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गढ़वाली लोक संगीत के जनक जीत सिंह नेगी: 1949 में पहला LP रिकॉर्ड बनाने वाले उत्तराखंड के अमर सुर

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गढ़वाली लोक संगीत के जनक जीत सिंह नेगी: 1949 में पहला LP रिकॉर्ड बनाने वाले उत्तराखंड के अमर सुर

सारांश

जब रेडियो भी विरले घरों में था, तब जीत सिंह नेगी ने 1949 में गढ़वाली लोकगीतों का पहला LP रिकॉर्ड बनाकर इतिहास रच दिया। पौड़ी गढ़वाल के एक छोटे गाँव से निकले इस बहुआयामी कलाकार ने उत्तराखंड की बोली को राष्ट्रीय सांस्कृतिक मंच पर स्थापित किया।

मुख्य बातें

जीत सिंह नेगी का जन्म 2 फरवरी 1925 को पौड़ी गढ़वाल के अयाल गाँव में हुआ था।
वे 1949 में LP रिकॉर्ड बनाने वाले उत्तराखंड के पहले लोकगायक थे; 'यंग इंडिया ग्रामोफोन कंपनी' ने उनके 6 गीत रिकॉर्ड किए।
1954 में उन्होंने आकाशवाणी दिल्ली के लिए पहली बार रिकॉर्डिंग की।
संगीतकार, गायक, गीतकार, लेखक, निर्देशक और रंगकर्मी — नेगी बहुआयामी सांस्कृतिक व्यक्तित्व थे।
21 जून 2020 को 94 वर्ष की आयु में देहरादून के धर्मपुर में उनका निधन हुआ।

आधुनिक गढ़वाली लोक संगीत के जनक जीत सिंह नेगी का जन्म 2 फरवरी 1925 को उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले की पैडुलस्यूं पट्टी के अयाल गाँव में हुआ था। संगीतकार, गायक, गीतकार, लेखक, निर्देशक और रंगकर्मी की भूमिकाओं में एक साथ दक्ष नेगी ने ऐसे युग में गढ़वाली लोकगीतों को राष्ट्रीय पहचान दिलाई, जब रेडियो भी आम घरों की पहुँच से बाहर था और दूरदर्शन की कल्पना तक नहीं की जा सकती थी।

प्रारंभिक जीवन और शिक्षा

जीत सिंह नेगी के पिता सुल्तान सिंह नेगी ब्रिटिश सेना में कार्यरत थे और म्यांमार में तैनात थे। माता का नाम रूपदेई देवी था। नेगी ने पाँचवीं कक्षा तक की पढ़ाई अपने गाँव में पूरी की, इसके बाद पिता उन्हें म्यांमार ले गए जहाँ उन्होंने कक्षा छठी से आठवीं तक की शिक्षा ग्रहण की।

पिता के लाहौर स्थानांतरण के बाद नेगी ने वहीं से मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण की। गाँव लौटकर उन्होंने एक सरकारी कॉलेज से इंटरमीडिएट पास किया। परिवार की आर्थिक स्थिति अनुकूल न होने के कारण वे आगे की उच्च शिक्षा जारी नहीं रख सके।

संगीत यात्रा की शुरुआत

बचपन से लोकगीतों के प्रति गहरा अनुराग रखने वाले नेगी की औपचारिक संगीत यात्रा 1949 में आरंभ हुई, जब 'यंग इंडिया ग्रामोफोन कंपनी' ने उनके 6 गीतों की रिकॉर्डिंग की। यह उपलब्धि असाधारण इसलिए थी क्योंकि उस दौर में एलपी रिकॉर्ड केवल हिंदी फ़िल्मी गीतों के लिए ही बनते थे। नेगी गढ़वाली लोकगीतों को इस माध्यम से राष्ट्रीय मंच पर ले जाने वाले उत्तराखंड के पहले लोकगायक बने।

बाद में 'एंजेल न्यू रिकॉर्डिंग' कंपनी ने भी उनके गीत रिकॉर्ड किए। 1954 में उन्होंने पहली बार आकाशवाणी दिल्ली के लिए अपने गीतों की रिकॉर्डिंग की — जो उस समय किसी लोकगायक के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती थी।

रंगमंच और साहित्य में योगदान

गीत-संगीत के साथ-साथ नेगी को अभिनय से भी गहरा लगाव था। उन्होंने अनेक नाटक लिखे और उनका निर्देशन भी किया। यह बहुआयामी व्यक्तित्व उन्हें उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत के एक समग्र संवाहक के रूप में स्थापित करता है। गौरतलब है कि उस काल में जब क्षेत्रीय भाषाओं और बोलियों को मुख्यधारा में स्थान नहीं मिलता था, नेगी ने गढ़वाली को राष्ट्रीय सांस्कृतिक मानचित्र पर दृढ़ता से अंकित किया।

परिवार और निधन

नेगी की पत्नी का नाम मनोरमा नेगी है। उनके तीन संतानें हैं — बेटे ललित मोहन नेगी और दो बेटियाँ मधु नेगी तथा मंजू94 वर्ष की आयु में 21 जून 2020 को देहरादून के धर्मपुर स्थित अपने आवास में उनका निधन हो गया।

जीत सिंह नेगी की विरासत आज भी उत्तराखंड के गाँव-गाँव में गूँजती है — एक ऐसे कलाकार की विरासत जिसने बिना किसी आधुनिक तकनीक के सहारे गढ़वाली लोक संगीत को अमर कर दिया।

संपादकीय दृष्टिकोण

तब गढ़वाली में LP रिकॉर्ड बनाना एक साहसिक सांस्कृतिक कदम था। आज जब उत्तराखंड की लोक परंपराएँ व्यावसायीकरण और पलायन के दोहरे संकट से जूझ रही हैं, नेगी जैसे अग्रदूतों का स्मरण केवल श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि नीतिगत प्रेरणा भी होनी चाहिए।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जीत सिंह नेगी कौन थे और उन्हें गढ़वाली लोक संगीत का जनक क्यों कहा जाता है?
जीत सिंह नेगी आधुनिक गढ़वाली लोक संगीत के जनक माने जाते हैं, जिन्होंने 1949 में गढ़वाली लोकगीतों का पहला LP रिकॉर्ड बनाकर इस बोली को राष्ट्रीय मंच पर स्थापित किया। उस दौर में क्षेत्रीय भाषाओं के लिए ग्रामोफोन रिकॉर्ड बनना अत्यंत दुर्लभ था।
जीत सिंह नेगी का जन्म कब और कहाँ हुआ था?
जीत सिंह नेगी का जन्म 2 फरवरी 1925 को उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले की पैडुलस्यूं पट्टी के अयाल गाँव में हुआ था। उनके पिता सुल्तान सिंह नेगी ब्रिटिश सेना में कार्यरत थे।
जीत सिंह नेगी का पहला LP रिकॉर्ड कब बना और किसने रिकॉर्ड किया?
'यंग इंडिया ग्रामोफोन कंपनी' ने 1949 में उनके 6 गढ़वाली लोकगीतों की रिकॉर्डिंग की, जो उत्तराखंड के किसी लोकगायक का पहला LP रिकॉर्ड था। बाद में 'एंजेल न्यू रिकॉर्डिंग' कंपनी ने भी उनके गीत रिकॉर्ड किए।
जीत सिंह नेगी का निधन कब और कहाँ हुआ?
जीत सिंह नेगी का निधन 21 जून 2020 को 94 वर्ष की आयु में देहरादून के धर्मपुर स्थित उनके आवास में हुआ। वे अपने पीछे पत्नी मनोरमा नेगी, बेटे ललित मोहन नेगी और दो बेटियाँ मधु नेगी व मंजू छोड़ गए।
आकाशवाणी से जीत सिंह नेगी का क्या संबंध था?
जीत सिंह नेगी ने 1954 में पहली बार आकाशवाणी दिल्ली के लिए अपने गीतों की रिकॉर्डिंग की, जो उस समय किसी क्षेत्रीय लोकगायक के लिए एक बड़ी उपलब्धि थी। इस माध्यम से उन्होंने गढ़वाली लोक संगीत को देशभर के श्रोताओं तक पहुँचाया।
राष्ट्र प्रेस
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