हनी ट्रैप का शिकार हुआ डोडा का युवक: फेसबुक फ्रेंड रिक्वेस्ट से शुरू हुई दुश्मन देश की साज़िश
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले के एक व्यक्ति के साथ दिसंबर 2025 में शुरू हुई एक साधारण-सी फेसबुक फ्रेंड रिक्वेस्ट धीरे-धीरे हनी ट्रैप और देश-विरोधी गतिविधियों में फँसाने की कोशिश में बदल गई। पीड़ित के अनुसार, एक अनजान लड़की की प्रोफाइल से शुरू हुई बातचीत अंततः कथित दुश्मन देश के नंबर से आई धमकियों तक जा पहुँची, जिसमें परिवार और बच्चों को नुकसान पहुँचाने तक की बात कही गई।
मुख्य घटनाक्रम
पीड़ित ने बताया कि दिसंबर 2025 में उसने अपने फेसबुक अकाउंट पर एक वीडियो साझा किया था। उस वीडियो पर एक अनजान लड़की की प्रोफाइल से कमेंट आया और उसके बाद फ्रेंड रिक्वेस्ट मिली, जिसे उसने स्वीकार कर लिया। कई हफ्तों तक फेसबुक पर बातचीत होती रही।
मार्च 2026 में उस प्रोफाइल ने पीड़ित से व्हाट्सएप नंबर माँगा। उसने खुद को जम्मू-कश्मीर का निवासी बताया था, इसलिए पीड़ित ने बिना संदेह के अपना नंबर साझा कर दिया। लेकिन जब व्हाट्सएप पर संदेश आया तो पीड़ित के अनुसार वह नंबर कथित तौर पर दुश्मन देश का था।
ब्लैकमेलिंग और धमकियाँ
पीड़ित का कहना है कि उस नंबर से उसे देश-विरोधी और गलत कामों के लिए उकसाया जाने लगा। जब उसने इनकार किया तो उसने वह नंबर ब्लॉक कर दिया। इसके बाद कई अलग-अलग नंबरों से संदेश आने शुरू हो गए। पीड़ित के अनुसार, धमकियाँ इस हद तक बढ़ गईं कि परिवार के सदस्यों और बच्चों को नुकसान पहुँचाने तक की बात कही गई।
यह ऐसे समय में आया है जब जम्मू-कश्मीर में सोशल मीडिया के ज़रिए हनी ट्रैप और जासूसी के प्रयासों के मामले सुरक्षा एजेंसियों की चिंता का विषय बने हुए हैं। गौरतलब है कि इस तरह के मामलों में आम नागरिकों को निशाना बनाकर संवेदनशील जानकारी हासिल करने की कोशिश की जाती है।
पीड़ित की अपील
पीड़ित ने अन्य लोगों को सचेत करते हुए कहा कि अजनबी प्रोफाइल से आने वाली फ्रेंड रिक्वेस्ट — खासकर लड़कियों के नाम से — स्वीकार करने से बचें। उसने कहा, 'मीठी-मीठी बातें करने वाला अजनबी कभी आपका सच्चा दोस्त नहीं हो सकता।' संदिग्ध कॉल या संदेशों का जवाब न देने की भी उसने सलाह दी।
पीड़ित ने यह भी कहा कि यदि कोई देश से जुड़ी संवेदनशील जानकारी माँगे तो तुरंत संबंधित सुरक्षा एजेंसियों को सूचित करें। सोशल मीडिया पर ब्लैकमेलिंग की शिकायत स्थानीय पुलिस में दर्ज कराई जा सकती है।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की राय
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, सोशल मीडिया पर फर्जी प्रोफाइल बनाकर हनी ट्रैप के ज़रिए लोगों को फँसाना एक संगठित तरीका है जिसका इस्तेमाल कथित तौर पर विदेशी खुफिया नेटवर्क करते हैं। ऐसे मामलों में पीड़ित अक्सर डर और शर्म के कारण शिकायत दर्ज नहीं कराते, जिससे यह सिलसिला जारी रहता है।
क्या होगा आगे
पीड़ित के बयान के बाद यह मामला सार्वजनिक हुआ है। सुरक्षा एजेंसियाँ ऐसे मामलों में नागरिकों से अपील करती हैं कि किसी भी संदिग्ध संपर्क की सूचना तत्काल दें। डोडा पुलिस और संबंधित साइबर सेल इस मामले की जानकारी से अवगत हैं।