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अन्नाद्रमुक को बड़ा झटका: चार पूर्व मंत्री टीवीके में शामिल, विपक्ष में गहराया संकट

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अन्नाद्रमुक को बड़ा झटका: चार पूर्व मंत्री टीवीके में शामिल, विपक्ष में गहराया संकट

सारांश

अन्नाद्रमुक के चार पूर्व मंत्रियों का TVK में शामिल होना महज एक दलबदल नहीं — यह 23 अप्रैल की चुनावी हार के बाद से जारी उस क्रमिक विघटन की नई कड़ी है जो तमिलनाडु के मुख्य विपक्षी दल की नींव को हिला रही है।

मुख्य बातें

पूर्व मंत्री उदुमलाई के.
शिवपति ने 7 जून 2025 को TVK की सदस्यता ग्रहण की।
यह विजय सरकार के गठन के बाद अन्नाद्रमुक से TVK में हुआ अब तक का सबसे बड़ा एकल दलबदल माना जा रहा है।
23 अप्रैल के विधानसभा चुनाव में हार के बाद से अन्नाद्रमुक में आंतरिक कलह और नेताओं का पलायन लगातार जारी है।
इससे पहले 4 बागी विधायक और 29 मई को 300 से अधिक सदस्य भी TVK में शामिल हो चुके हैं।
अन्नाद्रमुक के 25 विधायकों ने विश्वास मत में पार्टी व्हिप की अवहेलना कर मुख्यमंत्री विजय का समर्थन किया था।

तमिलनाडु की प्रमुख विपक्षी पार्टी अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक / AIADMK) को 7 जून 2025 को उस समय बड़ा राजनीतिक धक्का लगा, जब उसके चार पूर्व मंत्री और वरिष्ठ नेता सत्तारूढ़ तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) में शामिल हो गए। चेन्नई स्थित TVK मुख्यालय में आयोजित इस कार्यक्रम को विजय सरकार के गठन के बाद अन्नाद्रमुक से हुआ अब तक का सबसे बड़ा राजनीतिक दलबदल माना जा रहा है।

कौन हुए शामिल

पार्टी छोड़ने वाले चार नेताओं में पूर्व मंत्री एवं पूर्व विधायक उदुमलाई के. राधाकृष्णन, एम.सी. संपत, कडंबूर सी. राजू और एन.आर. शिवपति शामिल हैं। इन सभी ने TVK के महासचिव एन. आनंद और चुनाव अभियान प्रबंधन महासचिव आधव अर्जुना की उपस्थिति में पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। गौरतलब है कि इन चारों नेताओं को हाल के विधानसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था — उदुमलाई राधाकृष्णन उदुमलपेट सीट से, एम.सी. संपत कडलूर सीट से तीसरे स्थान पर रहे और कडंबूर राजू कोविलपट्टी सीट पर पराजित हुए।

अन्नाद्रमुक में संकट की पृष्ठभूमि

23 अप्रैल को हुए विधानसभा चुनावों में अन्नाद्रमुक के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद से पार्टी में आंतरिक कलह लगातार बढ़ती जा रही है। संकट उस समय और गहरा हो गया जब अन्नाद्रमुक के 25 विधायकों ने पार्टी व्हिप की अवहेलना करते हुए विधानसभा में विश्वास मत के दौरान मुख्यमंत्री विजय का समर्थन किया। यह घटना पार्टी की आंतरिक दरार को सार्वजनिक रूप से उजागर करने वाली बन गई। हालाँकि बाद में बागी गुट ने पार्टी महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी से सुलह कर ली, किंतु नेताओं और कार्यकर्ताओं का पलायन थमा नहीं।

दलबदल का सिलसिला

यह पहली बार नहीं है जब अन्नाद्रमुक नेताओं ने TVK का दामन थामा हो। इससे पहले चार बागी विधायक भी अन्नाद्रमुक छोड़कर TVK में शामिल हो चुके हैं। 29 मई को 300 से अधिक अन्नाद्रमुक सदस्य पनैयूर स्थित TVK मुख्यालय में पार्टी में शामिल हुए थे, जिनमें पूर्व मंत्री वेल्लामंडी नटराजन और आनंदन सहित कई पूर्व विधायक भी थे। इसके अलावा कई जिला स्तरीय पदाधिकारी और जमीनी स्तर के कार्यकर्ता भी सत्तारूढ़ दल में जा चुके हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों की राय

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अन्नाद्रमुक से लगातार हो रहे दलबदल TVK के बढ़ते राजनीतिक प्रभाव का स्पष्ट संकेत हैं। उनके अनुसार, विधानसभा चुनाव में हार के बाद विपक्षी दल के लिए अपनी राजनीतिक जमीन दोबारा मजबूत करना एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।

आगे की राह

अन्नाद्रमुक के लिए अब असली परीक्षा यह है कि पार्टी महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी किस तरह इस पलायन को रोकते हैं और संगठन को एकजुट करते हैं। यदि दलबदल का यह सिलसिला जारी रहा, तो तमिलनाडु में मुख्य विपक्षी दल के रूप में अन्नाद्रमुक की स्थिति और कमज़ोर हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर सुलह, और अब नए दलबदल — यह पैटर्न बताता है कि सुलह सतही थी, संरचनात्मक नहीं। तमिलनाडु में जहाँ सत्ता-विरोधी लहर ऐतिहासिक रूप से प्रबल रही है, वहाँ एक कमज़ोर मुख्य विपक्ष लोकतांत्रिक जवाबदेही के लिए भी चिंताजनक है।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अन्नाद्रमुक के कौन से चार पूर्व मंत्री TVK में शामिल हुए?
पूर्व मंत्री उदुमलाई के. राधाकृष्णन, एम.सी. संपत, कडंबूर सी. राजू और एन.आर. शिवपति ने 7 जून 2025 को चेन्नई स्थित TVK मुख्यालय में पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। ये सभी नेता हाल के विधानसभा चुनाव में पराजित हुए थे।
अन्नाद्रमुक में यह संकट क्यों आया?
23 अप्रैल 2025 के विधानसभा चुनाव में अन्नाद्रमुक के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद पार्टी में असंतोष बढ़ा। संकट तब और गहरा हुआ जब पार्टी के 25 विधायकों ने व्हिप की अवहेलना करते हुए विश्वास मत में मुख्यमंत्री विजय का समर्थन किया।
TVK में अन्नाद्रमुक से कितने नेता अब तक आ चुके हैं?
विजय सरकार के गठन के बाद से चार बागी विधायक, 29 मई को 300 से अधिक सदस्य (जिनमें पूर्व मंत्री वेल्लामंडी नटराजन और आनंदन शामिल थे), और अब चार पूर्व मंत्री TVK में शामिल हो चुके हैं। इसके अलावा कई जिला स्तरीय पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी पार्टी छोड़ चुके हैं।
अन्नाद्रमुक महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी की क्या स्थिति है?
एडप्पादी के. पलानीस्वामी पार्टी महासचिव के रूप में बने हुए हैं। बागी विधायकों ने उनसे सुलह कर ली थी, लेकिन उसके बावजूद नेताओं का पलायन जारी है, जो पार्टी में उनकी पकड़ को लेकर सवाल उठाता है।
इन दलबदलों का तमिलनाडु की राजनीति पर क्या असर पड़ेगा?
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, लगातार हो रहे दलबदल TVK के बढ़ते वर्चस्व को दर्शाते हैं और अन्नाद्रमुक के लिए मुख्य विपक्षी दल की भूमिका निभाना कठिन होता जा रहा है। यदि यह सिलसिला जारी रहा तो तमिलनाडु में प्रभावी विपक्ष का अभाव हो सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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