यवतमाल बैंक घोटाला: ईडी ने 9 ठिकानों पर की छापेमारी, ₹242 करोड़ की धोखाधड़ी उजागर
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की मुंबई जोन टीम ने 1 अक्टूबर 2026 को महाराष्ट्र के यवतमाल जिले में मनी लॉन्ड्रिंग निरोधक कानून (पीएमएलए) के तहत 9 अलग-अलग ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई बाबाजी दाते महिला सहकारी बैंक लिमिटेड से जुड़े कथित ₹242 करोड़ के बैंक घोटाले के सिलसिले में की गई है।
मामले की पृष्ठभूमि
बाबाजी दाते महिला सहकारी बैंक लिमिटेड महाराष्ट्र सहकारी सोसायटी अधिनियम, 1960 की धारा 9(1) के तहत पंजीकृत संस्था थी। बैंक में धोखाधड़ी और जमाकर्ताओं के धन के दुरुपयोग की लगातार शिकायतें मिलने पर महाराष्ट्र राज्य सरकार ने विशेष ऑडिट कराने का आदेश दिया। ऑडिट में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएँ सामने आईं, जिसके बाद भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने 2022 में इस बैंक का लाइसेंस रद्द कर दिया था।
गौरतलब है कि यवतमाल के अवधूतवाड़ी पुलिस स्टेशन में बैंक के अधिकारियों, कर्मचारियों और ऋण लेने वालों के खिलाफ कई प्राथमिकियाँ (एफआईआर) दर्ज की गई थीं। इन्हीं प्राथमिकियों के आधार पर ईडी ने पीएमएलए के तहत जाँच शुरू की।
घोटाले का तरीका
ऑडिट और ईडी की जाँच में कथित तौर पर सामने आया कि बैंक के सीईओ, चेयरपर्सन/चेयरमैन, निदेशकों और अन्य अधिकारियों ने ऋण लेने वालों, संपत्ति मूल्यांकनकर्ताओं (वैल्यूअर) तथा ऑडिटरों के साथ मिलकर एक सुनियोजित साजिश रची। जाँच के अनुसार, उचित गारंटी और ऋण चुकाने की क्षमता की जाँच किए बिना ही बड़े पैमाने पर ऋण बाँटे गए।
अधिकारियों के अनुसार, इन ऋणों की राशि को RBI की दिशानिर्देशों और बैंक के नियमों का उल्लंघन करते हुए दूसरे कामों में डायवर्ट किया गया। जाँच में यह भी पाया गया कि ऋणकर्ताओं ने ऋण की रकम का उपयोग निजी प्रयोजनों के लिए किया, नकद निकाली और पुराने ऋणों को नए ऋणों से चुकाने यानी 'एवरग्रीनिंग' का सहारा लिया।
किकबैक और गठजोड़ का खुलासा
ईडी की जाँच में बैंक अधिकारियों और ऋणकर्ताओं के बीच गहरे गठजोड़ का पता चला है। कथित तौर पर ऋण की रकम का एक हिस्सा बैंक अधिकारियों के खातों में किकबैक के रूप में भी स्थानांतरित किया गया। यह ऐसे समय में आया है जब देश भर में सहकारी बैंकों में वित्तीय अनुशासन को लेकर नियामकीय सख्ती बढ़ाई जा रही है।
जाँच में सामने आए तथ्यों के अनुसार, इस पूरे प्रकरण में ₹242 करोड़ की धोखाधड़ी की गई, जो मुख्यतः जमाकर्ताओं — खासकर महिला खाताधारकों — के धन को प्रभावित करती है।
ईडी की कार्रवाई और आगे की जाँच
1 अक्टूबर 2026 को चलाए गए इस तलाशी अभियान में ईडी ने यवतमाल जिले के 9 ठिकानों पर दस्तावेज़, डिजिटल साक्ष्य और अन्य संदिग्ध सामग्री खंगाली। प्रवर्तन निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि मामले में आगे की जाँच जारी है और निकट भविष्य में और खुलासे हो सकते हैं।
यह मामला महाराष्ट्र के सहकारी बैंकिंग क्षेत्र में शासन और पारदर्शिता की बड़ी चुनौती को उजागर करता है। आने वाले दिनों में गिरफ्तारी या संपत्ति कुर्की की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।