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रिलायंस कम्युनिकेशंस मनी लॉन्ड्रिंग मामला: PMLA कोर्ट ने ईडी की शिकायत पर लिया संज्ञान

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रिलायंस कम्युनिकेशंस मनी लॉन्ड्रिंग मामला: PMLA कोर्ट ने ईडी की शिकायत पर लिया संज्ञान

सारांश

राउज एवेन्यू की PMLA अदालत ने रिलायंस कम्युनिकेशंस मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी की अभियोजन शिकायत का संज्ञान लिया। आरोप है कि बैंक धोखाधड़ी की अवैध कमाई से 'तियान' लग्जरी यॉट और न्यूयॉर्क में कॉन्डोमिनियम खरीदा गया। पूर्व निदेशक पुनीत गर्ग जनवरी 2026 से हिरासत में हैं।

मुख्य बातें

राउज एवेन्यू विशेष न्यायालय (PMLA) ने 15 जून 2026 को रिलायंस कम्युनिकेशंस के खिलाफ ईडी की अभियोजन शिकायत का संज्ञान लिया।
ईडी ने 27 मार्च 2026 को पूर्व निदेशक पुनीत गर्ग और वैशाली माने के खिलाफ शिकायत दर्ज की थी।
पुनीत गर्ग को 29 जनवरी 2026 को गिरफ्तार किया गया था और वे अभी न्यायिक हिरासत में हैं।
जाँच के अनुसार, अवैध धनराशि से जर्सी (यूके) में 'तियान' लग्जरी यॉट और मैनहट्टन, न्यूयॉर्क में लग्जरी अपार्टमेंट खरीदा गया।
ईडी की जाँच सीबीआई की एफआईआर पर आधारित है, जो 21 अगस्त 2025 को दर्ज हुई थी।
CIRP प्रक्रिया के दौरान इन संपत्तियों को कथित तौर पर धोखाधड़ी से बेचकर राशि लेनदारों को न लौटाई गई।

नई दिल्ली की राउज एवेन्यू स्थित विशेष न्यायालय (पीएमएलए) ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (आरकॉम) और अन्य आरोपियों के विरुद्ध प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा दायर अभियोजन शिकायत का संज्ञान लिया है। यह संज्ञान सोमवार, 15 जून 2026 को लिया गया, जो इस बहुचर्चित बैंक धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में एक अहम कानूनी पड़ाव है।

मामले का मुख्य घटनाक्रम

ईडी ने 27 मार्च 2026 को राउज एवेन्यू की विशेष PMLA अदालत में आरकॉम के पूर्व निदेशक पुनीत गर्ग और वैशाली माने के खिलाफ अभियोजन शिकायत दर्ज की थी। इससे पहले ईडी ने 29 जनवरी 2026 को पुनीत गर्ग को गिरफ्तार किया था और वे अभी भी न्यायिक हिरासत में हैं। ईडी की यह जाँच केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) की उस प्राथमिकी (एफआईआर) पर आधारित है, जो 21 अगस्त 2025 को दर्ज की गई थी।

पुनीत गर्ग की आरकॉम में भूमिका

जाँच एजेंसी के अनुसार, पुनीत गर्ग 2001 से 2025 तक आरकॉम में विभिन्न वरिष्ठ पदों पर रहे। उन्होंने 2006 से 2013 तक आरकॉम के ग्लोबल एंटरप्राइज बिजनेस के अध्यक्ष के रूप में काम किया। इसके बाद 2014 से 2017 तक वे अध्यक्ष (नियामक मामले) रहे, और अक्टूबर 2017 में उन्हें कार्यकारी निदेशक नियुक्त किया गया। अप्रैल 2019 से अप्रैल 2025 तक उन्होंने गैर-कार्यकारी निदेशक का दायित्व निभाया।

ईडी की जाँच में क्या सामने आया

ईडी की जाँच के अनुसार, पुनीत गर्ग बैंक धोखाधड़ी से अर्जित अवैध कमाई को हासिल करने, छिपाने, लेयरिंग करने और उसे ठिकाने लगाने में कथित तौर पर सक्रिय रूप से शामिल थे। जाँच में पाया गया है कि इस अवैध धनराशि को आरकॉम की कई विदेशी सहायक कंपनियों और ऑफशोर कंपनियों के माध्यम से बाहर भेजा गया।

इस कथित अवैध कमाई का उपयोग दो बड़ी संपत्तियाँ खरीदने में किया गया — पहली, 'तियान' नाम की एक लग्जरी यॉट, जिसे जर्सी (यूके) की एक कंपनी ने खरीदा था; और दूसरी, मैनहट्टन, न्यूयॉर्क (अमेरिका) में एक लग्जरी कॉन्डोमिनियम अपार्टमेंट। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब आरकॉम और रिलायंस ग्रुप की कंपनियाँ कॉर्पोरेट इनसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रोसेस (CIRP) से गुजर रही थीं।

धोखाधड़ी का स्वरूप

आरोपों के अनुसार, CIRP की प्रक्रिया के दौरान इन संपत्तियों को चुपके से और धोखाधड़ी के तरीके से बेच दिया गया। बिक्री से प्राप्त राशि को वैध दावेदारों और लेनदारों को लौटाने के बजाय कथित तौर पर अन्यत्र स्थानांतरित कर दिया गया, जिससे ऋणदाता बैंकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा।

आगे क्या होगा

अदालत द्वारा अभियोजन शिकायत का संज्ञान लिए जाने के बाद अब मामले की औपचारिक सुनवाई की प्रक्रिया शुरू होगी। पुनीत गर्ग न्यायिक हिरासत में हैं, जबकि वैशाली माने के संदर्भ में अदालत की आगामी कार्यवाही निर्णायक होगी। यह मामला भारत के सबसे बड़े कॉर्पोरेट दिवालिया प्रकरणों में से एक से जुड़ा है और इसके नतीजे कॉर्पोरेट जवाबदेही की दिशा तय करेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या अपतटीय संपत्तियाँ वापस लाई जा सकेंगी और लेनदार बैंकों को उनका हक मिलेगा।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

PMLA कोर्ट ने रिलायंस कम्युनिकेशंस मामले में क्या किया है?
नई दिल्ली की राउज एवेन्यू स्थित विशेष PMLA अदालत ने 15 जून 2026 को रिलायंस कम्युनिकेशंस और अन्य के खिलाफ ईडी द्वारा दायर अभियोजन शिकायत का संज्ञान लिया है। इसका अर्थ है कि अब इस मामले में औपचारिक सुनवाई की प्रक्रिया शुरू होगी।
पुनीत गर्ग कौन हैं और उन पर क्या आरोप हैं?
पुनीत गर्ग रिलायंस कम्युनिकेशंस (आरकॉम) के पूर्व निदेशक हैं, जो 2001 से 2025 तक कंपनी में विभिन्न वरिष्ठ पदों पर रहे। ईडी के अनुसार, वे बैंक धोखाधड़ी से अर्जित अवैध कमाई को छिपाने, लेयरिंग करने और विदेशी संपत्तियों में निवेश करने में कथित तौर पर शामिल थे।
आरकॉम मनी लॉन्ड्रिंग मामले में किन संपत्तियों का जिक्र है?
जाँच के अनुसार, अवैध कमाई का उपयोग दो प्रमुख संपत्तियाँ खरीदने में हुआ — 'तियान' नाम की एक लग्जरी यॉट, जिसे जर्सी (यूके) की एक कंपनी ने खरीदा, और मैनहट्टन, न्यूयॉर्क (अमेरिका) में एक लग्जरी कॉन्डोमिनियम अपार्टमेंट। इन संपत्तियों को CIRP प्रक्रिया के दौरान कथित तौर पर धोखाधड़ी से बेचा गया।
ईडी की जाँच की शुरुआत कैसे हुई?
ईडी ने यह जाँच सीबीआई की उस एफआईआर के आधार पर शुरू की, जो 21 अगस्त 2025 को दर्ज हुई थी। इसके बाद ईडी ने PMLA, 2002 के प्रावधानों के तहत मनी लॉन्ड्रिंग की जाँच की और 29 जनवरी 2026 को पुनीत गर्ग को गिरफ्तार किया।
इस मामले में आगे क्या होगा?
अदालत के संज्ञान लेने के बाद अब मामले की नियमित सुनवाई होगी। पुनीत गर्ग न्यायिक हिरासत में हैं, जबकि वैशाली माने के संदर्भ में भी अदालत की कार्यवाही जारी रहेगी। विदेशी संपत्तियों की वापसी और लेनदारों को राशि लौटाने का मुद्दा भी सुनवाई के केंद्र में रहेगा।
राष्ट्र प्रेस
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