15 जुलाई 2026
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'एक देश, एक चुनाव' पर सपा सांसद छोटे लाल खरवार बोले — UP में पंचायत चुनाव नहीं हुए, देशभर में कैसे होंगे?

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'एक देश, एक चुनाव' पर सपा सांसद छोटे लाल खरवार बोले — UP में पंचायत चुनाव नहीं हुए, देशभर में कैसे होंगे?

सारांश

सपा सांसद छोटे लाल खरवार ने 'एक देश, एक चुनाव' की व्यावहारिकता पर सीधा सवाल दागा — जब उत्तर प्रदेश में पाँच साल से पंचायत चुनाव नहीं हुए, तो पूरे देश में एक साथ मतदान का दावा खोखला है। साथ ही उन्होंने मंत्री ओपी राजभर पर भी तीखा पलटवार किया।

मुख्य बातें

सपा सांसद छोटे लाल खरवार ने 15 जुलाई को लखनऊ में 'एक देश, एक चुनाव' प्रस्ताव की व्यावहारिकता पर गंभीर सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में पिछले पाँच वर्षों से पंचायत चुनाव नहीं हुए, जो सरकार के दावे को कमज़ोर करता है।
चुनाव आयोग के अनुसार UP में एक साथ चुनाव कराने से केवल ढाई करोड़ रुपये की बचत होगी — जिसे खरवार ने नगण्य बताया।
विधेयक में यह स्पष्ट नहीं कि यदि कोई राज्य सरकार कार्यकाल के बीच गिर जाए, तो क्या होगा।
खरवार ने माँग की कि जिला व ब्लॉक प्रमुख चुनाव पार्टी चिह्न पर हों, ताकि दलित, गरीब और आदिवासी प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो।
मंत्री ओपी राजभर पर पलटवार करते हुए कहा कि 2027 के विधानसभा चुनाव में प्रदर्शन से तय होगा कौन सही है।

समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद छोटे लाल खरवार ने बुधवार, 15 जुलाई को लखनऊ में पत्रकारों से बातचीत में 'एक देश, एक चुनाव' के प्रस्ताव पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकार पिछले पाँच वर्षों में उत्तर प्रदेश के पंचायत चुनाव तक नहीं करा पाई, तो पूरे देश में एक साथ चुनाव कराने का दावा कितना व्यावहारिक है।

मुख्य घटनाक्रम

खरवार ने बताया कि 'एक देश, एक चुनाव' पर समीक्षा बैठकों के सिलसिले में उन्होंने दस राज्यों का दौरा किया और वहाँ के लोगों से राय जानी। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) इस प्रस्ताव के पक्ष में यह तर्क दे रही है कि एक साथ चुनाव कराने से खर्च कम होगा, लेकिन उनके अनुसार यह तर्क तथ्यों पर खरा नहीं उतरता। उन्होंने बताया कि चुनाव आयोग की उत्तर प्रदेश यात्रा के दौरान पाया गया कि प्रदेश में एक साथ चुनाव कराने से मात्र ढाई करोड़ रुपये का अंतर आता है — जो उनके अनुसार नगण्य है।

सरकार पर सवाल

सपा सांसद ने सरकार को सीधी चुनौती देते हुए कहा कि यदि वह सच में 'एक देश, एक चुनाव' लागू करना चाहती है, तो पहले उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में जिला, पंचायत और नगर निगम के चुनाव एक साथ करके दिखाए। उन्होंने यह भी जोड़ा कि अनेक अन्य राज्यों में भी विभिन्न स्थानीय निकाय चुनाव लंबित पड़े हैं, जो इस प्रस्ताव की व्यावहारिकता पर प्रश्नचिह्न लगाते हैं।

खरवार ने यह भी उठाया कि प्रस्तावित विधेयक में एक महत्वपूर्ण परिस्थिति का उत्तर नहीं दिया गया है — 'यदि किसी राज्य में सरकार गिर जाए, तो क्या होगा?' उन्होंने कहा कि इस संवैधानिक पेच का समाधान किए बिना 'एक देश, एक चुनाव' का विचार अधूरा है।

पंचायत चुनाव और दलित प्रतिनिधित्व

सपा सांसद ने माँग की कि जिला प्रमुख और ब्लॉक प्रमुख के चुनाव पार्टी के चुनाव चिह्न पर होने चाहिए, ताकि दलित, गरीब और आदिवासी समुदाय के प्रतिनिधि भी राजनीतिक दलों के समर्थन से चुनाव लड़ सकें। उन्होंने कहा कि इस दिशा में सपा पार्टी भी अपने उम्मीदवारों की मदद करेगी। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि पंचायत और नगर निकाय चुनाव सौ दिनों के भीतर कराए जाएँ और उसके बाद लोकसभा व विधानसभा चुनाव हों।

ओपी राजभर पर तीखी प्रतिक्रिया

उत्तर प्रदेश के मंत्री ओपी राजभर के बयानों पर खरवार ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति का बेटा BJP के साथ गठबंधन में चुनाव हार चुका हो, वह सपा की संभावनाओं पर टिप्पणी करने की स्थिति में नहीं है। उन्होंने याद दिलाया कि राजभर सपा में रहते हुए ही विधायक बने थे और 2027 के विधानसभा चुनाव में उनके प्रदर्शन का इंतजार रहेगा।

आगे की राह

खरवार ने संकेत दिया कि 'एक देश, एक चुनाव' पर समीक्षा बैठकों का सिलसिला संभवतः 2029 तक जारी रहेगा और इस दौरान ग्राम एवं नगर पंचायत चुनावों को भी इस ढाँचे में शामिल करने पर चर्चा हो रही है। फिलहाल विपक्षी दलों की आपत्तियाँ और लंबित स्थानीय चुनावों की समस्या इस प्रस्ताव के सामने सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

एक चुनाव' की बहस में खरवार का यह सवाल महज़ विपक्षी आलोचना नहीं है — यह एक ठोस प्रशासनिक विरोधाभास की ओर इशारा करता है। यदि देश के सबसे बड़े राज्य में स्थानीय निकाय चुनाव वर्षों से लंबित हैं, तो राष्ट्रीय एकीकृत चुनाव की तैयारी का दावा कितना टिकाऊ है? विधेयक में 'मध्यावधि सरकार गिरने' की स्थिति का कोई स्पष्ट प्रावधान न होना एक गंभीर संवैधानिक खामी है जिस पर मुख्यधारा की कवरेज कम ध्यान दे रही है। ढाई करोड़ की बचत का आँकड़ा भी यह सवाल खड़ा करता है कि क्या लागत-कटौती का तर्क वास्तव में इस ऐतिहासिक संवैधानिक बदलाव को उचित ठहराने के लिए पर्याप्त है।
RashtraPress
15 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'एक देश, एक चुनाव' पर सपा का क्या रुख है?
समाजवादी पार्टी इस प्रस्ताव का विरोध कर रही है। सपा सांसद छोटे लाल खरवार ने कहा कि जब सरकार उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव नहीं करा पाई, तो पूरे देश में एक साथ चुनाव कराने का दावा व्यावहारिक नहीं है।
UP में पंचायत चुनाव क्यों नहीं हुए?
सपा सांसद खरवार के अनुसार उत्तर प्रदेश में पिछले पाँच वर्षों से पंचायत चुनाव लंबित हैं, हालाँकि उन्होंने इसकी सटीक वजह सरकार से पूछी है। उनका कहना है कि इसी तरह कई अन्य राज्यों में भी स्थानीय निकाय चुनाव अटके हुए हैं।
एक साथ चुनाव कराने से कितनी बचत होगी?
चुनाव आयोग की रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश में एक साथ चुनाव कराने से मात्र ढाई करोड़ रुपये का अंतर आता है। खरवार ने इसे नगण्य बताते हुए BJP के 'खर्च कम होगा' वाले तर्क को कमज़ोर बताया।
'एक देश, एक चुनाव' विधेयक में क्या कमी है?
सपा सांसद के अनुसार विधेयक में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि यदि कार्यकाल के बीच किसी राज्य की सरकार गिर जाए तो क्या होगा। यह एक महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रश्न है जिसका उत्तर अभी तक नहीं दिया गया।
खरवार ने ओपी राजभर पर क्या कहा?
सपा सांसद खरवार ने उत्तर प्रदेश के मंत्री ओपी राजभर के बयानों को खारिज करते हुए कहा कि राजभर सपा में रहते हुए ही विधायक बने थे और उनके बेटे BJP गठबंधन में चुनाव हार चुके हैं। उन्होंने 2027 के विधानसभा चुनाव में प्रदर्शन से जवाब देने की चुनौती दी।
राष्ट्र प्रेस
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