17 जुलाई 2026
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हनी ट्रैप का शिकार हुआ डोडा का युवक: फेसबुक फ्रेंड रिक्वेस्ट से शुरू हुई दुश्मन देश की साज़िश

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हनी ट्रैप का शिकार हुआ डोडा का युवक: फेसबुक फ्रेंड रिक्वेस्ट से शुरू हुई दुश्मन देश की साज़िश

सारांश

डोडा के एक युवक की फेसबुक फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार करना भारी पड़ा — कथित दुश्मन देश के नंबर से देश-विरोधी काम कराने की कोशिश हुई, इनकार पर बच्चों तक को धमकी दी गई। पीड़ित की आपबीती साइबर हनी ट्रैप के बढ़ते खतरे की गंभीर चेतावनी है।

मुख्य बातें

डोडा, जम्मू-कश्मीर के एक व्यक्ति को दिसंबर 2025 में फेसबुक पर अनजान लड़की की प्रोफाइल से फ्रेंड रिक्वेस्ट मिली, जिसे उसने स्वीकार किया।
मार्च 2026 में व्हाट्सएप नंबर साझा करने पर कथित तौर पर दुश्मन देश के नंबर से संपर्क हुआ और देश-विरोधी गतिविधियों के लिए उकसाया गया।
इनकार करने पर परिवार और बच्चों को नुकसान पहुँचाने की धमकियाँ दी गईं।
पीड़ित ने नंबर ब्लॉक किया तो कई अलग-अलग नंबरों से धमकी भरे संदेश आते रहे।
पीड़ित ने अपील की — अजनबी फ्रेंड रिक्वेस्ट न स्वीकारें, संदिग्ध संपर्क की सूचना तुरंत पुलिस या सुरक्षा एजेंसियों को दें।

जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले के एक व्यक्ति के साथ दिसंबर 2025 में शुरू हुई एक साधारण-सी फेसबुक फ्रेंड रिक्वेस्ट धीरे-धीरे हनी ट्रैप और देश-विरोधी गतिविधियों में फँसाने की कोशिश में बदल गई। पीड़ित के अनुसार, एक अनजान लड़की की प्रोफाइल से शुरू हुई बातचीत अंततः कथित दुश्मन देश के नंबर से आई धमकियों तक जा पहुँची, जिसमें परिवार और बच्चों को नुकसान पहुँचाने तक की बात कही गई।

मुख्य घटनाक्रम

पीड़ित ने बताया कि दिसंबर 2025 में उसने अपने फेसबुक अकाउंट पर एक वीडियो साझा किया था। उस वीडियो पर एक अनजान लड़की की प्रोफाइल से कमेंट आया और उसके बाद फ्रेंड रिक्वेस्ट मिली, जिसे उसने स्वीकार कर लिया। कई हफ्तों तक फेसबुक पर बातचीत होती रही।

मार्च 2026 में उस प्रोफाइल ने पीड़ित से व्हाट्सएप नंबर माँगा। उसने खुद को जम्मू-कश्मीर का निवासी बताया था, इसलिए पीड़ित ने बिना संदेह के अपना नंबर साझा कर दिया। लेकिन जब व्हाट्सएप पर संदेश आया तो पीड़ित के अनुसार वह नंबर कथित तौर पर दुश्मन देश का था।

ब्लैकमेलिंग और धमकियाँ

पीड़ित का कहना है कि उस नंबर से उसे देश-विरोधी और गलत कामों के लिए उकसाया जाने लगा। जब उसने इनकार किया तो उसने वह नंबर ब्लॉक कर दिया। इसके बाद कई अलग-अलग नंबरों से संदेश आने शुरू हो गए। पीड़ित के अनुसार, धमकियाँ इस हद तक बढ़ गईं कि परिवार के सदस्यों और बच्चों को नुकसान पहुँचाने तक की बात कही गई।

यह ऐसे समय में आया है जब जम्मू-कश्मीर में सोशल मीडिया के ज़रिए हनी ट्रैप और जासूसी के प्रयासों के मामले सुरक्षा एजेंसियों की चिंता का विषय बने हुए हैं। गौरतलब है कि इस तरह के मामलों में आम नागरिकों को निशाना बनाकर संवेदनशील जानकारी हासिल करने की कोशिश की जाती है।

पीड़ित की अपील

पीड़ित ने अन्य लोगों को सचेत करते हुए कहा कि अजनबी प्रोफाइल से आने वाली फ्रेंड रिक्वेस्ट — खासकर लड़कियों के नाम से — स्वीकार करने से बचें। उसने कहा, 'मीठी-मीठी बातें करने वाला अजनबी कभी आपका सच्चा दोस्त नहीं हो सकता।' संदिग्ध कॉल या संदेशों का जवाब न देने की भी उसने सलाह दी।

पीड़ित ने यह भी कहा कि यदि कोई देश से जुड़ी संवेदनशील जानकारी माँगे तो तुरंत संबंधित सुरक्षा एजेंसियों को सूचित करें। सोशल मीडिया पर ब्लैकमेलिंग की शिकायत स्थानीय पुलिस में दर्ज कराई जा सकती है।

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की राय

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, सोशल मीडिया पर फर्जी प्रोफाइल बनाकर हनी ट्रैप के ज़रिए लोगों को फँसाना एक संगठित तरीका है जिसका इस्तेमाल कथित तौर पर विदेशी खुफिया नेटवर्क करते हैं। ऐसे मामलों में पीड़ित अक्सर डर और शर्म के कारण शिकायत दर्ज नहीं कराते, जिससे यह सिलसिला जारी रहता है।

क्या होगा आगे

पीड़ित के बयान के बाद यह मामला सार्वजनिक हुआ है। सुरक्षा एजेंसियाँ ऐसे मामलों में नागरिकों से अपील करती हैं कि किसी भी संदिग्ध संपर्क की सूचना तत्काल दें। डोडा पुलिस और संबंधित साइबर सेल इस मामले की जानकारी से अवगत हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि अधिकांश पीड़ित सामाजिक शर्म के कारण चुप रहते हैं — जो इन नेटवर्कों की असली ताकत है। जम्मू-कश्मीर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में डिजिटल साक्षरता और साइबर सुरक्षा जागरूकता की कमी इस खतरे को और गहरा करती है। सुरक्षा एजेंसियों को प्रतिक्रियात्मक नहीं, बल्कि निवारक रणनीति अपनानी होगी।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हनी ट्रैप क्या होता है और यह कैसे काम करता है?
हनी ट्रैप एक ऐसी साज़िश है जिसमें फर्जी प्रोफाइल — अक्सर आकर्षक महिला के नाम से — बनाकर किसी व्यक्ति से भावनात्मक या रोमांटिक संबंध स्थापित किए जाते हैं और फिर उसे ब्लैकमेल या देश-विरोधी कामों के लिए मजबूर किया जाता है। डोडा मामले में फेसबुक कमेंट से शुरुआत हुई और व्हाट्सएप पर धमकियाँ दी गईं।
सोशल मीडिया पर ब्लैकमेलिंग होने पर क्या करें?
तुरंत स्थानीय पुलिस या साइबर क्राइम सेल में शिकायत दर्ज कराएँ। संदिग्ध नंबर और चैट का स्क्रीनशॉट सुरक्षित रखें और किसी भी माँग के आगे न झुकें। यदि मामला देश-विरोधी गतिविधियों से जुड़ा हो तो संबंधित सुरक्षा एजेंसियों को भी सूचित करें।
डोडा के पीड़ित के साथ क्या हुआ?
पीड़ित को दिसंबर 2025 में फेसबुक पर अनजान लड़की की प्रोफाइल से फ्रेंड रिक्वेस्ट मिली। मार्च 2026 में व्हाट्सएप नंबर साझा करने के बाद कथित दुश्मन देश के नंबर से संपर्क हुआ और देश-विरोधी काम कराने की कोशिश की गई। इनकार करने पर परिवार व बच्चों को जान से मारने की धमकियाँ दी गईं।
फर्जी फेसबुक फ्रेंड रिक्वेस्ट से कैसे बचें?
अनजान प्रोफाइल — खासकर कम दोस्तों वाली या हाल ही में बनी — से फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार न करें। अपना फोन नंबर अजनबियों से साझा न करें और संदिग्ध संदेशों का जवाब देने से बचें। किसी भी दबाव या लालच में न आएँ।
जम्मू-कश्मीर में साइबर हनी ट्रैप के मामले क्यों बढ़ रहे हैं?
सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, जम्मू-कश्मीर एक संवेदनशील क्षेत्र होने के कारण विदेशी खुफिया नेटवर्क यहाँ के नागरिकों को सोशल मीडिया के ज़रिए निशाना बनाते हैं। डिजिटल साक्षरता की कमी और सामाजिक शर्म के कारण कई पीड़ित शिकायत नहीं करते, जिससे ऐसे मामले बढ़ते रहते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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