गर्मी की शुरुआत में आगजनी की घटनाओं में तेजी, जानें तापमान के असर से कैसे होती हैं अप्रिय घटनाएं
सारांश
Key Takeaways
- गर्मी में तापमान बढ़ना: आगजनी का मुख्य कारण।
- उत्तरायण सूर्य: आगजनी को बढ़ावा देता है।
- इग्निशन तापमान: ज्वलनशील सामग्रियों का घटना।
- मार्च से जुलाई: सबसे गर्म महीनों में आग लगना।
- सावधानी: आगजनी से बचने के उपाय अपनाना।
नई दिल्ली, 12 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। देश में गर्मियों का मौसम अभी ठीक से प्रारंभ नहीं हुआ है, फिर भी विभिन्न क्षेत्रों से आगजनी की घटनाओं की रिपोर्ट आ रही हैं। मध्य प्रदेश, दिल्ली और नोएडा में आग लगने से भारी जान-माल का नुकसान हुआ है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि गर्मियों की शुरुआत में तापमान बढ़ते ही आग लगने की घटनाओं में अचानक इजाफा क्यों हो जाता है, खासकर उत्तर भारत में?
वास्तव में, सूर्य का उत्तरायण होना और पारे का बढ़ना आगजनी का प्रमुख कारण बनता है। उच्च तापमान के परिणामस्वरूप शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में ज्वलनशील सामग्रियों का इग्निशन तापमान घट जाता है, जिससे छोटी सी चिंगारी भी भयानक आग का रूप ले लेती है। आइए विस्तार से समझते हैं कि सूर्य की स्थिति किस प्रकार आगजनी को बढ़ावा देती है।
जनवरी में मकर संक्रांति पर सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है और यहीं से उसकी उत्तरायण यात्रा शुरू होती है। सरल शब्दों में कहें तो सूर्य का झुकाव उत्तर दिशा में होने लगता है। खगोलीय दृष्टि से इस समय सूर्य पृथ्वी के निकट होता है, फिर भी उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड का अनुभव होता है। इसका कारण पृथ्वी का अपनी धुरी पर 23.5 डिग्री का झुकाव है, जिससे उत्तरी गोलार्ध सूर्य से दूर रहता है और सूर्य की किरणें तिरछी पड़ती हैं।
मार्च के अंत तक सूर्य खगोलीय भूमध्य रेखा के समीप आ जाता है और उसकी किरणों का प्रभाव भारत पर बढ़ने लगता है। वसंत ऋतु के दौरान दिन और रात बराबर हो जाते हैं क्योंकि सूर्य खगोलीय भूमध्य रेखा के सीध में होता है। इस समय दिन में गर्मी और रात में हल्की ठंडक होती है।
अप्रैल से लेकर जून के बीच गर्मी का प्रकोप बढ़ता है, क्योंकि इस समय सूर्य का उत्तरायण मार्ग सक्रिय होता है। पृथ्वी के झुकाव के कारण सूर्य की किरणें उत्तरी गोलार्ध पर सीधे पड़ती हैं, जिससे तापमान में उल्लेखनीय वृद्धि होती है। इस मौसम में 21 जून का दिन खगोलीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि इस समय सूर्य कर्क रेखा के ठीक ऊपर होता है। दिन में सूरज के अधिक प्रभाव के कारण लू की स्थिति उत्पन्न होती है।
जुलाई में सूर्य की किरणें सीधे और लंबे समय तक पड़ने से धरती तेजी से गर्म होती है, और लू के कारण खेतों और जंगलों में आग लगने की घटनाएं अधिक देखने को मिलती हैं। इसके अतिरिक्त, उत्तरी गोलार्ध में भूमि का हिस्सा अधिक होता है और पानी की मात्रा कम। इस स्थिति में धरती तेजी से गर्म होती है और तापमान चढ़ने लगता है। यही कारण है कि अप्रैल से जुलाई तक का समय सबसे गर्म माना जाता है, और इस दौरान बढ़ता तापमान आगजनी का मुख्य कारण बनता है।