ईडी ने रिलायंस इंफ्रा के खिलाफ PMLA केस दर्ज किया, ₹187 करोड़ हाईवे फंड के गबन का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अनिल अंबानी ग्रुप की कंपनी रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (RIL) के खिलाफ नई दिल्ली की एक विशेष अदालत में प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत शिकायत दर्ज कराई है। जांच एजेंसी के अनुसार, एनएचएआई के चार राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं से ₹187 करोड़ की कथित हेराफेरी की गई, जिसे बाद में शेल कंपनियों और हीरा व्यापारियों के जरिए घुमाया गया। यह शिकायत शनिवार, 9 अगस्त 2026 को दर्ज की गई।
मुख्य घटनाक्रम
शिकायत में रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के साथ-साथ सतीश सेठ और अन्य आरोपियों के नाम शामिल हैं। इन पर PMLA की धारा 4 के तहत सज़ा-योग्य अपराधों का आरोप है। ईडी की जांच में सामने आया कि सितंबर-अक्टूबर 2010 के दौरान फर्जी सब-कॉन्ट्रैक्टिंग, पिछली तारीख के समझौतों और दिखावटी दस्तावेजों के माध्यम से यह धनराशि परियोजनाओं से निकाली गई।
किन परियोजनाओं से हुई कथित हेराफेरी
ईडी के अनुसार, एनएचएआई की चार टोल-रोड परियोजनाओं — त्रिची-करूर (NH-67), त्रिची-डिंडीगुल (NH-45), सलेम-उलुंदुरपेट (NH-68) और जयपुर-रींगस (NH-11) — के लिए आवंटित सार्वजनिक ग्रांट और बैंक ऋण को दूसरी जगह लगाया गया। यह पैसा RIL या उसके प्रोजेक्ट-स्पेसिफिक स्पेशल पर्पस व्हीकल्स (SPV) और EPC कॉन्ट्रैक्टर्स से होते हुए ऐसी शेल कंपनियों तक पहुँचा, जिनका सड़क निर्माण से कोई संबंध नहीं था।
धन को कैसे छुपाया गया
जांच एजेंसी के अनुसार, इन अवैध ट्रांसफर को बाद में असली परियोजना खर्च के रूप में दर्शाने के लिए दस्तावेज तैयार किए गए। फंड को शेल कंपनियों और हीरा व्यापारियों के नेटवर्क के जरिए परिचालित किया गया। मुंबई की इकोनॉमिक ऑफेंस विंग द्वारा 11 फरवरी 2026 को दर्ज एफआईआर में फर्जी इनवॉइस और हीरे के अधिमूल्यांकित आयात की आड़ में फंड और बाहरी रेमिटेंस का उल्लेख था — इसी के आधार पर ईडी ने जांच शुरू की।
संपत्ति जब्ती और गिरफ्तारी
ईडी ने इस मामले में 3 अगस्त 2026 को ₹187 करोड़ की संपत्ति को अस्थायी रूप से कुर्क किया। इसमें RIL की अचल संपत्ति, रिलायंस पावर लिमिटेड के इक्विटी शेयर और क्षीराब्द कंस्ट्रक्शन्स प्राइवेट लिमिटेड की भूमि शामिल है। आरोपी सतीश सेठ को 12 जून 2026 को गिरफ्तार किया गया था और वे अभी न्यायिक हिरासत में हैं।
आगे क्या होगा
ईडी ने स्पष्ट किया है कि अन्य संदिग्धों की भूमिका की जांच अभी जारी है। गौरतलब है कि यह मामला अनिल अंबानी ग्रुप की कंपनियों के खिलाफ वित्तीय जांच की एक लंबी श्रृंखला में नवीनतम कड़ी है। विशेष PMLA अदालत में शिकायत दाखिल होने के बाद अब मामले में औपचारिक सुनवाई की प्रक्रिया शुरू होगी।