21 अगस्त 2026
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महाराष्ट्र में एआई और डिजिटल ट्विन लर्निंग से खेती क्रांति: 10,000 किसानों पर पायलट, गन्ने की पैदावार 17.66 टन बढ़ी

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महाराष्ट्र में एआई और डिजिटल ट्विन लर्निंग से खेती क्रांति: 10,000 किसानों पर पायलट, गन्ने की पैदावार 17.66 टन बढ़ी

सारांश

महाराष्ट्र में खेती अब सैटेलाइट, ड्रोन और एआई के भरोसे — मुख्यमंत्री फडणवीस ने 10,000 किसानों पर पायलट को हरी झंडी दी। गन्ने की पैदावार में 17.66 टन प्रति एकड़ की बढ़त और 42% पानी की बचत के नतीजे बताते हैं कि यह प्रयोग महाराष्ट्र की कृषि तस्वीर बदल सकता है।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 21 अगस्त को कृषि विभाग को एआई और डिजिटल ट्विन लर्निंग पायलट लागू करने का निर्देश दिया।
शुरुआती चरण में 10,000 किसानों को ट्रायल के लिए चुना जाएगा; फोकस फसलें — कपास, सोयाबीन, गन्ना, प्याज सहित 8 फसलें।
गन्ने की पैदावार 65.45 टन से बढ़कर 73.12 टन प्रति एकड़ हुई — औसतन 17.66 टन की वृद्धि।
एआई-आधारित सिंचाई से 42% पानी की बचत; प्रतिदिन प्रति हेक्टेयर 90,000 लीटर जल संरक्षित।
परियोजना बारामती एग्रीकल्चरल डेवलपमेंट ट्रस्ट द्वारा विकसित; राज्यव्यापी विस्तार से पहले क्षेत्र-वार मूल्यांकन होगा।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शुक्रवार, 21 अगस्त को कृषि विभाग को राज्यभर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और 'डिजिटल ट्विन लर्निंग' पर आधारित एक पायलट प्रोजेक्ट लागू करने का निर्देश दिया। इस पहल का उद्देश्य सैटेलाइट तकनीक, ड्रोन, आईओटी सेंसर और डेटा एनालिटिक्स के माध्यम से फसल उत्पादकता बढ़ाना और किसानों की आय में सुधार करना है। शुरुआती चरण में 10,000 किसानों को इस ट्रायल के लिए चुना जाएगा।

क्या है यह पहल और कहाँ से आई

बारामती स्थित एग्रीकल्चरल डेवलपमेंट ट्रस्ट ने यह परियोजना जलवायु परिवर्तन, पानी की कमी, मिट्टी की घटती उर्वरता और बढ़ती उत्पादन लागत जैसी गंभीर कृषि चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार की है। मुंबई में आयोजित एक प्रेजेंटेशन के दौरान मुख्यमंत्री फडणवीस ने इस प्रोजेक्ट की समीक्षा कर इसे राज्यस्तर पर विस्तार देने का निर्णय लिया।

यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र के किसान लगातार अनिश्चित मानसून और बाज़ार की अस्थिरता से जूझ रहे हैं। गौरतलब है कि राज्य में कृषि संकट और किसान आत्महत्याओं की समस्या वर्षों से नीति-निर्माताओं के लिए एक बड़ी चुनौती रही है।

किन फसलों पर होगा फोकस

पायलट प्रोजेक्ट के पहले चरण में कपास, सोयाबीन, अरहर (तुअर), गन्ना, संतरा, हल्दी, प्याज और मक्का — यानी महाराष्ट्र की प्रमुख व्यावसायिक फसलों — पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने फसल वृद्धि, सिंचाई आवश्यकता, मिट्टी की नमी, मौसम की स्थिति और कीट प्रकोप से संबंधित डेटा को एकत्र कर एक यूनिफाइड डिजिटल सिस्टम बनाने पर विशेष जोर दिया।

पायलट ट्रायल के नतीजे

एग्रीकल्चरल डेवलपमेंट ट्रस्ट के सीईओ नीलेश नलावडे ने बैठक में प्रारंभिक ट्रायल के परिणाम प्रस्तुत किए। गन्ने की खेती पर किए गए शुरुआती परीक्षण में उत्साहजनक आँकड़े सामने आए।

उनके अनुसार, गन्ने का औसत उत्पादन 65.45 टन प्रति एकड़ से बढ़कर 73.12 टन प्रति एकड़ हो गया — यानी प्रति एकड़ औसतन 17.66 टन की वृद्धि दर्ज की गई। नलावडे ने बताया, "एआई-आधारित सिंचाई प्रबंधन से औसतन 42 प्रतिशत पानी की बचत हुई, जिससे प्रतिदिन प्रति हेक्टेयर लगभग 90,000 लीटर पानी संरक्षित किया जा सका। ड्रोन से ली गई तस्वीरों के एआई-विश्लेषण से फसल रोगों की समय रहते पहचान होती है और सिंचाई व छिड़काव की जरूरी सलाह सीधे किसानों के मोबाइल पर भेजी जाती है।"

सरकार और उद्योग की प्रतिक्रिया

राज्य के कृषि मंत्री दत्तात्रेय भरणे ने कहा कि एआई-आधारित खेती राज्य सरकार की प्राथमिकता सूची में शामिल है और उन्हें विश्वास है कि यह परियोजना महाराष्ट्र के कृषि क्षेत्र में आमूलचूल परिवर्तन लाएगी। सकल मीडिया ग्रुप के चेयरमैन प्रताप पवार ने राज्य सरकार के समर्थन की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह की प्रभावी विकास पहलों को व्यापक पैमाने पर लागू करने के लिए सरकारी सहयोग अनिवार्य है।

आगे क्या होगा

सरकारी बयान के अनुसार, 10,000 से अधिक किसानों पर किए गए शुरुआती ट्रायल के सकारात्मक परिणामों को देखते हुए राज्य सरकार इस मॉडल को पूरे महाराष्ट्र में लागू करने से पहले क्षेत्र और फसल के अनुसार इसके प्रदर्शन का मूल्यांकन करने की योजना बना रही है। मुख्यमंत्री फडणवीस ने मशीन लर्निंग के जरिए डेटा विश्लेषण को किसानों की व्यक्तिगत फसल-सलाह से जोड़ने पर बल दिया, जिससे इनपुट लागत घटेगी और कुल कृषि आय बढ़ेगी। यह परियोजना महाराष्ट्र में डिजिटल कृषि के एक नए युग की शुरुआत का संकेत देती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा तब होगी जब इसे विदर्भ और मराठवाड़ा के सूखाग्रस्त इलाकों के छोटे और सीमांत किसानों तक पहुँचाया जाएगा — जहाँ स्मार्टफोन पहुँच और डिजिटल साक्षरता अभी भी सीमित है। गन्ने पर किए गए ट्रायल के नतीजे उत्साहजनक हैं, पर गन्ना एक सिंचित और संगठित फसल है; कपास और सोयाबीन जैसी वर्षा-आधारित फसलों पर यही तकनीक कितनी कारगर होगी, यह अभी अनुत्तरित है। राज्य में कृषि तकनीक की पिछली कई पहलें पायलट चरण से आगे नहीं बढ़ पाईं। इस बार सफलता के लिए जरूरी है कि तकनीकी ढाँचे के साथ-साथ किसानों की क्षमता-निर्माण और स्थानीय भाषा में सलाह-प्रणाली को भी उतनी ही प्राथमिकता मिले।
RashtraPress
21 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाराष्ट्र का एआई और डिजिटल ट्विन लर्निंग कृषि प्रोजेक्ट क्या है?
यह महाराष्ट्र सरकार की एक पायलट परियोजना है जिसमें सैटेलाइट, ड्रोन, आईओटी सेंसर और मशीन लर्निंग के ज़रिए किसानों को फसल-विशेष सलाह दी जाएगी। इसका लक्ष्य उत्पादकता बढ़ाना, इनपुट लागत घटाना और जल संरक्षण करना है।
इस पायलट में कितने किसान शामिल होंगे और कौन-सी फसलें शामिल हैं?
शुरुआती चरण में 10,000 किसानों को ट्रायल के लिए चुना जाएगा। इसमें कपास, सोयाबीन, अरहर (तुअर), गन्ना, संतरा, हल्दी, प्याज और मक्का जैसी प्रमुख फसलें शामिल हैं।
पायलट ट्रायल में गन्ने की खेती पर क्या नतीजे मिले?
बारामती एग्रीकल्चरल डेवलपमेंट ट्रस्ट के अनुसार, गन्ने का औसत उत्पादन 65.45 टन से बढ़कर 73.12 टन प्रति एकड़ हो गया — यानी 17.66 टन प्रति एकड़ की वृद्धि। इसके अलावा एआई सिंचाई प्रबंधन से 42% पानी की बचत हुई।
यह परियोजना किसने विकसित की और राज्यव्यापी विस्तार कब होगा?
यह परियोजना बारामती स्थित एग्रीकल्चरल डेवलपमेंट ट्रस्ट ने विकसित की है। राज्यव्यापी विस्तार से पहले सरकार क्षेत्र और फसल के अनुसार प्रदर्शन का मूल्यांकन करेगी; अभी कोई निश्चित तिथि घोषित नहीं हुई है।
एआई-आधारित खेती से किसानों को व्यावहारिक रूप से क्या फायदा होगा?
मशीन लर्निंग द्वारा विश्लेषित डेटा के आधार पर किसानों को सिंचाई, कीट नियंत्रण और छिड़काव की व्यक्तिगत सलाह सीधे उनके मोबाइल पर मिलेगी। इससे इनपुट लागत कम होगी, पानी की बचत होगी और कुल कृषि आय बढ़ेगी।
राष्ट्र प्रेस
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