25 अगस्त 2026
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गंगा दशहरा 2026: पुरुषोत्तम मास के दसवें दिन रवि योग और अभिजीत मुहूर्त का दुर्लभ संयोग, जानें राहुकाल

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गंगा दशहरा 2026: पुरुषोत्तम मास के दसवें दिन रवि योग और अभिजीत मुहूर्त का दुर्लभ संयोग, जानें राहुकाल

सारांश

इस वर्ष गंगा दशहरा महज एक तिथि नहीं — यह पुरुषोत्तम मास, रवि योग और अभिजीत मुहूर्त का दुर्लभ त्रिसंयोग है। 25 मई 2026 को ज्येष्ठ शुक्ल दशमी पर गंगा स्नान और दान का फल कई गुना माना जाता है। राहुकाल से बचते हुए शुभ मुहूर्त में पूजन करें।

मुख्य बातें

गंगा दशहरा 2026 इस वर्ष 25 मई (सोमवार) को पुरुषोत्तम मास में मनाया जाएगा, जो इसे विशेष रूप से पुण्यकारी बनाता है।
पूरे दिन रवि योग रहेगा; अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:51 से दोपहर 12:46 बजे तक।
ब्रह्मपुराण के अनुसार इस दिन गंगा स्नान से दस प्रकार के पापों का नाश होता है।
राहुकाल सुबह 7:09 से 8:52 बजे तक; शुभ कार्यों से बचें।
सूर्योदय 5:26 बजे , सूर्यास्त 7:11 बजे ; नक्षत्र उत्तराफाल्गुनी ।

गंगा दशहरा 2026 इस वर्ष विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह पावन पर्व पुरुषोत्तम मास (अधिक मास) के दौरान पड़ रहा है। 25 मई 2026 (सोमवार) को ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि पर गंगा दशहरा मनाया जाएगा। इस दिन पूरे दिन रवि योग और अभिजीत मुहूर्त का दुर्लभ संयोग बन रहा है, जो इस पर्व की धार्मिक महत्ता को और बढ़ा देता है।

गंगा दशहरा का धार्मिक महत्व

ब्रह्मपुराण के अनुसार, ज्येष्ठ शुक्ल दशमी को हस्त नक्षत्र में स्वर्गलोक से देवी गंगा का पृथ्वी पर अवतरण हुआ था। मान्यता है कि इस दिन गंगा स्नान करने से दस प्रकार के पापों का नाश होता है, इसी कारण इसे 'गंगा दशहरा' कहा जाता है। इस वर्ष यह पर्व सनातन धर्म में नारायण को प्रिय पुरुषोत्तम मास में पड़ रहा है, जिससे इसका फल कई गुना अधिक माना जाता है।

जो श्रद्धालु गंगा तट तक नहीं पहुँच सकते, वे घर पर गंगाजल से स्नान कर अथवा देवी गंगा का ध्यान करते हुए पूजन कर सकते हैं। इस दिन दान-पुण्य, ब्राह्मण भोजन और गौ सेवा का भी विशेष विधान बताया गया है।

25 मई के शुभ मुहूर्त

25 मई 2026 को सूर्योदय सुबह 5 बजकर 26 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 7 बजकर 11 मिनट पर होगा। दिन का नक्षत्र उत्तराफाल्गुनी है, जो सुबह 4 बजकर 8 मिनट तक रहेगा। वज्र योग सुबह 3 बजकर 15 मिनट तक प्रभावी रहेगा।

शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं:

अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:51 से दोपहर 12:46 बजे तक
विजय मुहूर्त: दोपहर 2:36 से 3:31 बजे तक
गोधूलि मुहूर्त: शाम 7:09 से 7:30 बजे तक
रवि योग: पूरे दिन (शुभ कार्यों के लिए अत्यंत उत्तम)

राहुकाल और अशुभ समय

गंगा दशहरा के दिन किसी भी शुभ कार्य को आरंभ करने से पहले इन अशुभ कालों से बचना आवश्यक है:

राहुकाल: सुबह 7:09 से 8:52 बजे तक
यमगंड: सुबह 10:35 से दोपहर 12:18 बजे तक
गुलिक काल: दोपहर 2:01 से 3:44 बजे तक

पुरुषोत्तम मास में गंगा दशहरा का विशेष संयोग

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पुरुषोत्तम मास वह अतिरिक्त मास है जो हर तीन वर्ष में एक बार आता है और भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है। इस मास में किए गए व्रत, दान और पूजन का फल सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक बताया गया है। ऐसे में गंगा दशहरा का इस मास में पड़ना एक दुर्लभ और अत्यंत पुण्यकारी संयोग है।

आगामी दिनों में पुरुषोत्तम मास के शेष पर्वों और तिथियों पर भी श्रद्धालुओं को विशेष ध्यान देने की सलाह दी जाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि दैनिक जीवन की योजना का हिस्सा है। इस वर्ष पुरुषोत्तम मास और गंगा दशहरा का संयोग दुर्लभ है और इसकी धार्मिक प्रासंगिकता को रेखांकित करना ज़रूरी है। साथ ही, जो श्रद्धालु गंगा तट तक नहीं पहुँच सकते, उनके लिए घर पर पूजन के विकल्प को स्पष्ट करना समावेशी धार्मिक पत्रकारिता की जिम्मेदारी है।
RashtraPress
25 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गंगा दशहरा 2026 कब है और इसका महत्व क्या है?
गंगा दशहरा 2026 का पर्व 25 मई 2026 (सोमवार) को ज्येष्ठ शुक्ल दशमी तिथि पर मनाया जाएगा। ब्रह्मपुराण के अनुसार इस दिन देवी गंगा का पृथ्वी पर अवतरण हुआ था और गंगा स्नान से दस प्रकार के पापों का नाश होता है।
25 मई 2026 को अभिजीत मुहूर्त और रवि योग कब है?
25 मई 2026 को अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:51 बजे से दोपहर 12:46 बजे तक है। रवि योग पूरे दिन रहेगा, जो शुभ कार्यों के लिए अत्यंत उत्तम माना जाता है।
गंगा दशहरा पर राहुकाल का समय क्या है?
25 मई 2026 को राहुकाल सुबह 7:09 बजे से 8:52 बजे तक रहेगा। इस अवधि में कोई भी शुभ कार्य आरंभ नहीं करना चाहिए। यमगंड सुबह 10:35 से दोपहर 12:18 बजे तक और गुलिक काल दोपहर 2:01 से 3:44 बजे तक रहेगा।
पुरुषोत्तम मास में गंगा दशहरा क्यों विशेष है?
पुरुषोत्तम मास हर तीन वर्ष में एक बार आता है और भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है। इस मास में किए गए दान, पूजन और व्रत का फल सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक बताया गया है, इसलिए इस वर्ष गंगा दशहरा का संयोग दुर्लभ और अत्यंत पुण्यकारी है।
जो लोग गंगा तट नहीं जा सकते, वे गंगा दशहरा कैसे मनाएँ?
जो श्रद्धालु गंगा नदी तक नहीं पहुँच सकते, वे घर पर गंगाजल से स्नान कर अथवा देवी गंगा का ध्यान करते हुए पूजन कर सकते हैं। इस दिन दान-पुण्य, ब्राह्मण भोजन और गौ सेवा का भी विशेष महत्व बताया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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