लखनऊ में फर्जी GST फर्म से ₹27.30 लाख की टैक्स चोरी, क्राइम ब्रांच ने 4 आरोपी दबोचे
सारांश
मुख्य बातें
लखनऊ क्राइम ब्रांच ने 23 अगस्त 2026 को एक संगठित GST धोखाधड़ी गिरोह का पर्दाफाश करते हुए 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया, जिन्होंने फर्जी दस्तावेजों के जरिये मेसर्स घनश्याम इंटरप्राइजेज नामक फर्म पंजीकृत कराकर इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का फर्जी दावा करते हुए सरकारी राजस्व को ₹27.30 लाख का नुकसान पहुँचाया। हसनगंज थाने की पुलिस के सहयोग से की गई इस कार्रवाई में 6 मोबाइल फोन भी बरामद किए गए हैं।
मुख्य घटनाक्रम
अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (क्राइम) किरन यादव ने बताया कि 30 अगस्त 2025 को प्राप्त एक प्रार्थना पत्र के आधार पर मेसर्स घनश्याम इंटरप्राइजेज की जाँच शुरू की गई थी। इस फर्म ने कच्चा सीसा अपशिष्ट, पेरिंग्स और प्लास्टिक स्क्रैप की खरीद-बिक्री के लिए GSTIN प्राप्त किया था। जाँच में फर्म के पंजीकरण और कारोबारी दस्तावेजों में गंभीर अनियमितताएँ सामने आईं।
धोखाधड़ी का तरीका
जाँच अधिकारियों के अनुसार, आरोपी फर्जी दस्तावेजों के आधार पर विभिन्न कंपनियों और फर्मों से संपर्क कर कागजी लेन-देन दर्शाते थे। इसके बाद फर्जी ITC को एक-दूसरे को पास-ऑन कर आर्थिक लाभ अर्जित किया जाता था। वास्तव में कोई वास्तविक कारोबार नहीं होता था — केवल कागजों पर लेन-देन दिखाकर GST कर का अपवंचन किया जा रहा था, जिससे सरकारी खजाने को ₹27.30 लाख की क्षति पहुँची।
गिरफ्तार आरोपी कौन हैं
पकड़े गए चारों आरोपी शिक्षित पृष्ठभूमि के हैं। वैभव सिंह (35) बीटेक पास हैं, मोहम्मद अरसान (32) एम. कॉम. डिग्रीधारी हैं, विकास कुमार मिश्रा (35) बीए एलएलबी हैं और मोहम्मद साकिब (28) ने बीए की पढ़ाई की है। यह तथ्य उल्लेखनीय है कि गिरोह में उच्च शिक्षित व्यक्तियों की संलिप्तता कर धोखाधड़ी के बढ़ते परिष्कृत स्वरूप को दर्शाती है।
सरकार की प्रतिक्रिया और आगे की जाँच
एडीसीपी किरन यादव के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों के विरुद्ध नियमानुसार विधिक कार्रवाई की जा रही है। इसके अलावा, फर्जी GST फर्म और फर्जी ITC नेटवर्क से जुड़े अन्य संभावित सहयोगियों एवं संबंधित फर्मों की भूमिका की भी जाँच जारी है। गौरतलब है कि इस प्रकार के संगठित GST धोखाधड़ी के मामले पूरे उत्तर प्रदेश में बढ़ते देखे जा रहे हैं, और लखनऊ क्राइम ब्रांच ऐसे नेटवर्क को ध्वस्त करने की मुहिम में सक्रिय है।
क्या होगा आगे
थाना हसनगंज में मुकदमा दर्ज हो चुका है। जाँच एजेंसियाँ उन अन्य फर्मों और कंपनियों की पहचान करने में जुटी हैं, जिनके साथ फर्जी ITC का लेन-देन दर्शाया गया था। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में GST पोर्टल पर रियल-टाइम सत्यापन प्रणाली को और सुदृढ़ करने की आवश्यकता है, ताकि कागजी फर्मों के जरिये राजस्व हानि को रोका जा सके।