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महाराष्ट्र CM फडणवीस ने 'महाखनिज 2.0' लॉन्च किया, अगले 5 साल में ₹25,000 करोड़ राजस्व का लक्ष्य

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महाराष्ट्र CM फडणवीस ने 'महाखनिज 2.0' लॉन्च किया, अगले 5 साल में ₹25,000 करोड़ राजस्व का लक्ष्य

सारांश

महाराष्ट्र ने खनिज चोरी पर डिजिटल वार किया है — 'महाखनिज 2.0' में GPS ट्रैकिंग, AI, ड्रोन सर्वे और स्वचालित जुर्माना प्रणाली शामिल है। पिछले संस्करण के ₹16,000 करोड़ के मुकाबले अब ₹25,000 करोड़ का लक्ष्य है। यह राज्य के खनन प्रशासन का सबसे बड़ा डिजिटल बदलाव है।

मुख्य बातें

महाराष्ट्र CM देवेंद्र फडणवीस ने 15 सितंबर 2026 को कैबिनेट बैठक में 'महाखनिज 2.0' पोर्टल लॉन्च किया।
अगले 5 वर्षों में ₹25,000 करोड़ खनिज राजस्व का लक्ष्य; पिछले संस्करण ने 5 साल में ₹16,000 करोड़ जुटाए थे।
GPS, ANPR, GIS, जियोफेंसिंग और AI-वीडियो एनालिटिक्स से वाहनों और खदानों की रियल-टाइम निगरानी।
कोंकण भवन से राज्य-स्तरीय 24×7 मॉनिटरिंग सेंटर ; कोंकण डिवीजन कमिश्नर 'स्टेट कोऑर्डिनेटर' नियुक्त।
पेपर परमिट पूरी तरह समाप्त; QR कोड व बारकोड आधारित डिजिटल परमिट प्रणाली लागू होगी।
शिकायत निवारण के लिए 24×7 कॉल सेंटर (08065070555) और Android-iOS मोबाइल एप्लिकेशन लॉन्च।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 15 सितंबर 2026 को मुंबई में कैबिनेट बैठक के दौरान खनिज प्रशासन के लिए अत्याधुनिक डिजिटल पोर्टल 'महाखनिज 2.0' लॉन्च किया, जिसका उद्देश्य राज्य में छोटे खनिजों की चोरी और राजस्व रिसाव को रोकना है। रेवेन्यू विभाग द्वारा विकसित यह पोर्टल खनिजों की खुदाई, परिवहन, परमिट और निगरानी में पूरी पारदर्शिता एवं रियल-टाइम ट्रैकिंग सुनिश्चित करेगा। इस पोर्टल के माध्यम से अगले पाँच वर्षों में राज्य के खजाने के लिए ₹25,000 करोड़ का राजस्व जुटाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है।

महाखनिज 2.0 क्यों लाया गया

छोटे खनिजों का पारंपरिक प्रशासन काफी हद तक मैनुअल प्रक्रियाओं और कागजी कार्रवाई पर निर्भर था, जिससे निगरानी में बड़ी खामियाँ पैदा होती थीं। इन्हीं कमियों को दूर करने के लिए राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने डिजिटल बदलाव की पहल की। गौरतलब है कि 'महाखनिज' के पिछले संस्करण ने पिछले पाँच वर्षों में राज्य के खजाने में लगभग ₹16,000 करोड़ जुटाए थे — और अब नया संस्करण उस आँकड़े को लगभग 56% बढ़ाने की योजना रखता है।

पोर्टल की मुख्य तकनीकी विशेषताएँ

पेपर ट्रांसपोर्ट परमिट पूरी तरह समाप्त किए जाएँगे और उनकी जगह QR कोड व बारकोड (DigiT) आधारित पूरी तरह डिजिटल परमिट प्रणाली लागू होगी। खनिज ढोने वाले वाहनों की GPS, ANPR (ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन), GIS और जियोफेंसिंग के ज़रिये लाइव निगरानी की जाएगी — यदि कोई वाहन तय रास्ते से भटकता है तो तत्काल स्वचालित अलर्ट मिलेगा। सरकारी बयान के अनुसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और वीडियो एनालिटिक्स प्रशासनिक निर्णयों को तेज और सटीक बनाएँगे।

केंद्रीकृत निगरानी और नई नियुक्तियाँ

पूरे राज्य में खनन परमिट, वाहनों की आवाजाही और खदान गतिविधियों पर नज़र रखने के लिए कोंकण भवन से एक राज्य-स्तरीय 24×7 मॉनिटरिंग सेंटर संचालित होगा। कोंकण डिवीजन कमिश्नर को इस पहल के लिए 'स्टेट कोऑर्डिनेटर' नियुक्त किया गया है। इसके अतिरिक्त प्रत्येक जिला कलेक्ट्रेट में एक समर्पित डिस्ट्रिक्ट एग्जीक्यूटिव तैनात किया जाएगा।

ड्रोन, लिडार, बाथिमेट्रिक सर्वे और रिमोट सेंसिंग जैसी उन्नत सर्वेइंग तकनीकों से खनन स्थलों का सटीक मानचित्रण होगा, जिससे अवैध खुदाई और अनधिकृत परिवहन पर लगाम लगेगी। नियमों का उल्लंघन होने पर सिस्टम स्वचालित रूप से जुर्माना तय करेगा, और डिजिटाइज्ड पंचनामा, नोटिस व जुर्माना वसूली से मानवीय हस्तक्षेप न्यूनतम होगा।

एकीकरण और जन-सुविधाएँ

'महाखनिज 2.0' को वाहन, महाभूलेख, लैंड रिकॉर्ड्स, DigiLocker, BPMS, CCTV नेटवर्क और ऑटोमैटिक वे-ब्रिज जैसे प्रमुख सरकारी प्लेटफॉर्म से सीधे जोड़ा गया है। जनता और कारोबारियों की शिकायतों के समाधान के लिए एक समर्पित शिकायत-निवारण प्रणाली और 24×7 कॉल सेंटर (08065070555) स्थापित किया गया है। मंत्री बावनकुले ने बताया कि फील्ड अधिकारियों व कर्मचारियों के लिए विशेष रूप से तैयार किए गए Android और iOS एप्लिकेशन भी लॉन्च किए गए हैं, जो महाराष्ट्र के व्यापक डिजिटल प्रशासन सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

यह ऐसे समय में आया है जब कई राज्य सरकारें खनन क्षेत्र में पारदर्शिता और राजस्व संरक्षण के लिए प्रौद्योगिकी का सहारा ले रही हैं। महाराष्ट्र का यह प्रयोग आने वाले समय में अन्य राज्यों के लिए एक मॉडल बन सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा ज़मीनी क्रियान्वयन में है — राज्य के खनन-संवेदनशील ज़िलों में नेटवर्क कनेक्टिविटी, फील्ड स्टाफ प्रशिक्षण और राजनीतिक इच्छाशक्ति तीनों एक साथ चाहिए। पिछला संस्करण 5 साल में ₹16,000 करोड़ जुटा सका, यानी नया लक्ष्य करीब 56% की छलांग माँगता है — यह तभी संभव है जब AI-ट्रिगर्ड अलर्ट सिस्टम को स्थानीय स्तर पर दबाव-मुक्त तरीके से संचालित किया जाए। स्वचालित जुर्माना और डिजिटल पंचनामा जैसी व्यवस्थाएँ मानवीय हस्तक्षेप घटाने के दावे करती हैं, पर यह भी देखना होगा कि क्या ये प्रणालियाँ छोटे और मझोले परिवहनकर्ताओं पर अनुचित भार तो नहीं डालतीं।
RashtraPress
16 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाखनिज 2.0 पोर्टल क्या है?
'महाखनिज 2.0' महाराष्ट्र सरकार के रेवेन्यू विभाग द्वारा विकसित एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसे 15 सितंबर 2026 को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने लॉन्च किया। यह पोर्टल राज्य में छोटे खनिजों की खुदाई, परिवहन, परमिट और निगरानी को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाने के लिए बनाया गया है।
महाखनिज 2.0 से महाराष्ट्र सरकार को कितना राजस्व मिलने की उम्मीद है?
पोर्टल के ज़रिये अगले पाँच वर्षों में ₹25,000 करोड़ राजस्व जुटाने का लक्ष्य रखा गया है। तुलना के लिए, महाखनिज के पिछले संस्करण ने पिछले पाँच वर्षों में लगभग ₹16,000 करोड़ एकत्र किए थे।
महाखनिज 2.0 में खनिज चोरी रोकने के लिए क्या तकनीक इस्तेमाल होगी?
इसमें GPS, ANPR (ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन), GIS और जियोफेंसिंग से वाहनों की लाइव ट्रैकिंग होगी। ड्रोन, लिडार और रिमोट सेंसिंग से खदानों का सर्वे होगा, और AI-वीडियो एनालिटिक्स से उल्लंघन पर स्वचालित जुर्माना लगाया जाएगा।
महाखनिज 2.0 की निगरानी कहाँ से होगी और इसका प्रभारी कौन है?
कोंकण भवन, मुंबई से एक राज्य-स्तरीय 24×7 मॉनिटरिंग सेंटर स्थापित किया जाएगा। कोंकण डिवीजन कमिश्नर को इस पहल के लिए 'स्टेट कोऑर्डिनेटर' नियुक्त किया गया है, और प्रत्येक जिला कलेक्ट्रेट में एक समर्पित डिस्ट्रिक्ट एग्जीक्यूटिव भी तैनात किया जाएगा।
नागरिक और व्यापारी महाखनिज 2.0 से जुड़ी शिकायत कैसे दर्ज कर सकते हैं?
शिकायत निवारण के लिए एक समर्पित प्रणाली और 24×7 कॉल सेंटर (08065070555) बनाया गया है। इसके अलावा फील्ड अधिकारियों के लिए Android और iOS एप्लिकेशन भी लॉन्च किए गए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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