ईडी ने आरकॉम के खिलाफ ₹40,185 करोड़ के पीएमएलए मामले में पूरक शिकायत दायर की, दोषी और सेठ न्यायिक हिरासत में
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (आरकॉम) के खिलाफ ₹40,185.55 करोड़ के धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) मामले में 9 अगस्त 2026 को एक पूरक अभियोजन शिकायत दायर की। यह शिकायत 27 मार्च को दर्ज की गई मुख्य शिकायत के बाद दायर की गई है, जिसमें मामले से जुड़े नए और अहम तथ्यों को शामिल किया गया है।
मामले में आरोपी और आरोप
ईडी के आधिकारिक बयान के अनुसार, रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (आरकॉम), रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड (आरटीएल) के साथ-साथ गौतम भाईलाल दोषी, सतीश सेठ, अमिताभ झुनझुनवाला और अन्य को पीएमएलए, 2002 की धारा 4, धारा 3 और धारा 70 के तहत सजा-योग्य अपराधों के लिए आरोपी बनाया गया है। अपराध से हासिल रकम का मूल्य ₹40,185.55 करोड़ आंका गया है — यह वह कुल बकाया राशि है जो उधार लेने वाली कंपनियों ने कंसोर्टियम बैंकों, वित्तीय संस्थानों और बॉन्डहोल्डर्स को नहीं चुकाई।
जांच में आरोपियों की फंड जुटाने, उसे इस्तेमाल करने, छिपाने और वैध दिखाने में अलग-अलग भूमिकाएं सामने आई हैं। इसमें फॉरेन करेंसी कन्वर्टिबल बॉन्ड (एफसीसीबी) से प्राप्त 1 अरब डॉलर की रकम के अंतिम उपयोग के बारे में गलत प्रमाणीकरण भी शामिल है।
संपत्ति जब्ती की मांग
ईडी ने न्यायनिर्णायक प्राधिकारी द्वारा अटैच और कन्फर्म की गई ₹8,078.06 करोड़ की संपत्तियों को जब्त करने की मांग की है। इन संपत्तियों में नई दिल्ली, नवी मुंबई, भुवनेश्वर, चेन्नई और पुणे में लीजहोल्ड और अचल संपत्तियां शामिल हैं।
गिरफ्तारी और न्यायिक हिरासत
इस मामले में गौतम भाईलाल दोषी को 12 जून 2026 को और सतीश सेठ को 9 जुलाई 2026 को गिरफ्तार किया गया था। दोनों अभी न्यायिक हिरासत में हैं। पीएमएलए मामलों की स्पेशल कोर्ट ने मुख्य अभियोजन शिकायत का संज्ञान 15 जून 2026 को लिया था।
धोखाधड़ी की कार्यप्रणाली
जांच एजेंसी के अनुसार, यह धोखाधड़ी की योजना कम से कम 2007 से शुरू हुई और एक जुड़े हुए, लगातार चलने वाले आपराधिक सिलसिले के रूप में जारी रही। नई क्रेडिट सुविधाओं का बार-बार धोखाधड़ी से उपयोग पुरानी घरेलू और विदेशी देनदारियों को चुकाने, घुमाने और 'एवरग्रीन' करने के लिए किया गया।
फंड को ग्रुप कंपनियों, विशेष मकसद के लिए बनाई गई कंपनियों, कई बैंक खातों और लिक्विड म्यूचुअल फंड के जरिए घुमाया गया। इन्हें वैध व्यावसायिक खर्च या प्राप्ति के रूप में दिखाया गया। जांच में यह भी सामने आया कि लोन की रकम का एक हिस्सा रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड और रिलायंस कैपिटल लिमिटेड जैसी ग्रुप कंपनियों में डायवर्ट किया गया और प्रमोटरों के लिए भारत के बाहर निजी संपत्ति खरीदने तथा आरकॉम के मुनाफे को कृत्रिम रूप से बढ़ाने में इस्तेमाल किया गया।
आगे की जांच जारी
ईडी ने यह जांच सीबीआई और बैंकिंग सिक्योरिटीज एंड फ्रॉड ब्रांच, नई दिल्ली द्वारा दर्ज कई एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। इनमें आरकॉम, आरटीएल और रिलायंस इन्फ्राटेल लिमिटेड द्वारा फंड-बेस्ड और नॉन-फंड-बेस्ड क्रेडिट सुविधाओं के धोखाधड़ीपूर्ण उपयोग और डायवर्जन के आरोप शामिल हैं। एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में आगे की जांच अभी भी जारी है।