अन्नाद्रमुक को बड़ा झटका: चार पूर्व मंत्री टीवीके में शामिल, विपक्ष में गहराया संकट
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु की प्रमुख विपक्षी पार्टी अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक / AIADMK) को 7 जून 2025 को उस समय बड़ा राजनीतिक धक्का लगा, जब उसके चार पूर्व मंत्री और वरिष्ठ नेता सत्तारूढ़ तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) में शामिल हो गए। चेन्नई स्थित TVK मुख्यालय में आयोजित इस कार्यक्रम को विजय सरकार के गठन के बाद अन्नाद्रमुक से हुआ अब तक का सबसे बड़ा राजनीतिक दलबदल माना जा रहा है।
कौन हुए शामिल
पार्टी छोड़ने वाले चार नेताओं में पूर्व मंत्री एवं पूर्व विधायक उदुमलाई के. राधाकृष्णन, एम.सी. संपत, कडंबूर सी. राजू और एन.आर. शिवपति शामिल हैं। इन सभी ने TVK के महासचिव एन. आनंद और चुनाव अभियान प्रबंधन महासचिव आधव अर्जुना की उपस्थिति में पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। गौरतलब है कि इन चारों नेताओं को हाल के विधानसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था — उदुमलाई राधाकृष्णन उदुमलपेट सीट से, एम.सी. संपत कडलूर सीट से तीसरे स्थान पर रहे और कडंबूर राजू कोविलपट्टी सीट पर पराजित हुए।
अन्नाद्रमुक में संकट की पृष्ठभूमि
23 अप्रैल को हुए विधानसभा चुनावों में अन्नाद्रमुक के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद से पार्टी में आंतरिक कलह लगातार बढ़ती जा रही है। संकट उस समय और गहरा हो गया जब अन्नाद्रमुक के 25 विधायकों ने पार्टी व्हिप की अवहेलना करते हुए विधानसभा में विश्वास मत के दौरान मुख्यमंत्री विजय का समर्थन किया। यह घटना पार्टी की आंतरिक दरार को सार्वजनिक रूप से उजागर करने वाली बन गई। हालाँकि बाद में बागी गुट ने पार्टी महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी से सुलह कर ली, किंतु नेताओं और कार्यकर्ताओं का पलायन थमा नहीं।
दलबदल का सिलसिला
यह पहली बार नहीं है जब अन्नाद्रमुक नेताओं ने TVK का दामन थामा हो। इससे पहले चार बागी विधायक भी अन्नाद्रमुक छोड़कर TVK में शामिल हो चुके हैं। 29 मई को 300 से अधिक अन्नाद्रमुक सदस्य पनैयूर स्थित TVK मुख्यालय में पार्टी में शामिल हुए थे, जिनमें पूर्व मंत्री वेल्लामंडी नटराजन और आनंदन सहित कई पूर्व विधायक भी थे। इसके अलावा कई जिला स्तरीय पदाधिकारी और जमीनी स्तर के कार्यकर्ता भी सत्तारूढ़ दल में जा चुके हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों की राय
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अन्नाद्रमुक से लगातार हो रहे दलबदल TVK के बढ़ते राजनीतिक प्रभाव का स्पष्ट संकेत हैं। उनके अनुसार, विधानसभा चुनाव में हार के बाद विपक्षी दल के लिए अपनी राजनीतिक जमीन दोबारा मजबूत करना एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।
आगे की राह
अन्नाद्रमुक के लिए अब असली परीक्षा यह है कि पार्टी महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी किस तरह इस पलायन को रोकते हैं और संगठन को एकजुट करते हैं। यदि दलबदल का यह सिलसिला जारी रहा, तो तमिलनाडु में मुख्य विपक्षी दल के रूप में अन्नाद्रमुक की स्थिति और कमज़ोर हो सकती है।