'एक देश, एक चुनाव' पर सपा सांसद छोटे लाल खरवार बोले — UP में पंचायत चुनाव नहीं हुए, देशभर में कैसे होंगे?
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद छोटे लाल खरवार ने बुधवार, 15 जुलाई को लखनऊ में पत्रकारों से बातचीत में 'एक देश, एक चुनाव' के प्रस्ताव पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकार पिछले पाँच वर्षों में उत्तर प्रदेश के पंचायत चुनाव तक नहीं करा पाई, तो पूरे देश में एक साथ चुनाव कराने का दावा कितना व्यावहारिक है।
मुख्य घटनाक्रम
खरवार ने बताया कि 'एक देश, एक चुनाव' पर समीक्षा बैठकों के सिलसिले में उन्होंने दस राज्यों का दौरा किया और वहाँ के लोगों से राय जानी। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) इस प्रस्ताव के पक्ष में यह तर्क दे रही है कि एक साथ चुनाव कराने से खर्च कम होगा, लेकिन उनके अनुसार यह तर्क तथ्यों पर खरा नहीं उतरता। उन्होंने बताया कि चुनाव आयोग की उत्तर प्रदेश यात्रा के दौरान पाया गया कि प्रदेश में एक साथ चुनाव कराने से मात्र ढाई करोड़ रुपये का अंतर आता है — जो उनके अनुसार नगण्य है।
सरकार पर सवाल
सपा सांसद ने सरकार को सीधी चुनौती देते हुए कहा कि यदि वह सच में 'एक देश, एक चुनाव' लागू करना चाहती है, तो पहले उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में जिला, पंचायत और नगर निगम के चुनाव एक साथ करके दिखाए। उन्होंने यह भी जोड़ा कि अनेक अन्य राज्यों में भी विभिन्न स्थानीय निकाय चुनाव लंबित पड़े हैं, जो इस प्रस्ताव की व्यावहारिकता पर प्रश्नचिह्न लगाते हैं।
खरवार ने यह भी उठाया कि प्रस्तावित विधेयक में एक महत्वपूर्ण परिस्थिति का उत्तर नहीं दिया गया है — 'यदि किसी राज्य में सरकार गिर जाए, तो क्या होगा?' उन्होंने कहा कि इस संवैधानिक पेच का समाधान किए बिना 'एक देश, एक चुनाव' का विचार अधूरा है।
पंचायत चुनाव और दलित प्रतिनिधित्व
सपा सांसद ने माँग की कि जिला प्रमुख और ब्लॉक प्रमुख के चुनाव पार्टी के चुनाव चिह्न पर होने चाहिए, ताकि दलित, गरीब और आदिवासी समुदाय के प्रतिनिधि भी राजनीतिक दलों के समर्थन से चुनाव लड़ सकें। उन्होंने कहा कि इस दिशा में सपा पार्टी भी अपने उम्मीदवारों की मदद करेगी। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि पंचायत और नगर निकाय चुनाव सौ दिनों के भीतर कराए जाएँ और उसके बाद लोकसभा व विधानसभा चुनाव हों।
ओपी राजभर पर तीखी प्रतिक्रिया
उत्तर प्रदेश के मंत्री ओपी राजभर के बयानों पर खरवार ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति का बेटा BJP के साथ गठबंधन में चुनाव हार चुका हो, वह सपा की संभावनाओं पर टिप्पणी करने की स्थिति में नहीं है। उन्होंने याद दिलाया कि राजभर सपा में रहते हुए ही विधायक बने थे और 2027 के विधानसभा चुनाव में उनके प्रदर्शन का इंतजार रहेगा।
आगे की राह
खरवार ने संकेत दिया कि 'एक देश, एक चुनाव' पर समीक्षा बैठकों का सिलसिला संभवतः 2029 तक जारी रहेगा और इस दौरान ग्राम एवं नगर पंचायत चुनावों को भी इस ढाँचे में शामिल करने पर चर्चा हो रही है। फिलहाल विपक्षी दलों की आपत्तियाँ और लंबित स्थानीय चुनावों की समस्या इस प्रस्ताव के सामने सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।