रिलायंस कम्युनिकेशंस मनी लॉन्ड्रिंग मामला: PMLA कोर्ट ने ईडी की शिकायत पर लिया संज्ञान
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली की राउज एवेन्यू स्थित विशेष न्यायालय (पीएमएलए) ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (आरकॉम) और अन्य आरोपियों के विरुद्ध प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा दायर अभियोजन शिकायत का संज्ञान लिया है। यह संज्ञान सोमवार, 15 जून 2026 को लिया गया, जो इस बहुचर्चित बैंक धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में एक अहम कानूनी पड़ाव है।
मामले का मुख्य घटनाक्रम
ईडी ने 27 मार्च 2026 को राउज एवेन्यू की विशेष PMLA अदालत में आरकॉम के पूर्व निदेशक पुनीत गर्ग और वैशाली माने के खिलाफ अभियोजन शिकायत दर्ज की थी। इससे पहले ईडी ने 29 जनवरी 2026 को पुनीत गर्ग को गिरफ्तार किया था और वे अभी भी न्यायिक हिरासत में हैं। ईडी की यह जाँच केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) की उस प्राथमिकी (एफआईआर) पर आधारित है, जो 21 अगस्त 2025 को दर्ज की गई थी।
पुनीत गर्ग की आरकॉम में भूमिका
जाँच एजेंसी के अनुसार, पुनीत गर्ग 2001 से 2025 तक आरकॉम में विभिन्न वरिष्ठ पदों पर रहे। उन्होंने 2006 से 2013 तक आरकॉम के ग्लोबल एंटरप्राइज बिजनेस के अध्यक्ष के रूप में काम किया। इसके बाद 2014 से 2017 तक वे अध्यक्ष (नियामक मामले) रहे, और अक्टूबर 2017 में उन्हें कार्यकारी निदेशक नियुक्त किया गया। अप्रैल 2019 से अप्रैल 2025 तक उन्होंने गैर-कार्यकारी निदेशक का दायित्व निभाया।
ईडी की जाँच में क्या सामने आया
ईडी की जाँच के अनुसार, पुनीत गर्ग बैंक धोखाधड़ी से अर्जित अवैध कमाई को हासिल करने, छिपाने, लेयरिंग करने और उसे ठिकाने लगाने में कथित तौर पर सक्रिय रूप से शामिल थे। जाँच में पाया गया है कि इस अवैध धनराशि को आरकॉम की कई विदेशी सहायक कंपनियों और ऑफशोर कंपनियों के माध्यम से बाहर भेजा गया।
इस कथित अवैध कमाई का उपयोग दो बड़ी संपत्तियाँ खरीदने में किया गया — पहली, 'तियान' नाम की एक लग्जरी यॉट, जिसे जर्सी (यूके) की एक कंपनी ने खरीदा था; और दूसरी, मैनहट्टन, न्यूयॉर्क (अमेरिका) में एक लग्जरी कॉन्डोमिनियम अपार्टमेंट। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब आरकॉम और रिलायंस ग्रुप की कंपनियाँ कॉर्पोरेट इनसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रोसेस (CIRP) से गुजर रही थीं।
धोखाधड़ी का स्वरूप
आरोपों के अनुसार, CIRP की प्रक्रिया के दौरान इन संपत्तियों को चुपके से और धोखाधड़ी के तरीके से बेच दिया गया। बिक्री से प्राप्त राशि को वैध दावेदारों और लेनदारों को लौटाने के बजाय कथित तौर पर अन्यत्र स्थानांतरित कर दिया गया, जिससे ऋणदाता बैंकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा।
आगे क्या होगा
अदालत द्वारा अभियोजन शिकायत का संज्ञान लिए जाने के बाद अब मामले की औपचारिक सुनवाई की प्रक्रिया शुरू होगी। पुनीत गर्ग न्यायिक हिरासत में हैं, जबकि वैशाली माने के संदर्भ में अदालत की आगामी कार्यवाही निर्णायक होगी। यह मामला भारत के सबसे बड़े कॉर्पोरेट दिवालिया प्रकरणों में से एक से जुड़ा है और इसके नतीजे कॉर्पोरेट जवाबदेही की दिशा तय करेंगे।