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दिल्ली साइबर पुलिस ने AI से मॉर्फ्ड तस्वीरें बनाकर ब्लैकमेल करने वाले आरोपी को किया गिरफ्तार

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दिल्ली साइबर पुलिस ने AI से मॉर्फ्ड तस्वीरें बनाकर ब्लैकमेल करने वाले आरोपी को किया गिरफ्तार

सारांश

दिल्ली पुलिस की साइबर टीम ने एक ऐसे शातिर आरोपी को दबोचा जो नौकरी का झाँसा देकर युवतियों की AI से मॉर्फ्ड तस्वीरें बनाता था और वायरल करने की धमकी देकर वसूली करता था। 2022-23 में भी गिरफ्तार हो चुके इस आरोपी का यह मामला बढ़ते डीपफेक साइबर अपराधों की गंभीर तस्वीर पेश करता है।

मुख्य बातें

दिल्ली साइबर थाना उत्तर जिला ने 4 जून 2026 को भलस्वा डेयरी से आरोपी सौरव (30 वर्ष) को गिरफ्तार किया।
आरोपी ने AI टूल्स से मॉर्फ्ड तस्वीरें बनाकर मल्कागंज की 19 वर्षीय युवती से कुल ₹40,000 की वसूली की।
आरोपी 'लक्ष्य गर्ग' फर्जी नाम से स्नैपचैट और व्हाट्सएप पर सक्रिय था।
आरोपी को 2022 और 2023 में भी यौन उत्पीड़न व जबरन वसूली के मामलों में गिरफ्तार किया जा चुका है।
पुलिस ने मोबाइल फोन , सिम कार्ड और वाईफाई राउटर बरामद किए; BNS की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज।

दिल्ली पुलिस की साइबर थाना उत्तर जिला टीम ने 4 जून 2026 को भलस्वा डेयरी इलाके से एक ऐसे आरोपी को गिरफ्तार किया है, जो कथित तौर पर AI-आधारित तकनीक का उपयोग कर महिलाओं की मॉर्फ्ड और आपत्तिजनक तस्वीरें तैयार करता था और उन्हें सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी देकर वसूली करता था। आरोपी की पहचान 30 वर्षीय सौरव के रूप में हुई है, जो एक निजी फाइनेंस कंपनी में कार्यरत बताया जाता है।

शिकायत और मामले की शुरुआत

मल्कागंज क्षेत्र की 19 वर्षीय एक युवती ने राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार, एक अज्ञात व्यक्ति ने व्हाट्सएप के ज़रिए उससे संपर्क कर उसकी मॉर्फ्ड तस्वीर भेजी और उसे हटाने के बदले पैसों की माँग की। आरोपी ने 'लक्ष्य गर्ग' नाम से स्नैपचैट प्रोफाइल बनाकर पीड़िता से बातचीत की और ₹30,000 की माँग रखी। परिवार ने बदनामी के डर से QR कोड के माध्यम से यह रकम ट्रांसफर कर दी।

दोबारा उगाही और बढ़ता दबाव

पुलिस के अनुसार, कुछ महीनों बाद फरवरी 2026 में आरोपी ने पुनः संपर्क कर अतिरिक्त धनराशि की माँग शुरू कर दी। पीड़िता ने एक साइबर कैफे के माध्यम से ₹10,000 और भेजे। इसके बावजूद आरोपी लगातार अधिक पैसे माँगता रहा और अन्य युवतियों की संपर्क जानकारी उपलब्ध कराने का दबाव भी बनाता रहा। लगातार धमकियों से परेशान होकर पीड़िता ने अंततः पुलिस से संपर्क किया।

आरोपी का तरीकावार

पूछताछ में सामने आया कि सौरव सोशल मीडिया पर नौकरी दिलाने का झाँसा देकर युवतियों से संपर्क करता था। विश्वास हासिल करने के बाद वह उनसे रिज्यूमे माँगता और वीडियो वेरिफिकेशन कॉल में शामिल होने को कहता। कॉल के दौरान लिए गए स्क्रीनशॉट और AI टूल्स की सहायता से वह फर्जी अश्लील तस्वीरें तैयार करता था, जिनका उपयोग ब्लैकमेलिंग और वसूली के लिए किया जाता था।

आरोपी का आपराधिक इतिहास

जाँच में यह भी उजागर हुआ कि आरोपी को वर्ष 2022 और 2023 में भी यौन उत्पीड़न, पीछा करने और जबरन वसूली से जुड़े मामलों में गिरफ्तार किया जा चुका है। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में AI-जनित डीपफेक और मॉर्फ्ड तस्वीरों से जुड़े साइबर अपराधों में तेज़ी दर्ज की जा रही है।

बरामदगी और आगे की जाँच

पुलिस ने आरोपी के कब्जे से एक मोबाइल फोन, एक सिम कार्ड और अपराध में इस्तेमाल किया गया वाईफाई राउटर बरामद किया है। डीसीपी नॉर्थ के निर्देश पर गठित विशेष टीम ने तकनीकी और डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण कर आरोपी तक पहुँचने में सफलता पाई। साइबर थाना उत्तर जिला में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है और आगे की जाँच जारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी उसने वही तरीका दोहराया — जो न्यायिक प्रक्रिया और पुनर्वास तंत्र की कमज़ोरी को उजागर करता है। NCRP पोर्टल पर शिकायत से लेकर गिरफ्तारी तक की यात्रा साइबर पुलिस की क्षमता बढ़ने का संकेत देती है, लेकिन असली सवाल यह है कि पीड़िताओं का परिवार बदनामी के डर से पैसे देता रहा — यह सामाजिक दबाव ही अपराधियों की असली ताकत है।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली में AI मॉर्फ्ड तस्वीर ब्लैकमेल मामले में किसे गिरफ्तार किया गया?
दिल्ली पुलिस ने 30 वर्षीय सौरव को गिरफ्तार किया, जो एक निजी फाइनेंस कंपनी में कार्यरत है। वह AI टूल्स से महिलाओं की मॉर्फ्ड तस्वीरें बनाकर उन्हें वायरल करने की धमकी देकर वसूली करता था।
आरोपी ने युवतियों को किस तरह फँसाया?
आरोपी सोशल मीडिया पर नौकरी दिलाने का झाँसा देकर युवतियों से रिज्यूमे माँगता और वीडियो वेरिफिकेशन कॉल के दौरान स्क्रीनशॉट लेकर AI टूल्स से आपत्तिजनक तस्वीरें तैयार करता था। इन तस्वीरों को वायरल करने की धमकी देकर वह पैसों की माँग करता था।
पीड़िता से कितनी रकम वसूली गई?
पुलिस के अनुसार, आरोपी ने पहले QR कोड के माध्यम से ₹30,000 और बाद में फरवरी 2026 में साइबर कैफे के ज़रिए ₹10,000 — कुल ₹40,000 वसूले। इसके बावजूद वह और पैसों की माँग करता रहा।
क्या आरोपी पहले भी किसी मामले में पकड़ा गया था?
हाँ, जाँच में सामने आया कि आरोपी को 2022 और 2023 में भी यौन उत्पीड़न, पीछा करने और जबरन वसूली से जुड़े मामलों में गिरफ्तार किया जा चुका है।
इस मामले में कौन-सी धाराएँ लगाई गई हैं और जाँच कहाँ तक पहुँची है?
साइबर थाना उत्तर जिला में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने मोबाइल फोन, सिम कार्ड और वाईफाई राउटर बरामद किए हैं और आगे की जाँच जारी है।
राष्ट्र प्रेस
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