज किया, ₹187 करोड़ हाईवे फंड के गबन का आरोप

सारांश

ईडी ने रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर और सतीश सेठ सहित अन्य के खिलाफ PMLA के तहत विशेष अदालत में शिकायत दर्ज की है। आरोप है कि NHAI की चार हाईवे परियोजनाओं से ₹187 करोड़ शेल कंपनियों और हीरा व्यापारियों के जरिए घुमाए गए। ₹187 करोड़ की संपत्ति पहले ही कुर्क हो चुकी है।

मुख्य बातें

ईडी ने रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड और सतीश सेठ के खिलाफ PMLA के तहत नई दिल्ली की विशेष अदालत में शिकायत दर्ज की।
NHAI की चार टोल-रोड परियोजनाओं — NH-67, NH-45, NH-68, NH-11 — से ₹187 करोड़ के कथित गबन का आरोप।
सितंबर-अक्टूबर 2010 में फर्जी सब-कॉन्ट्रैक्टिंग और पिछली तारीख के समझौतों के जरिए धन को शेल कंपनियों तक पहुँचाया गया।
ईडी ने 3 अगस्त 2026 को ₹187 करोड़ की संपत्ति अस्थायी रूप से कुर्क की, जिसमें रिलायंस पावर के इक्विटी शेयर शामिल हैं।
सतीश सेठ को 12 जून 2026 को गिरफ्तार किया गया, वे अभी न्यायिक हिरासत में हैं।
जांच का आधार मुंबई इकोनॉमिक ऑफेंस विंग की 11 फरवरी 2026 की एफआईआर है।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अनिल अंबानी ग्रुप की कंपनी रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (RIL) के खिलाफ नई दिल्ली की एक विशेष अदालत में प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत शिकायत दर्ज कराई है। जांच एजेंसी के अनुसार, एनएचएआई के चार राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं से ₹187 करोड़ की कथित हेराफेरी की गई, जिसे बाद में शेल कंपनियों और हीरा व्यापारियों के जरिए घुमाया गया। यह शिकायत शनिवार, 9 अगस्त 2026 को दर्ज की गई।

मुख्य घटनाक्रम

शिकायत में रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के साथ-साथ सतीश सेठ और अन्य आरोपियों के नाम शामिल हैं। इन पर PMLA की धारा 4 के तहत सज़ा-योग्य अपराधों का आरोप है। ईडी की जांच में सामने आया कि सितंबर-अक्टूबर 2010 के दौरान फर्जी सब-कॉन्ट्रैक्टिंग, पिछली तारीख के समझौतों और दिखावटी दस्तावेजों के माध्यम से यह धनराशि परियोजनाओं से निकाली गई।

किन परियोजनाओं से हुई कथित हेराफेरी

ईडी के अनुसार, एनएचएआई की चार टोल-रोड परियोजनाओं — त्रिची-करूर (NH-67), त्रिची-डिंडीगुल (NH-45), सलेम-उलुंदुरपेट (NH-68) और जयपुर-रींगस (NH-11) — के लिए आवंटित सार्वजनिक ग्रांट और बैंक ऋण को दूसरी जगह लगाया गया। यह पैसा RIL या उसके प्रोजेक्ट-स्पेसिफिक स्पेशल पर्पस व्हीकल्स (SPV) और EPC कॉन्ट्रैक्टर्स से होते हुए ऐसी शेल कंपनियों तक पहुँचा, जिनका सड़क निर्माण से कोई संबंध नहीं था।

धन को कैसे छुपाया गया

जांच एजेंसी के अनुसार, इन अवैध ट्रांसफर को बाद में असली परियोजना खर्च के रूप में दर्शाने के लिए दस्तावेज तैयार किए गए। फंड को शेल कंपनियों और हीरा व्यापारियों के नेटवर्क के जरिए परिचालित किया गया। मुंबई की इकोनॉमिक ऑफेंस विंग द्वारा 11 फरवरी 2026 को दर्ज एफआईआर में फर्जी इनवॉइस और हीरे के अधिमूल्यांकित आयात की आड़ में फंड और बाहरी रेमिटेंस का उल्लेख था — इसी के आधार पर ईडी ने जांच शुरू की।

संपत्ति जब्ती और गिरफ्तारी

ईडी ने इस मामले में 3 अगस्त 2026 को ₹187 करोड़ की संपत्ति को अस्थायी रूप से कुर्क किया। इसमें RIL की अचल संपत्ति, रिलायंस पावर लिमिटेड के इक्विटी शेयर और क्षीराब्द कंस्ट्रक्शन्स प्राइवेट लिमिटेड की भूमि शामिल है। आरोपी सतीश सेठ को 12 जून 2026 को गिरफ्तार किया गया था और वे अभी न्यायिक हिरासत में हैं।

आगे क्या होगा

ईडी ने स्पष्ट किया है कि अन्य संदिग्धों की भूमिका की जांच अभी जारी है। गौरतलब है कि यह मामला अनिल अंबानी ग्रुप की कंपनियों के खिलाफ वित्तीय जांच की एक लंबी श्रृंखला में नवीनतम कड़ी है। विशेष PMLA अदालत में शिकायत दाखिल होने के बाद अब मामले में औपचारिक सुनवाई की प्रक्रिया शुरू होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो करदाताओं के पैसे और बैंक ऋण पर निर्भर है, के प्रोजेक्ट्स से धन को शेल कंपनियों और हीरा व्यापारियों तक पहुँचाना और फिर उसे वैध खर्च दिखाना — यह प्रक्रियागत निगरानी की गंभीर खामी को उजागर करता है। सवाल यह भी है कि 2010 की कथित हेराफेरी डेढ़ दशक बाद क्यों सामने आई। अनिल अंबानी ग्रुप की कंपनियों के खिलाफ वित्तीय जांच की यह श्रृंखला दर्शाती है कि बड़े बुनियादी ढाँचा ठेकों में ऑडिट और अनुपालन तंत्र को और अधिक सुदृढ़ करने की ज़रूरत है।
RashtraPress
9 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईडी ने रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर के खिलाफ क्या मामला दर्ज किया है?
ईडी ने रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड और सतीश सेठ सहित अन्य के खिलाफ PMLA की धारा 4 के तहत नई दिल्ली की विशेष अदालत में शिकायत दर्ज की है। आरोप है कि NHAI की चार हाईवे परियोजनाओं से ₹187 करोड़ की कथित हेराफेरी की गई और धन को शेल कंपनियों के जरिए घुमाया गया।
किन हाईवे परियोजनाओं से धन की हेराफेरी का आरोप है?
ईडी के अनुसार, चार NHAI टोल-रोड परियोजनाओं — त्रिची-करूर (NH-67), त्रिची-डिंडीगुल (NH-45), सलेम-उलुंदुरपेट (NH-68) और जयपुर-रींगस (NH-11) — से सितंबर-अक्टूबर 2010 में फर्जी सब-कॉन्ट्रैक्टिंग के जरिए ₹187 करोड़ निकाले गए।
ईडी ने इस मामले में कितनी संपत्ति कुर्क की है?
ईडी ने 3 अगस्त 2026 को ₹187 करोड़ की संपत्ति अस्थायी रूप से कुर्क की है। इसमें RIL की अचल संपत्ति, रिलायंस पावर लिमिटेड के इक्विटी शेयर और क्षीराब्द कंस्ट्रक्शन्स प्राइवेट लिमिटेड की भूमि शामिल है।
सतीश सेठ कौन हैं और उनकी क्या भूमिका बताई गई है?
सतीश सेठ को ईडी ने इस मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोपी बनाया है और 12 जून 2026 को गिरफ्तार किया गया था। वे अभी न्यायिक हिरासत में हैं; मामले में उनकी सटीक भूमिका की जांच जारी है।
इस जांच की शुरुआत कैसे हुई?
ईडी ने मुंबई की इकोनॉमिक ऑफेंस विंग द्वारा 11 फरवरी 2026 को दर्ज एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की थी। वह एफआईआर फर्जी दस्तावेजों, बैंक खातों और शेल कंपनियों के जरिए फर्जी इनवॉइस और हीरे के अधिमूल्यांकित आयात से संबंधित थी।
राष्ट्र प्रेस
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