22 सितंबर 2026
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गुवाहाटी हाईकोर्ट ने रिपुन बोरा की बरी को बरकरार रखा, डेनियल टॉपनो हत्याकांड में CBI की अपील खारिज

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गुवाहाटी हाईकोर्ट ने रिपुन बोरा की बरी को बरकरार रखा, डेनियल टॉपनो हत्याकांड में CBI की अपील खारिज

सारांश

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने वर्ष 2000 के डेनियल टॉपनो हत्याकांड में कांग्रेस नेता रिपुन बोरा को बरी करने के निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए CBI की अपील खारिज कर दी — यह मामला पच्चीस वर्षों की कानूनी प्रक्रिया के बाद एक महत्त्वपूर्ण मोड़ पर पहुँचा है।

मुख्य बातें

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने 22 सितंबर 2026 को CBI की अपील खारिज कर रिपुन बोरा की बरी को बरकरार रखा।
मामला सितंबर 2000 में असम के गोहपुर में चाय बागान नेता डेनियल टॉपनो की हत्या से जुड़ा है।
कामरूप जिला एवं सत्र न्यायालय ने फरवरी 2014 में रिपुन बोरा और पुलिन फुकन को साक्ष्य अपर्याप्त पाए जाने पर बरी किया था।
CBI ने 2014 के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जो अब खारिज हो चुकी है।
रिपुन बोरा असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री हैं।

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने 22 सितंबर 2026 को वर्ष 2000 में असम के चाय बागान समुदाय के नेता डेनियल टॉपनो की हत्या के मामले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रिपुन बोरा को बरी किए जाने के विरुद्ध केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा दायर अपील खारिज कर दी। इस आदेश से बोरा को दो दशकों से अधिक समय से चले आ रहे इस मामले में बड़ी कानूनी राहत मिली है।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला सितंबर 2000 में असम के गोहपुर क्षेत्र में डेनियल टॉपनो की हत्या से जुड़ा है। टॉपनो चाय बागान समुदाय के एक प्रमुख नेता के रूप में जाने जाते थे और उनकी हत्या ने उस समय असम में व्यापक चर्चा बटोरी थी। वर्ष 2001 में CBI ने इस मामले की जांच अपने हाथों में ले ली और बाद में रिपुन बोरा तथा पुलिन फुकन को आरोपियों के रूप में नामित किया।

निचली अदालत का फैसला

यह मामला कामरूप जिला एवं सत्र न्यायालय में कई वर्षों तक लंबित रहा। फरवरी 2014 में निचली अदालत ने रिपुन बोरा और पुलिन फुकन दोनों को बरी कर दिया। अदालत ने अपने फैसले में पाया कि CBI द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य आरोपियों के विरुद्ध आरोप सिद्ध करने के लिए अपर्याप्त थे।

हाईकोर्ट में CBI की चुनौती

CBI ने 2014 के बरी होने के फैसले को गुवाहाटी हाईकोर्ट में चुनौती दी और निचली अदालत के आदेश को पलटने की माँग की। अपील पर विस्तार से विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने मंगलवार, 22 सितंबर 2026 को CBI की चुनौती खारिज कर दी और निचली अदालत के बरी करने के फैसले को बरकरार रखा। अदालत के विस्तृत आदेश से अपील खारिज करने के कारण और स्पष्ट होंगे।

रिपुन बोरा: राजनीतिक परिचय

रिपुन बोरा असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री हैं। वे कई दशकों से असम की राजनीति में एक सक्रिय और महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब असम में राजनीतिक और न्यायिक मामले अक्सर राज्य की सुर्खियों में रहते हैं।

क्या होगा आगे

गुवाहाटी हाईकोर्ट के इस आदेश के साथ अब यह मामला निचली अदालत के बरी करने के फैसले पर स्थिर हो गया है। CBI के पास सर्वोच्च न्यायालय में आगे अपील करने का विकल्प कानूनन उपलब्ध है, हालांकि अभी तक ऐसी किसी मंशा की घोषणा नहीं की गई है। यह मामला असम के उन दीर्घकालिक लंबित आपराधिक प्रकरणों में शामिल रहा है, जो वर्षों तक जांच और न्यायिक प्रक्रिया के विभिन्न चरणों से गुज़रते रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

और अब हाईकोर्ट ने भी उसी निष्कर्ष को मान्यता दी है। डेनियल टॉपनो जैसे समुदाय नेताओं से जुड़े मामलों में न्याय की दीर्घ प्रतीक्षा असम के चाय बागान समुदाय के लिए एक बड़ा प्रश्न बनी रहती है। CBI के पास सर्वोच्च न्यायालय में जाने का विकल्प है, लेकिन साक्ष्य की मौजूदा स्थिति देखते हुए उसकी संभावना और सफलता दोनों अनिश्चित हैं।
RashtraPress
22 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने रिपुन बोरा के मामले में क्या फैसला दिया?
गुवाहाटी हाईकोर्ट ने 22 सितंबर 2026 को CBI की अपील खारिज करते हुए रिपुन बोरा को बरी करने के निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा। इससे बोरा को इस लंबे चले आ रहे मामले में बड़ी कानूनी राहत मिली है।
डेनियल टॉपनो हत्याकांड क्या है?
यह मामला सितंबर 2000 में असम के गोहपुर क्षेत्र में चाय बागान समुदाय के नेता डेनियल टॉपनो की हत्या से जुड़ा है। CBI ने 2001 में जांच अपने हाथ में ली और रिपुन बोरा समेत कई लोगों को आरोपी बनाया।
निचली अदालत ने रिपुन बोरा को कब और क्यों बरी किया था?
कामरूप जिला एवं सत्र न्यायालय ने फरवरी 2014 में रिपुन बोरा और पुलिन फुकन को बरी किया था। अदालत ने पाया कि CBI द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य आरोप सिद्ध करने के लिए अपर्याप्त थे।
क्या CBI इस फैसले के खिलाफ आगे अपील कर सकती है?
हाईकोर्ट के फैसले के बाद CBI के पास सर्वोच्च न्यायालय में अपील करने का कानूनी विकल्प उपलब्ध है। हालांकि अभी तक CBI की ओर से ऐसी किसी मंशा की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
राष्ट्र प्रेस
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