1 अक्टूबर 2026
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यवतमाल बैंक घोटाला: ईडी ने 9 ठिकानों पर की छापेमारी, ₹242 करोड़ की धोखाधड़ी उजागर

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यवतमाल बैंक घोटाला: ईडी ने 9 ठिकानों पर की छापेमारी, ₹242 करोड़ की धोखाधड़ी उजागर

सारांश

ईडी की मुंबई जोन टीम ने यवतमाल के 9 ठिकानों पर छापेमारी की — निशाने पर बाबाजी दाते महिला सहकारी बैंक का ₹242 करोड़ का वह घोटाला, जिसमें अधिकारियों ने ऋणकर्ताओं संग मिलकर जमाकर्ताओं के पैसे लूटे और खुद किकबैक लिए। RBI पहले ही 2022 में बैंक का लाइसेंस रद्द कर चुका है।

मुख्य बातें

ईडी की मुंबई जोन टीम ने 1 अक्टूबर 2026 को महाराष्ट्र के यवतमाल में 9 ठिकानों पर छापेमारी की।
कार्रवाई बाबाजी दाते महिला सहकारी बैंक लिमिटेड से जुड़े कथित ₹242 करोड़ के बैंक घोटाले के तहत पीएमएलए के अंतर्गत हुई।
RBI ने 2022 में इस बैंक का लाइसेंस रद्द कर दिया था, जिससे पहले राज्य सरकार ने विशेष ऑडिट कराया था।
जाँच में सामने आया कि बैंक अधिकारियों ने ऋणकर्ताओं के साथ मिलकर बिना गारंटी के ऋण दिए और किकबैक लिए।
ऋण की रकम का उपयोग निजी कामों, नकद निकासी और 'एवरग्रीनिंग' के लिए किया गया; आगे की जाँच जारी है।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की मुंबई जोन टीम ने 1 अक्टूबर 2026 को महाराष्ट्र के यवतमाल जिले में मनी लॉन्ड्रिंग निरोधक कानून (पीएमएलए) के तहत 9 अलग-अलग ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई बाबाजी दाते महिला सहकारी बैंक लिमिटेड से जुड़े कथित ₹242 करोड़ के बैंक घोटाले के सिलसिले में की गई है।

मामले की पृष्ठभूमि

बाबाजी दाते महिला सहकारी बैंक लिमिटेड महाराष्ट्र सहकारी सोसायटी अधिनियम, 1960 की धारा 9(1) के तहत पंजीकृत संस्था थी। बैंक में धोखाधड़ी और जमाकर्ताओं के धन के दुरुपयोग की लगातार शिकायतें मिलने पर महाराष्ट्र राज्य सरकार ने विशेष ऑडिट कराने का आदेश दिया। ऑडिट में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएँ सामने आईं, जिसके बाद भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने 2022 में इस बैंक का लाइसेंस रद्द कर दिया था।

गौरतलब है कि यवतमाल के अवधूतवाड़ी पुलिस स्टेशन में बैंक के अधिकारियों, कर्मचारियों और ऋण लेने वालों के खिलाफ कई प्राथमिकियाँ (एफआईआर) दर्ज की गई थीं। इन्हीं प्राथमिकियों के आधार पर ईडी ने पीएमएलए के तहत जाँच शुरू की।

घोटाले का तरीका

ऑडिट और ईडी की जाँच में कथित तौर पर सामने आया कि बैंक के सीईओ, चेयरपर्सन/चेयरमैन, निदेशकों और अन्य अधिकारियों ने ऋण लेने वालों, संपत्ति मूल्यांकनकर्ताओं (वैल्यूअर) तथा ऑडिटरों के साथ मिलकर एक सुनियोजित साजिश रची। जाँच के अनुसार, उचित गारंटी और ऋण चुकाने की क्षमता की जाँच किए बिना ही बड़े पैमाने पर ऋण बाँटे गए।

अधिकारियों के अनुसार, इन ऋणों की राशि को RBI की दिशानिर्देशों और बैंक के नियमों का उल्लंघन करते हुए दूसरे कामों में डायवर्ट किया गया। जाँच में यह भी पाया गया कि ऋणकर्ताओं ने ऋण की रकम का उपयोग निजी प्रयोजनों के लिए किया, नकद निकाली और पुराने ऋणों को नए ऋणों से चुकाने यानी 'एवरग्रीनिंग' का सहारा लिया।

किकबैक और गठजोड़ का खुलासा

ईडी की जाँच में बैंक अधिकारियों और ऋणकर्ताओं के बीच गहरे गठजोड़ का पता चला है। कथित तौर पर ऋण की रकम का एक हिस्सा बैंक अधिकारियों के खातों में किकबैक के रूप में भी स्थानांतरित किया गया। यह ऐसे समय में आया है जब देश भर में सहकारी बैंकों में वित्तीय अनुशासन को लेकर नियामकीय सख्ती बढ़ाई जा रही है।

जाँच में सामने आए तथ्यों के अनुसार, इस पूरे प्रकरण में ₹242 करोड़ की धोखाधड़ी की गई, जो मुख्यतः जमाकर्ताओं — खासकर महिला खाताधारकों — के धन को प्रभावित करती है।

ईडी की कार्रवाई और आगे की जाँच

1 अक्टूबर 2026 को चलाए गए इस तलाशी अभियान में ईडी ने यवतमाल जिले के 9 ठिकानों पर दस्तावेज़, डिजिटल साक्ष्य और अन्य संदिग्ध सामग्री खंगाली। प्रवर्तन निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि मामले में आगे की जाँच जारी है और निकट भविष्य में और खुलासे हो सकते हैं।

यह मामला महाराष्ट्र के सहकारी बैंकिंग क्षेत्र में शासन और पारदर्शिता की बड़ी चुनौती को उजागर करता है। आने वाले दिनों में गिरफ्तारी या संपत्ति कुर्की की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक सुनियोजित व्यवस्था थी। नीतिगत स्तर पर, सहकारी बैंकों के दोहरे नियामकीय ढाँचे — राज्य सरकार और RBI — में समन्वय की कमी इस तरह के घोटालों को पनपने देती है।
RashtraPress
1 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बाबाजी दाते महिला सहकारी बैंक घोटाला क्या है?
यह महाराष्ट्र के यवतमाल स्थित बाबाजी दाते महिला सहकारी बैंक लिमिटेड में कथित ₹242 करोड़ की धोखाधड़ी का मामला है। बैंक के सीईओ, चेयरपर्सन और अधिकारियों ने ऋणकर्ताओं के साथ मिलकर बिना उचित गारंटी के ऋण दिए और उस राशि को डायवर्ट किया।
ईडी ने यवतमाल में छापेमारी क्यों की?
ईडी ने पीएमएलए (मनी लॉन्ड्रिंग निरोधक कानून) के तहत 1 अक्टूबर 2026 को यवतमाल के 9 ठिकानों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई अवधूतवाड़ी पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर और राज्य सरकार के विशेष ऑडिट में सामने आई अनियमितताओं के आधार पर हुई।
RBI ने इस बैंक का लाइसेंस कब और क्यों रद्द किया?
भारतीय रिज़र्व बैंक ने 2022 में बाबाजी दाते महिला सहकारी बैंक का लाइसेंस रद्द किया। इससे पहले राज्य सरकार द्वारा कराए गए विशेष ऑडिट में धोखाधड़ी और जमाकर्ताओं के धन के दुरुपयोग की बड़ी अनियमितताएँ सामने आई थीं।
इस घोटाले में किकबैक और एवरग्रीनिंग क्या है?
जाँच के अनुसार, ऋणकर्ताओं ने ऋण की राशि का एक हिस्सा बैंक अधिकारियों के खातों में किकबैक के रूप में भेजा। 'एवरग्रीनिंग' वह तरीका है जिसमें पुराने बकाया ऋणों को नए ऋण देकर चुका दिया जाता है, जिससे खातों में गड़बड़ी छुप जाती है।
इस मामले में आगे क्या हो सकता है?
ईडी ने स्पष्ट किया है कि मामले में आगे की जाँच जारी है। जाँच में मिले दस्तावेज़ और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर निकट भविष्य में गिरफ्तारी या संपत्ति कुर्की की कार्रवाई संभव है।
राष्ट्र प्रेस
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