पंजाब में ईडी की छापेमारी: विपक्ष ने AAP सरकार पर लगाए भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप

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पंजाब में ईडी की छापेमारी: विपक्ष ने AAP सरकार पर लगाए भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप

सारांश

ईडी ने 7 मई को मोहाली और चंडीगढ़ में 12 ठिकानों पर छापेमारी की — और इसके साथ ही पंजाब की सियासत में नई आग भड़क उठी। अकाली दल के मजीठिया और कांग्रेस के बाजवा ने AAP सरकार पर भूमि, खनन और शराब से जुड़े कथित भ्रष्टाचार नेटवर्क के गंभीर आरोप लगाए हैं।

मुख्य बातें

ईडी ने 7 मई 2026 को मोहाली और चंडीगढ़ में बिल्डरों से जुड़े लगभग 12 ठिकानों पर छापेमारी की।
जाँच के दायरे में सनटेक सिटी प्रोजेक्ट , अजय सहगल , एबीएस टाउनशिप्स , अल्टस बिल्डर्स और धीर कंस्ट्रक्शंस शामिल हैं।
बिक्रम सिंह मजीठिया ने कथित भ्रष्टाचार के तीन स्रोत बताए — रियल एस्टेट, अवैध खनन और शराब व्यापार।
कांग्रेस नेता प्रताप सिंह बाजवा ने दावा किया कि छापेमारी मुख्यमंत्री भगवंत मान के एक करीबी सहयोगी के ठिकाने पर हुई।
AAP सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी तक सामने नहीं आई है।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 7 मई 2026 को मोहाली और चंडीगढ़ में बिल्डरों और उनके सहयोगियों से जुड़े लगभग 12 ठिकानों पर छापेमारी की, जिसके बाद पंजाब में एक नया सियासी तूफान खड़ा हो गया। विपक्षी दलों ने आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाते हुए राज्य में एक व्यापक 'लूट के सिस्टम' के संचालन का दावा किया है।

छापेमारी का दायरा

ईडी ने सनटेक सिटी प्रोजेक्ट और कई बिल्डरों से जुड़े ठिकानों पर तलाशी ली। इनमें अजय सहगल, एबीएस टाउनशिप्स प्राइवेट लिमिटेड, अल्टस बिल्डर्स, धीर कंस्ट्रक्शंस और उनके सहयोगी शामिल हैं। यह छापेमारी रियल एस्टेट क्षेत्र से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं की जाँच के तहत की गई बताई जा रही है।

अकाली दल का हमला

शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने मुख्यमंत्री भगवंत मान और AAP संयोजक अरविंद केजरीवाल पर तीखा हमला बोला। मजीठिया ने राष्ट्र प्रेस को बताया कि कथित तौर पर भ्रष्टाचार के तीन मुख्य स्रोत हैं — भूमि अधिग्रहण और रियल एस्टेट, अवैध खनन, और शराब का व्यापार।

मजीठिया के अनुसार, ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (GMADA) और पंजाब अर्बन प्लानिंग एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PUDA) के तहत आने वाली कीमती ज़मीनें किसानों से कम कीमतों पर अधिग्रहित की जाती हैं और फिर बड़े डेवलपर्स को सौंप दी जाती हैं। उनका आरोप है कि इन डेवलपर्स से कथित तौर पर किकबैक (कमीशन) लिया जाता है।

शराब के मुद्दे पर मजीठिया ने आरोप लगाया कि कथित तौर पर एक कुख्यात गैंगस्टर और कुछ व्यापारियों के साथ साझेदारी में यह कारोबार चलाया जा रहा है, जिसमें एक हिस्सा AAP नेतृत्व के पास जाता है। गौरतलब है कि ये आरोप विपक्ष की ओर से लगाए गए हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

कांग्रेस की प्रतिक्रिया

पंजाब विधानसभा में विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने AAP सरकार पर राज्य में 'बड़े भ्रष्टाचार का नेटवर्क' चलाने का आरोप लगाया। बाजवा ने राष्ट्र प्रेस से कहा,

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन अभी तक न्यायिक रूप से सिद्ध नहीं हुए हैं। दूसरी ओर, AAP सरकार की चुप्पी भी सवाल उठाती है — जब दिल्ली में शराब नीति मामले में केजरीवाल खुद जेल जा चुके हों, तो पंजाब में इसी तरह के आरोप राजनीतिक रूप से कहीं अधिक विस्फोटक हैं। असली परीक्षा यह होगी कि ईडी की जाँच आरोप-पत्र तक पहुँचती है या नहीं।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंजाब में ईडी की छापेमारी किन ठिकानों पर हुई?
ईडी ने 7 मई 2026 को मोहाली और चंडीगढ़ में सनटेक सिटी प्रोजेक्ट और कई बिल्डरों से जुड़े लगभग 12 ठिकानों पर तलाशी ली। इनमें अजय सहगल, एबीएस टाउनशिप्स प्राइवेट लिमिटेड, अल्टस बिल्डर्स और धीर कंस्ट्रक्शंस शामिल हैं।
बिक्रम सिंह मजीठिया ने AAP पर क्या आरोप लगाए?
मजीठिया ने कथित तौर पर तीन स्रोतों से भ्रष्टाचार का आरोप लगाया — भूमि अधिग्रहण और रियल एस्टेट, अवैध खनन, और शराब व्यापार। उनका दावा है कि GMADA और PUDA के तहत किसानों से कम कीमत पर ज़मीन लेकर बड़े डेवलपर्स को दी जाती है और उनसे किकबैक लिया जाता है।
प्रताप सिंह बाजवा ने ईडी छापेमारी पर क्या कहा?
कांग्रेस नेता और पंजाब विधानसभा में विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने दावा किया कि छापेमारी मुख्यमंत्री भगवंत मान के एक करीबी सहयोगी के ठिकाने पर हुई, जो पूरे पंजाब में उनका 'फ्रंटमैन' बनकर काम करता है।
AAP सरकार ने इन आरोपों पर क्या जवाब दिया?
खबर लिखे जाने तक AAP सरकार या मुख्यमंत्री भगवंत मान की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
पंजाब में ईडी की इस छापेमारी का राजनीतिक असर क्या होगा?
इस छापेमारी से पंजाब की सियासत में नई गरमाहट आने की संभावना है, खासकर तब जब AAP पहले से ही दिल्ली शराब नीति मामले के राजनीतिक असर से उबर रही है। विपक्ष इसे सरकार के खिलाफ एक बड़े हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की कोशिश करेगा।
राष्ट्र प्रेस
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