फरसा वाले बाबा की असामयिक मृत्यु: देवकीनंदन महाराज का सनातन पर आरोप
सारांश
Key Takeaways
- फरसा वाले बाबा की मौत ने मथुरा में तनाव बढ़ा दिया है।
- कथावाचक देवकीनंदन महाराज ने इसे सनातन की हत्या कहा।
- परिवार ने गौ तस्करों के खिलाफ आरोप लगाए हैं।
- योगी सरकार से कार्रवाई की मांग की गई है।
- इस घटना ने गौ संरक्षण के मुद्दे को फिर से रेखांकित किया है।
मथुरा, 21 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। मथुरा के प्रसिद्ध गौरक्षक फरसा वाले बाबा उर्फ संत चंद्रशेखर की मृत्यु के बाद यहाँ तनाव का माहौल है। प्रशासन ने अलर्ट मोड में प्रवेश कर लिया है। परिवार और आस-पास के लोगों ने गंभीर आरोप लगाए हैं और प्रशासन से कठोर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। इस घटना से कथावाचक देवकीनंदन महाराज भी बेहद दुखी हैं।
कथावाचक देवकीनंदन महाराज ने फरसा वाले बाबा की मौत को सनातन की हत्या करार दिया। उन्होंने कहा, "पहले मथुरा जैसे तीर्थ स्थल पर गौ तस्करी और गौ हत्या जैसी शर्मनाक घटनाएं होती थीं, लेकिन अब तो एक गौ रक्षक की जान ले ली गई। यह घटना एक सोची समझी साजिश है या सामान्य घटना, इसके लिए पुलिस को तत्परता से कार्रवाई करनी चाहिए। निष्पक्ष जांच जरूरी है, ताकि कोई और गौरक्षक शिकार न बने।"
संत चंद्रशेखर के बड़े भाई केशव सिंह ने राष्ट्र प्रेस को बताया कि उनके छोटे भाई को गौ तस्करों ने लंबे समय से निशाना बना रखा था। उन्होंने कहा कि रात के समय मोजे पहनकर वे गायों को बचाने के लिए चार लड़कों के साथ निकले थे और जब वे वाहन की जांच कर रहे थे, तभी ट्रक ने पीछे से टक्कर मारी। पुलिस भी मामले को दबाने की कोशिश कर रही है।
केशव सिंह ने कहा कि योगी सरकार को इस मामले में गंभीरता से कार्रवाई करनी चाहिए और गौ तस्करी को रोकना चाहिए। उन्होंने बताया कि उनके छोटे भाई ने 40 साल से गो सेवा में अपना जीवन समर्पित किया था।
फरसा बाबा के साथ मौजूद गवाह केवल कृष्ण भारद्वाज ने राष्ट्र प्रेस को बताया कि बाबा ने रात एक बजे गौ तस्करी की सूचना फोन से दी थी और बताया कि वाहन में पशुधन हो सकता है। हम वहां पहुंच रहे थे, लेकिन 3 बजे के बाद हमें खबर मिली कि बाबा का एक्सीडेंट हो गया है। जब हम वहां पहुंचे, तो पता चला कि गौ तस्कर भाग चुके थे। इतनी जोरदार टक्कर मारी गई थी कि यह स्पष्ट था कि यह किसी प्रतिशोध का परिणाम था। प्रशासन सच छिपाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने प्रशासन से कड़ा विरोध किया है कि या तो हत्या करने वालों को दंड दिया जाए, नहीं तो वे प्रदर्शन करेंगे।