11 अक्टूबर 2026
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फर्जी सीआईएसएफ अधिकारी गिरफ्तार: एयरपोर्ट जॉब और सस्ते आईफोन का झांसा देकर ठगी

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फर्जी सीआईएसएफ अधिकारी गिरफ्तार: एयरपोर्ट जॉब और सस्ते आईफोन का झांसा देकर ठगी

सारांश

अहमदाबाद में फर्जी सीआईएसएफ डीएसपी बनकर घूमता पंजाब का ठग गिरफ्तार — एयरपोर्ट जॉब और दुबई से सस्ते आईफोन का झाँसा, बेनामी खातों से लेन-देन, और जम्मू-कश्मीर में पुराना आपराधिक रिकॉर्ड। जाँच में बड़े नेटवर्क की आशंका।

मुख्य बातें

अहमदाबाद अपराध शाखा ने 10 अक्टूबर 2026 को पंजाब के मलेरकोटला निवासी आज़मा ए सिकंदर मोहम्मद अख्तर कंबोज को गिरफ्तार किया।
आरोपी कथित तौर पर फर्जी सीआईएसएफ डीएसपी बनकर एयरपोर्ट जॉब, सस्ते आईफोन और कैंटीन सामान का लालच देकर ठगी करता था।
उसके पास से जाली पहचान पत्र , पैन कार्ड, आधार कार्ड, ₹1,120 नकद और ₹10,000 मूल्य का मोबाइल फोन ज़ब्त।
आरोपी जम्मू-कश्मीर के माजगांव पुलिस स्टेशन में धारा 420, 380, 201 IPC के तहत केस संख्या 08/2022 में पहले से वांछित था।
ठगी की रकम ट्रैवल एजेंसी, पेट्रोल पंप और अन्य व्यक्तियों के बैंक खातों में ट्रांसफर कराई गई — जाँच जारी।

अहमदाबाद शहर अपराध शाखा ने 10 अक्टूबर 2026 को पंजाब के मलेरकोटला निवासी एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया, जो कथित तौर पर केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) में पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) के रूप में खुद को पेश करके लोगों से ठगी कर रहा था। आरोपी पर एयरपोर्ट पर नौकरी दिलाने, सस्ते आईफोन और सेना की कैंटीन से रियायती सामान उपलब्ध कराने का लालच देकर भोले-भाले लोगों से धन वसूलने का आरोप है। यह मामला गुजरात में सरकारी पहचान की आड़ में की जाने वाली संगठित धोखाधड़ी का एक गंभीर उदाहरण है।

आरोपी की पहचान और गिरफ्तारी

आरोपी की पहचान आज़मा ए सिकंदर मोहम्मद अख्तर कंबोज के रूप में हुई है, जो पंजाब के मलेरकोटला शहर के जमालपुरा इलाके का निवासी है। उसे अहमदाबाद के सरदार बाग के पीछे पालिका बाज़ार के प्रवेश द्वार के निकट से पकड़ा गया। गिरफ्तारी के समय वह पुलिस बल की टी-शर्ट पहने हुआ था और खुद को सीआईएसएफ का वरिष्ठ अधिकारी बता रहा था।

अपराध शाखा के अनुसार, उसके पास से एक जाली पहचान पत्र बरामद हुआ, जिसमें उसे 'भारत सरकार के सीआईएसएफ विभाग में डीएसपी' के रूप में दर्शाया गया था। पुलिस ने उसके कब्जे से फर्जी पहचान पत्र, पैन कार्ड, आधार कार्ड (विवरण गोपनीय रखा गया है), ₹1,120 नकद और ₹10,000 मूल्य का एक मोबाइल फोन ज़ब्त किया है। जब्त सामग्री का कुल मूल्य ₹11,120 बताया गया है।

ठगी का तरीका

पूछताछ के दौरान आरोपी ने कथित तौर पर स्वीकार किया कि उसने अपनी फर्जी सीआईएसएफ पहचान का उपयोग कर लोगों को कई तरह के प्रलोभन दिए। इनमें हवाई अड्डे पर नौकरी दिलाने, दुबई से सस्ते आईफोन उपलब्ध कराने, कश्मीर से कम दाम पर अखरोट और केरोसिन तथा सेना की कैंटीन से रियायती सामान देने के वादे शामिल थे।

आरोपी ने कथित तौर पर माना कि वह कुछ पीड़ितों को वादा किया गया सामान देने में विफल रहा और वसूली गई राशि उसने अपने निजी खर्चों में खर्च कर दी। भुगतान नकद और ऑनलाइन बैंक ट्रांसफर दोनों माध्यमों से लिया गया।

वित्तीय लेन-देन और अन्य की संलिप्तता

जाँचकर्ताओं ने पाया कि धन प्राप्त करने के लिए अन्य व्यक्तियों, एक ट्रैवल एजेंसी और एक पेट्रोल पंप के बैंक खातों का कथित तौर पर उपयोग किया गया था। इन खातों, संबंधित लेन-देन और अन्य संभावित संलिप्त व्यक्तियों की जाँच जारी है। यह गौरतलब है कि इस तरह के 'बेनामी खाते' नेटवर्क ठगी के बड़े ढाँचे की ओर संकेत करते हैं।

पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड

अपराध शाखा को पता चला कि आरोपी पहले से ही जम्मू और कश्मीर के माजगांव पुलिस स्टेशन में भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 380 और 201 के तहत दर्ज धोखाधड़ी और चोरी के एक मामले (केस संख्या 08/2022) में वांछित था। अहमदाबाद में उसके विरुद्ध करंज पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 की धारा 204 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

आगे की जाँच

पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि कथित तौर पर ठगे गए पीड़ितों की कुल संख्या कितनी है, वित्तीय लेन-देन का पूरा ब्यौरा क्या है, और क्या अन्य राज्यों में भी आरोपी के खिलाफ शिकायतें या मामले दर्ज हैं। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि आरोपों और शिकायतों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि की जा रही है। इस प्रकरण से यह स्पष्ट होता है कि सरकारी वर्दी और फर्जी पहचान पत्र की आड़ में होने वाली ठगी के खिलाफ नागरिकों को अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक सुनियोजित ढाँचा था। गौर करने वाली बात यह है कि आरोपी पहले से जम्मू-कश्मीर में वांछित था — फिर भी वह राज्य की सीमाएँ पार कर गुजरात में सक्रिय रहा, जो अंतर-राज्यीय आपराधिक निगरानी प्रणाली की कमज़ोरी को दर्शाता है। असली सवाल यह है कि कितने और पीड़ित हैं जो शर्म या जागरूकता के अभाव में सामने नहीं आए।
RashtraPress
11 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अहमदाबाद में फर्जी सीआईएसएफ अधिकारी को किस आरोप में गिरफ्तार किया गया?
आरोपी आज़मा ए सिकंदर मोहम्मद अख्तर कंबोज को केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) में डीएसपी बनकर लोगों से धोखाधड़ी करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। उस पर एयरपोर्ट जॉब, दुबई से सस्ते आईफोन और सेना कैंटीन से रियायती सामान दिलाने का झाँसा देकर नकद व ऑनलाइन माध्यम से पैसे वसूलने का आरोप है।
आरोपी ने ठगी के लिए किस तरह का झाँसा दिया?
आरोपी ने फर्जी सीआईएसएफ पहचान पत्र दिखाकर खुद को हवाई अड्डे पर तैनात अधिकारी बताया और लोगों को एयरपोर्ट पर नौकरी, दुबई से सस्ते आईफोन, कश्मीर से अखरोट-केरोसिन और सेना कैंटीन का रियायती सामान दिलाने का वादा किया। जब वह वादा पूरा नहीं कर सका तो उसने वसूली गई राशि अपने निजी खर्च में लगा दी।
क्या आरोपी का पहले भी कोई आपराधिक रिकॉर्ड था?
हाँ, आरोपी जम्मू और कश्मीर के माजगांव पुलिस स्टेशन में भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 380 और 201 के तहत दर्ज धोखाधड़ी व चोरी के मामले (केस संख्या 08/2022) में पहले से वांछित था। यह मामला माजगांव न्यायालय में विचाराधीन है।
इस मामले में और कौन-कौन संलिप्त हो सकते हैं?
जाँचकर्ताओं को पता चला है कि धन प्राप्त करने के लिए एक ट्रैवल एजेंसी, एक पेट्रोल पंप और अन्य व्यक्तियों के बैंक खातों का कथित तौर पर उपयोग किया गया। इन खातों और संबंधित लेन-देन की जाँच की जा रही है ताकि संभावित साझेदारों की पहचान हो सके।
इस मामले में क्या कानूनी कार्रवाई हुई है?
अहमदाबाद के करंज पुलिस स्टेशन में आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 की धारा 204 के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने फर्जी पहचान पत्र, पैन कार्ड, आधार कार्ड, ₹1,120 नकद और ₹10,000 मूल्य का मोबाइल फोन ज़ब्त किया है और आगे की जाँच जारी है।
राष्ट्र प्रेस
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