10 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

गढ़चिरौली की 6 लौह अयस्क खदानें MSMC को दें केंद्र: CM फडणवीस का आग्रह, ₹3 लाख करोड़ निवेश का लक्ष्य

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
गढ़चिरौली की 6 लौह अयस्क खदानें MSMC को दें केंद्र: CM फडणवीस का आग्रह, ₹3 लाख करोड़ निवेश का लक्ष्य

सारांश

गढ़चिरौली, जो कभी नक्सल संघर्ष का केंद्र था, अब भारत के इस्पात निर्यात का इंजन बनने की राह पर है। CM फडणवीस ने ₹3 लाख करोड़ के निवेश और 2030 तक 5 करोड़ टन उत्पादन के दावे के साथ 6 खदानें MSMC को सौंपने की माँग की — यह महाराष्ट्र का सबसे बड़ा खनन दांव है।

मुख्य बातें

CM देवेंद्र फडणवीस ने 18 जून 2026 को केंद्र से गढ़चिरौली की 6 लौह अयस्क खदानें MSMC को आवंटित करने का आग्रह किया।
खदानें मिलने पर 2 वर्षों में उत्पादन शुरू और 2030 तक 5 करोड़ टन लौह अयस्क उत्पादन का लक्ष्य।
इस पहल से ₹3 लाख करोड़ निवेश और लाखों रोज़गार सृजन की उम्मीद; टाटा व जेएसडब्ल्यू ने पहले ही MoU किए।
राज्य ने JNPA और वधावन पोर्ट से गढ़चिरौली को जोड़ने वाले एकीकृत रेल-फ्रेट नेटवर्क की योजना बनाई।
देशभर में 500 खदानों की नीलामी में से केवल 50 चालू; MSMC को सीधा आवंटन इसी समस्या का समाधान।
किशन रेड्डी ने कोयला गुणवत्ता विवाद सुलझाने के लिए स्वचालित नमूना परीक्षण प्रणाली लागू करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 18 जून 2026 को केंद्रीय कोयला और खान मंत्री जी. किशन रेड्डी के साथ एक उच्च-स्तरीय बैठक में महाराष्ट्र को 'ग्रीन स्टील हब' बनाने की दिशा में निर्णायक कदम उठाते हुए मांग की कि गढ़चिरौली जिले की छह प्रमुख लौह अयस्क खदानें महाराष्ट्र राज्य खनन निगम (MSMC) को आवंटित की जाएं। फडणवीस ने भरोसा जताया कि इन खदानों के आवंटन के बाद दो वर्षों के भीतर उत्पादन शुरू किया जा सकता है और 2030 तक बड़े पैमाने पर खनन संभव होगा।

गढ़चिरौली क्यों है रणनीतिक केंद्र

मुख्यमंत्री के अनुसार, गढ़चिरौली में देश के सर्वोत्तम गुणवत्ता वाले लौह अयस्क के भंडार मौजूद हैं। चूना पत्थर (लाइमस्टोन) के विशाल भंडार, इस्पात निर्माण के लिए आवश्यक अन्य खनिजों की उपलब्धता, निकटवर्ती कोयला खदानें, प्रचुर जल स्रोत और तेज़ी से विकसित हो रहा बुनियादी ढाँचा — ये सभी कारक इस क्षेत्र को एक एकीकृत औद्योगिक और इस्पात उत्पादन केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए अनुकूल बनाते हैं।

गौरतलब है कि नक्सलवाद में उल्लेखनीय कमी के बाद गढ़चिरौली में बड़े पैमाने पर उद्योग स्थापित करने के लिए शांतिपूर्ण और सुरक्षित वातावरण बना है। इसी बदले हुए माहौल का लाभ उठाते हुए टाटा और जेएसडब्ल्यू ग्रुप जैसे प्रमुख औद्योगिक समूहों ने राज्य सरकार के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं और इन उद्योगों के लिए भूमि आवंटन की प्रक्रिया तेज़ी से आगे बढ़ रही है।

₹3 लाख करोड़ निवेश और लाखों रोज़गार का दावा

फडणवीस ने कहा, "इस पहल से ₹3 लाख करोड़ का निवेश आने और लाखों नौकरियाँ पैदा होने की उम्मीद है।" उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि महाराष्ट्र का प्रस्तावित एकीकृत इस्पात पारिस्थितिकी तंत्र राज्य को चीन से भी कम लागत पर इस्पात उत्पादन में सक्षम बनाएगा। देश-विदेश की प्रमुख इस्पात कंपनियों ने इस क्षेत्र में गहरी रुचि दिखाई है और नई सुविधाओं के लिए हज़ारों एकड़ भूमि का अधिग्रहण पहले ही किया जा चुका है।

मुख्यमंत्री ने 2030 तक 5 करोड़ टन (50 मिलियन टन) लौह अयस्क उत्पादन का लक्ष्य भी रखा है। उन्होंने ओडिशा स्टेट माइनिंग कॉर्पोरेशन के बॉक्साइट क्षेत्र में अपनाए गए मॉडल का उदाहरण देते हुए लगभग 1,300 हेक्टेयर खनन क्षेत्र के लिए मंजूरी माँगी।

MSMC को सीधा आवंटन क्यों ज़रूरी

फडणवीस ने स्पष्ट किया कि देशभर में लगभग 500 खदानों की नीलामी हो चुकी है, किंतु अभी केवल 50 ही चालू हैं। सार्वजनिक नीलामी में अत्यधिक प्रीमियम के कारण ये परियोजनाएँ निजी संचालकों के लिए आर्थिक रूप से व्यवहार्य नहीं रह जातीं। इन छह विशेष ब्लॉकों को सरकारी निगम MSMC को सौंपने से इस्पात निर्माताओं को सीधे और पारदर्शी तरीके से खनिज आपूर्ति सुनिश्चित होगी। महाराष्ट्र में अभी 40 से अधिक खनिज ब्लॉक नीलामी के लिए तैयार हैं और 34 बड़े ब्लॉकों में से 14 के लिए प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

एकीकृत लॉजिस्टिक्स नेटवर्क की योजना

इस भावी स्टील हब को सुदृढ़ करने के लिए राज्य ने एक एकीकृत लॉजिस्टिक्स नेटवर्क तैयार किया है। गढ़चिरौली को जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी (JNPA) और प्रस्तावित वधावन पोर्ट से एक विशेष रेल और फ्रेट नेटवर्क के माध्यम से जोड़ने की योजना है। हिंदू हृदयसम्राट बालासाहेब ठाकरे महाराष्ट्र समृद्धि महामार्ग के साथ रेल बुनियादी ढाँचे के लिए भूमि पहले ही आरक्षित कर ली गई है।

केंद्र की प्रतिक्रिया और आगे की राह

केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने राज्य के प्रस्तावों पर सकारात्मक प्रतिक्रिया व्यक्त की। बैठक में उन्होंने कोयले की गुणवत्ता को लेकर राज्य की बिजली उत्पादन कंपनियों को होने वाले आर्थिक नुकसान और दीर्घकालिक गुणवत्ता विवादों को समाप्त करने के लिए स्वचालित नमूना परीक्षण प्रणाली (Automated Sample Testing System) लागू करने के तत्काल निर्देश दिए। यह बैठक राज्य के खनन, कोयला और ऊर्जा क्षेत्र में तकनीकी एवं परिचालन बाधाओं को दूर करने पर विस्तृत चर्चा के साथ संपन्न हुई। मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि राज्य सरकार वेस्टर्न कोलफील्ड्स और कोल इंडिया की ज़रूरतों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेगी। यदि केंद्र इन खदानों का आवंटन करता है, तो गढ़चिरौली भारत के इस्पात निर्यात मानचित्र पर एक निर्णायक स्थान ले सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन ₹3 लाख करोड़ के निवेश का दावा तब तक केवल आकांक्षा है जब तक MSMC को खदानें वास्तव में आवंटित नहीं होतीं — और केंद्र की स्वीकृति अभी तक सार्वजनिक नहीं है। देश में 500 में से केवल 50 नीलाम खदानें चालू होने का तथ्य बताता है कि खनन नीति में संरचनात्मक खामियाँ हैं जिन्हें MSMC मॉडल से पाटने की कोशिश है — यह तर्क ठोस है। परंतु 2030 का उत्पादन लक्ष्य और चीन से सस्ते इस्पात का दावा बिना स्वतंत्र लागत-विश्लेषण के सत्यापित नहीं किया जा सकता। असली परीक्षा यह होगी कि केंद्र सरकार इस 'ओडिशा मॉडल' को महाराष्ट्र में दोहराने की अनुमति देती है या नहीं।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

CM फडणवीस ने केंद्र से गढ़चिरौली की खदानों के लिए क्या माँग की है?
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने केंद्रीय कोयला और खान मंत्रालय से आग्रह किया है कि गढ़चिरौली जिले की 6 प्रमुख लौह अयस्क खदानें महाराष्ट्र राज्य खनन निगम (MSMC) को सीधे आवंटित की जाएं। उन्होंने 18 जून 2026 को केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी के साथ बैठक में यह प्रस्ताव रखा।
गढ़चिरौली को स्टील हब बनाने से कितना निवेश और रोज़गार आएगा?
मुख्यमंत्री फडणवीस के अनुसार, इस पहल से ₹3 लाख करोड़ का निवेश और लाखों रोज़गार सृजन की उम्मीद है। टाटा और जेएसडब्ल्यू ग्रुप पहले ही राज्य सरकार के साथ MoU कर चुके हैं।
MSMC को सीधा आवंटन क्यों माँगा जा रहा है, नीलामी क्यों नहीं?
देशभर में नीलाम हुई लगभग 500 खदानों में से केवल 50 ही चालू हैं, क्योंकि अत्यधिक प्रीमियम के कारण ये निजी संचालकों के लिए आर्थिक रूप से व्यवहार्य नहीं रहतीं। MSMC को सीधा आवंटन इस्पात निर्माताओं को पारदर्शी और किफायती खनिज आपूर्ति सुनिश्चित करेगा।
2030 तक गढ़चिरौली से कितना लौह अयस्क उत्पादन का लक्ष्य है?
राज्य सरकार ने 2030 तक 5 करोड़ टन (50 मिलियन टन) लौह अयस्क उत्पादन का लक्ष्य रखा है। खदानें आवंटित होने के बाद 2 वर्षों के भीतर उत्पादन शुरू करने की योजना है।
गढ़चिरौली को बंदरगाहों से कैसे जोड़ा जाएगा?
राज्य ने गढ़चिरौली को जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी (JNPA) और प्रस्तावित वधावन पोर्ट से एक विशेष रेल और फ्रेट नेटवर्क के ज़रिए जोड़ने की योजना बनाई है। समृद्धि महामार्ग के साथ रेल बुनियादी ढाँचे के लिए भूमि पहले ही आरक्षित कर ली गई है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 महीने पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 4 महीने पहले
  7. 5 महीने पहले
  8. 1 साल पहले