जमशेदपुर: ₹100 करोड़ के फर्जी GST बिलिंग मामले में स्क्रैप कारोबारी गिरफ्तार, DGGI ने अंतरराज्यीय सिंडिकेट की जांच तेज की
सारांश
मुख्य बातें
डायरेक्टरेट जनरल ऑफ GST इंटेलिजेंस (DGGI) ने 16 जुलाई को जमशेदपुर के स्क्रैप कारोबारी अजय शर्मा को कथित तौर पर ₹100 करोड़ के फर्जी GST बिलिंग नेटवर्क में संलिप्तता के आरोप में गिरफ्तार किया। जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपी फर्जी कंपनियों के माध्यम से इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का अवैध लाभ उठाने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय सिंडिकेट से जुड़ा बताया जा रहा है।
छापेमारी और गिरफ्तारी का घटनाक्रम
DGGI के संयुक्त निदेशक अभिनव कुमार के नेतृत्व में एजेंसी की टीम ने जमशेदपुर के बारीडीह इलाके में आरोपी के ठिकानों पर छापेमारी की। तलाशी के दौरान मोबाइल फोन, लैपटॉप और अनेक डिजिटल दस्तावेज जब्त किए गए। विस्तृत पूछताछ के बाद अजय शर्मा को बुधवार देर शाम गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
फर्जी फर्मों का कथित जाल
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि अजय शर्मा पर आरोप है कि वह 'गणेश ट्रेडिंग' और 'कांतिक ट्रेडिंग' सहित कई फर्जी फर्मों के नाम पर केवल कागजी लेन-देन दर्शाकर ITC का अवैध फायदा उठा रहा था। एजेंसी के अनुसार, इस कथित नेटवर्क के जरिए लगभग ₹100 करोड़ की फर्जी बिलिंग की गई। गौरतलब है कि जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि आरोपी के संबंध उन कारोबारियों से हो सकते हैं जो पहले से कथित GST फर्जीवाड़े के मामलों में न्यायिक हिरासत में हैं, हालांकि DGGI ने इस बारे में अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
सरकारी खजाने को नुकसान की जांच
एजेंसी अब यह निर्धारित करने में जुटी है कि इस कथित फर्जीवाड़े से सरकारी राजस्व को वास्तविक रूप से कितना नुकसान पहुँचा और इसमें किन-किन कंपनियों एवं कारोबारियों की भूमिका रही। जब्त किए गए डिजिटल डेटा और वित्तीय दस्तावेजों की फोरेंसिक जांच चल रही है। अधिकारियों के अनुसार, जांच आगे बढ़ने पर इस नेटवर्क से जुड़े अन्य संदिग्धों की पहचान भी हो सकती है।
झारखंड में व्यापक अभियान का हिस्सा
यह कार्रवाई उस व्यापक अभियान का हिस्सा है जिसके तहत DGGI पिछले कई महीनों से झारखंड और अन्य राज्यों में फैले कथित फर्जी बिलिंग नेटवर्क की जांच कर रही है। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार GST चोरी पर नकेल कसने के लिए देशभर में प्रवर्तन कार्रवाइयाँ तेज कर रही है। एजेंसी के अनुसार, वित्तीय लेन-देन, फर्जी कंपनियों और कथित लाभार्थियों की कड़ियों को खंगाला जा रहा है और जांच जारी है।