सीबीआई ने नकली पासपोर्ट मामले में उबैदुल्लाह को 4 साल की सजा और 20,000 रुपए का जुर्माना सुनाया

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सीबीआई ने नकली पासपोर्ट मामले में उबैदुल्लाह को 4 साल की सजा और 20,000 रुपए का जुर्माना सुनाया

सारांश

सीबीआई ने एक आरोपी को जालसाजी और नकली पासपोर्ट बनाने के आरोप में सजा दी है। कोर्ट ने उबैदुल्लाह को 4 साल की सश्रम कारावास और 20,000 रुपए जुर्माना लगाया। यह फैसला देश की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।

मुख्य बातें

सीबीआई की सख्त कार्रवाई: जालसाजी और धोखाधड़ी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की गई।
उबैदुल्लाह की सजा: 4 साल की सश्रम कारावास और 20,000 रुपए का जुर्माना।
अवधि: मामला 2018 में शुरू हुआ और 2020 में चार्जशीट दाखिल हुई।
सुरक्षा चिंताएँ: ऐसे मामले देश की सुरक्षा को चुनौती देते हैं।
अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर निगरानी: चेन्नई जैसे हवाई अड्डों पर दस्तावेजों की जांच सख्त।

नई दिल्ली, 24 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने जालसाजी और नकली पासपोर्ट बनाने के एक गंभीर मामले में एक आरोपी को सजा दी है। चेन्नई के एग्मोर स्थित एडिशनल चीफ मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट कोर्ट ने सोमवार को आरोपी उबैदुल्लाह (जिसे एफ. हमीद और उबैतुल्लाह खान फैजल के नाम से भी जाना जाता है) को 4 साल की सश्रम कारावास और 20,000 रुपए का जुर्माना सुनाया। यह निर्णय जालसाजी, धोखाधड़ी और कई फर्जी पहचान से पासपोर्ट प्राप्त करने के आरोपों पर आधारित है।

सीबीआई ने यह मामला 31 दिसंबर 2018 को दर्ज किया था। जांच में यह उजागर हुआ कि आरोपी उबैदुल्लाह ने अपनी असली पहचान को छिपाते हुए, जाली दस्तावेजों का उपयोग करके विभिन्न नामों से कई पासपोर्ट बनवाए। इनमें फर्जी नाम जैसे उबैदुल्लाह खान और फैजल खान शामिल थे। उसने इन नकली पासपोर्टों का उपयोग विदेश यात्रा के लिए किया ताकि कस्टम विभाग को धोखा दिया जा सके। विशेष रूप से, सिंगापुर जाने वाली फ्लाइट में चढ़ते समय चेन्नई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर कस्टम अधिकारियों ने उसे पकड़ा, उसके पास बिना किसी वैध अनुमति के लगभग 36.74 लाख रुपए मूल्य की विदेशी मुद्रा अवैध रूप से रखी हुई थी।

आरोपी ने पासपोर्ट अधिकारी को आवेदन देते समय जानबूझकर गलत जानकारी दी और आवश्यक विवरण छिपाए। उसने फर्जी दस्तावेज जैसे पहचान पत्र, पता प्रमाण आदि जमा किए, जिससे पासपोर्ट जारी हो गए। सीबीआई की जांच में यह साबित हुआ कि आरोपी ने लंबे समय से ऐसी धोखाधड़ी की, जिसका उद्देश्य अवैध गतिविधियों जैसे तस्करी या अन्य अपराधों को अंजाम देना था।

जांच पूरी होने के बाद सीबीआई ने 13 मार्च 2020 को आरोपी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। लंबे ट्रायल के बाद कोर्ट ने सभी सबूतों की जांच की और आरोपी को दोषी ठहराया। कोर्ट ने भारतीय दंड संहिता की धाराओं के तहत जालसाजी (फॉर्जरी), धोखाधड़ी और पासपोर्ट एक्ट के उल्लंघन के लिए सजा सुनाई। जुर्माना न चुकाने पर अतिरिक्त सजा का भी प्रावधान किया गया है।

यह मामला पासपोर्ट जालसाजी और अवैध मुद्रा तस्करी के खिलाफ सीबीआई की कड़ी कार्रवाई का उदाहरण है। ऐसे मामले देश की सुरक्षा और इमिग्रेशन सिस्टम को चुनौती देते हैं। सीबीआई नियमित रूप से फर्जी दस्तावेजों से पासपोर्ट जारी करने वाले गिरोहों पर नकेल कस रही है, खासकर चेन्नई जैसे अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर जहां विदेशी मुद्रा और दस्तावेजों की जांच सख्त की जाती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यह मामला कब दर्ज किया गया था?
यह मामला 31 दिसंबर 2018 को सीबीआई द्वारा दर्ज किया गया था।
आरोपी को कितनी सजा मिली?
आरोपी उबैदुल्लाह को 4 साल की सश्रम कारावास और 20,000 रुपए का जुर्माना सुनाया गया।
उबैदुल्लाह ने कितने पासपोर्ट बनवाए?
उबैदुल्लाह ने विभिन्न नामों से कई नकली पासपोर्ट बनवाए।
सीबीआई ने कब चार्जशीट दाखिल की?
सीबीआई ने 13 मार्च 2020 को आरोपी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की।
क्या आरोपी के पास कोई अवैध चीजें थीं?
आरोपी के पास बिना किसी वैध अनुमति के लगभग 36.74 लाख रुपए मूल्य की विदेशी मुद्रा अवैध रूप से रखी हुई थी।
राष्ट्र प्रेस
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