6 नवंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

फ्यूचर रिटेल पर CBI का शिकंजा: किशोर बियानी समेत कई पर ₹904.32 करोड़ की बैंक धोखाधड़ी का केस

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
फ्यूचर रिटेल पर CBI का शिकंजा: किशोर बियानी समेत कई पर ₹904.32 करोड़ की बैंक धोखाधड़ी का केस

सारांश

CBI ने फ्यूचर रिटेल लिमिटेड और उसके प्रमोटर किशोर बियानी व राकेश बियानी के खिलाफ ₹904.32 करोड़ की बैंक धोखाधड़ी का केस दर्ज किया है। SBI समेत 9 बैंकों के कंसोर्टियम को कथित नुकसान, फंड डायवर्जन का आरोप और मुंबई में तलाशी — यह बिग बाजार साम्राज्य के पतन की नई कड़ी है।

मुख्य बातें

CBI ने 4 नवंबर 2026 को मैसर्स फ्यूचर रिटेल लिमिटेड (FRL) के खिलाफ ₹904.32 करोड़ की बैंक धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया।
प्रमोटर किशोर बियानी और राकेश बियानी समेत कंपनी के प्रबंध निदेशक, कार्यकारी निदेशक और गारंटर आरोपी बनाए गए हैं।
आरोप है कि कंपनी ने SBI सहित 9 बैंकों के कंसोर्टियम से मिले लोन का इस्तेमाल स्वीकृत उद्देश्य के बजाय सहयोगी कंपनियों में डायवर्ट किया।
CBI ने मुंबई में कई ठिकानों पर तलाशी ली और जांच से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए।
खाता NPA घोषित हो चुका है; अज्ञात लोक सेवकों की भूमिका की भी जांच जारी है।

केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने मुंबई स्थित मैसर्स फ्यूचर रिटेल लिमिटेड (FRL) के खिलाफ ₹904.32 करोड़ की बैंक धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। एजेंसी ने 4 नवंबर 2026 को केस दर्ज करने के बाद कंपनी के प्रमोटरों और निदेशकों से जुड़े मुंबई में कई ठिकानों पर तलाशी अभियान भी चलाया। इस कार्रवाई में कंपनी के प्रमोटर किशोर बियानी और राकेश बियानी समेत अन्य अधिकारियों को आरोपी बनाया गया है।

मामले की पृष्ठभूमि

CBI ने यह कार्रवाई भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की स्ट्रेस्ड एसेट्स मैनेजमेंट ब्रांच-3, मुंबई की शिकायत के आधार पर की है। शिकायत में आरोप लगाया गया कि FRL और उसके प्रमोटरों ने SBI की कमर्शियल ब्रांच, फोर्ट, मुंबई सहित 9 बैंकों के एक कंसोर्टियम से वर्किंग कैपिटल, टर्म लोन और लेटर ऑफ क्रेडिट के रूप में क्रेडिट सुविधाएँ हासिल कीं। इन सुविधाओं का कथित तौर पर उस उद्देश्य के लिए उपयोग नहीं किया गया जिसके लिए उन्हें मंजूरी दी गई थी।

आरोप है कि कंपनी ने बैंकों से प्राप्त फंड को सहयोगी कंपनियों और उससे जुड़ी अन्य इकाइयों में डायवर्ट कर दिया, जिससे शिकायतकर्ता बैंक को कथित तौर पर ₹904.32 करोड़ का नुकसान हुआ। फंड के इस डायवर्जन के चलते संबंधित खाता अंततः NPA (नॉन-परफॉर्मिंग एसेट) में तब्दील हो गया।

आरोपी और आरोप

CBI ने मैसर्स फ्यूचर रिटेल लिमिटेड, उसके प्रमोटरों, प्रबंध निदेशकों, कार्यकारी निदेशकों और गारंटरों के खिलाफ केस दर्ज किया है। नामित आरोपियों में कंपनी के प्रमोटर किशोर बियानी और राकेश बियानी शामिल हैं। इसके अलावा कुछ अज्ञात लोक सेवकों और अन्य अज्ञात व्यक्तियों को भी आरोपी बनाया गया है।

आरोपियों पर धोखाधड़ी के लिए आपराधिक साजिश रचने और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अपराध करने का आरोप है। गौरतलब है कि फ्यूचर रिटेल कभी देश की सबसे बड़ी रिटेल चेन में से एक थी, जो बिग बाजार, फैशन बिग बाजार और फूडहॉल जैसे हाइपरमार्केट और सुपरमार्केट के जरिए FMCG और फैशन उत्पादों की जनरल ट्रेडिंग में सक्रिय थी।

तलाशी अभियान और बरामदगी

मामला दर्ज होने के बाद CBI ने मुंबई में FRL के प्रमोटरों और निदेशकों से जुड़े कई ठिकानों पर तलाशी ली। एजेंसी के अनुसार, तलाशी के दौरान जांच से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद कर जब्त किए गए।

CBI अधिकारियों ने बताया कि तलाशी का उद्देश्य लोन से संबंधित दस्तावेज, वित्तीय लेन-देन के रिकॉर्ड और फंड के इस्तेमाल से जुड़े साक्ष्य जुटाना था। बरामद दस्तावेजों की जांच जारी है, ताकि साजिश के पूरे दायरे का पता लगाया जा सके।

आगे की जांच

CBI अब इस मामले में शामिल सभी लोगों की भूमिका की पहचान करने में जुटी है — इनमें सरकारी कर्मचारी और निजी व्यक्ति, दोनों शामिल हैं। एजेंसी यह भी पता लगा रही है कि लोन की रकम का अंतिम उपयोग कहाँ हुआ।

CBI ने स्पष्ट किया है कि फंड के प्रवाह का पूरा ट्रेल खंगाला जाएगा और जरूरत पड़ने पर और अधिक लोगों से पूछताछ की जाएगी। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब बड़े कॉर्पोरेट समूहों द्वारा बैंक धोखाधड़ी के कई मामलों में जाँच एजेंसियाँ सक्रिय रही हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ लोन मंजूरी के बाद फंड के उपयोग की निगरानी नाकाफी रहती है। ₹904.32 करोड़ की यह धोखाधड़ी उन दर्जनों कॉर्पोरेट NPA मामलों की श्रृंखला में एक और कड़ी है जिनमें बड़े समूहों ने बैंकों से धन लेकर सहयोगी कंपनियों में डायवर्ट किया। असली सवाल यह है कि क्या CBI की जांच केवल प्रमोटरों तक सीमित रहेगी, या अज्ञात लोक सेवकों की संभावित भूमिका की भी वास्तविक जवाबदेही तय होगी — जो अब तक ऐसे मामलों में अक्सर अनुत्तरित रह जाती है।
RashtraPress
6 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

फ्यूचर रिटेल पर CBI का केस क्या है?
CBI ने मैसर्स फ्यूचर रिटेल लिमिटेड और उसके प्रमोटरों के खिलाफ ₹904.32 करोड़ की बैंक धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। आरोप है कि कंपनी ने SBI समेत 9 बैंकों के कंसोर्टियम से लिए गए लोन का उपयोग स्वीकृत उद्देश्य के लिए न करके सहयोगी कंपनियों में डायवर्ट किया।
किशोर बियानी पर क्या आरोप हैं?
फ्यूचर रिटेल के प्रमोटर किशोर बियानी और राकेश बियानी पर बैंक धोखाधड़ी के लिए आपराधिक साजिश रचने और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अपराध करने का आरोप लगाया गया है। CBI ने उन्हें मामले के प्रमुख आरोपियों में शामिल किया है।
CBI ने तलाशी में क्या बरामद किया?
4 नवंबर 2026 को मामला दर्ज होने के बाद CBI ने मुंबई में FRL के प्रमोटरों और निदेशकों से जुड़े कई ठिकानों पर तलाशी ली। इस दौरान लोन से संबंधित दस्तावेज, वित्तीय लेन-देन के रिकॉर्ड और फंड के इस्तेमाल से जुड़े महत्वपूर्ण साक्ष्य जब्त किए गए।
फ्यूचर रिटेल का खाता NPA कैसे बना?
आरोपों के अनुसार, कंपनी ने बैंकों से मिले लोन का उपयोग निर्धारित उद्देश्य के बजाय सहयोगी और संबद्ध कंपनियों में फंड डायवर्ट करने में किया। इस डायवर्जन के कारण बैंक की राशि का उचित उपयोग नहीं हो सका और अंततः खाता NPA में बदल गया।
इस मामले में आगे की जांच किस दिशा में जाएगी?
CBI के अनुसार फंड के प्रवाह का पूरा ट्रेल खंगाला जाएगा और आवश्यकता पड़ने पर और लोगों से पूछताछ की जाएगी। एजेंसी मामले में कथित रूप से शामिल अज्ञात लोक सेवकों और निजी व्यक्तियों की भूमिका की भी पहचान कर रही है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 3 महीने पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 4 महीने पहले
  5. 4 महीने पहले
  6. 4 महीने पहले
  7. 5 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले