FATF दौरे से पहले पाकिस्तान के 19 आतंकियों को 'भगोड़ा' बताने का नाटक: पूर्व DGP एसपी वैद
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर के पूर्व पुलिस महानिदेशक (DGP) एसपी वैद ने 14 सितंबर 2026 को आरोप लगाया कि पाकिस्तानी सेना और खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) FATF (फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स) की टीम के आगामी दौरे से पहले 19 आतंकियों को 'भगोड़ा' घोषित कर दुनिया को गुमराह करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने दावा किया कि भारतीय खुफिया जानकारी के अनुसार ये सभी आतंकी अभी भी पाकिस्तान की सीमा के भीतर मौजूद हैं। वैद ने पाकिस्तान को 'फ्रॉड स्टेट' और 'विद्रोही शासन' करार दिया।
वैद का सीधा आरोप: पाकिस्तान दुनिया को बेवकूफ बना रहा है
पूर्व DGP एसपी वैद ने कहा, 'जहाँ तक मैं जानता हूँ, पाकिस्तान एक फ्रॉड स्टेट है और पाकिस्तान की फौज और वहाँ की डीप स्टेट यानी आईएसआई दुनिया को बेवकूफ बनाती है — चाहे वो FIA की लिस्ट में डालकर हो या दूसरे तरीके से भगोड़ा दिखाकर।' उन्होंने स्पष्ट किया कि FATF टीम के दौरे को देखते हुए यह नाटक किया जा रहा है, जबकि 'हमारी इंटेलिजेंस बताती है कि सब पाकिस्तान में ही हैं।'
वैद ने पूछा कि लिस्ट में शामिल 19 लोग — जिनमें मसूद अज़हर के अलावा मुंबई अटैक में शामिल आतंकी भी हैं — आखिर कहाँ हैं? उन्होंने कहा, 'अजहर मसूद के बारे में पहले कहा गया था कि वो अफगानिस्तान में है, लेकिन अफगान सरकार ने इससे इनकार किया। वो भारत में आ नहीं सकता। और पिछली बार ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उसके परिवार के 11 सदस्यों के मारे जाने पर उसे रोते हुए देखा गया था।'
FATF दौरा और पाकिस्तान की 'बौखलाहट'
वैद के अनुसार FATF और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों को यह समझना होगा कि पाकिस्तान एक 'विद्रोही शासन' है जहाँ सेना की इच्छा ही राज्य की नीति होती है। उन्होंने कहा, 'वहाँ सच नहीं बोला जाता — आतंकवाद चलाना ही उनकी स्टेट पॉलिसी है।' उन्होंने ब्रिक्स सम्मेलन में पहलगाम हमले की निंदा का भी उल्लेख किया, जिसमें चीन समेत सभी सदस्य देशों ने हस्ताक्षर किए।
गौरतलब है कि FATF की ग्रे लिस्ट से बाहर निकलने के बाद पाकिस्तान पर आतंकी वित्त-पोषण रोकने की जवाबदेही लगातार बढ़ी है। ऐसे में यह FATF दौरा पाकिस्तान के लिए संवेदनशील समय पर आया है।
एलएसी पर चीन की तैनाती में कमी, लेकिन सतर्कता ज़रूरी: डीपी पांडे
रक्षा विशेषज्ञ डीपी पांडे ने कहा कि वर्ष 2025 की तुलना में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर सैनिकों की तैनाती में कमी आई है। उनके अनुसार गलवान घाटी संघर्ष के बाद दोनों देशों की सेनाओं ने भारी संख्या में LAC पर तैनाती बढ़ाई थी, लेकिन धीरे-धीरे चीन को यह समझ आया कि बातचीत का रास्ता ही व्यावहारिक है।
पांडे ने कहा, 'जब भारत ने स्पष्ट कर दिया कि जब तक बॉर्डर पर स्थिति नहीं सुधरेगी, व्यापार और अन्य प्रतिबंध नहीं हटेंगे — तब से चीन के रुख में काफी नरमी आई है।' उन्होंने शी जिनपिंग के ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान भारत दौरे और प्रधानमंत्री के साथ हुई वार्ता का भी उल्लेख किया।
विशेषज्ञ की चेतावनी: चीन पर सौ फीसदी भरोसा नहीं
रक्षा विशेषज्ञ डीपी पांडे ने हालाँकि साफ चेताया कि संबंधों में सुधार के संकेतों के बावजूद भारत को चीन पर पूर्ण विश्वास नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा, 'हमारी सेना को वहाँ पर पूरी तरह सजग रहना चाहिए। चीन के पास आज काफी अंदरूनी समस्याएं हैं और बाहर भी कुछ परेशानियाँ हैं।' उन्होंने विश्वास जताया कि भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारी LAC पर निरंतर निगरानी रख रहे हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत-चीन संबंध धीरे-धीरे सामान्य होने की राह पर हैं, लेकिन सीमा पर किसी भी ढिलाई को विशेषज्ञ जोखिम भरा मानते हैं। आने वाले महीनों में FATF की रिपोर्ट और LAC पर गतिविधियाँ दोनों ही भारत की सुरक्षा नीति की कसौटी बनेंगी।