14 अक्टूबर 2026
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गहलोत का केंद्र पर हमला: 'देश में लोकतंत्र खतरे में, अमित शाह और शेखावत के बयान निंदनीय'

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गहलोत का केंद्र पर हमला: 'देश में लोकतंत्र खतरे में, अमित शाह और शेखावत के बयान निंदनीय'

सारांश

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बीकानेर में दोहरा मोर्चा खोला — एक तरफ अमित शाह के 2029 वाले दावे को 'बेमानी' बताया, दूसरी तरफ शेखावत की 'चिट्ठी लिखना काफी है' वाली टिप्पणी को गैरज़िम्मेदाराना करार दिया। बंगाल में 29 लाख वोट हटाने का आरोप और सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी — गहलोत ने लोकतंत्र के सवाल को केंद्र में रखा।

मुख्य बातें

पूर्व CM अशोक गहलोत ने 14 अक्टूबर 2026 को बीकानेर में केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला।
उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह के 2029 लोकसभा चुनाव संबंधी बयान को खारिज करते हुए कहा कि मोदी सरकार 'निश्चित रूप से सत्ता से बाहर जाएगी।' गहलोत ने बंगाल में 29 लाख वोट हटाए जाने का आरोप लगाया और चुनाव आयोग की एसआईआर प्रक्रिया पर सवाल उठाए।
केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के 'चिट्ठी लिखना काफी है' वाले बयान को 'मामले से पल्ला झाड़ना' बताया।
गहलोत ने कहा कि उन्होंने जोधपुर में सांसद के रूप में 20 साल तक सूखाग्रस्त क्षेत्रों का व्यक्तिगत दौरा किया।

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 को बीकानेर में केंद्रीय मंत्रियों के बयानों पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि देश में स्थिति अत्यंत गंभीर है और लोकतंत्र को बचाने की ज़रूरत है। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत — दोनों के बयानों को एक-एक कर खारिज किया।

अमित शाह के बयान पर गहलोत का पलटवार

गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में दावा किया था कि कांग्रेस को 2029 के लोकसभा चुनावों में लगातार चौथी हार का सामना करना पड़ेगा। साथ ही उन्होंने मतदाता सूची के विशेष सारांश पुनरीक्षण (एसआईआर) पर विपक्ष के विरोध की भी आलोचना की थी।

इस पर गहलोत ने कहा, 'उनके बयानों का क्या मतलब है? हम अमित शाह के बयान को गंभीरता से क्यों लें? जहाँ तक मोदी सरकार की बात है, इस बार, अगली बार, वे निश्चित रूप से सत्ता से बाहर जाने वाले हैं। इसे तय मान लीजिए, इसे गारंटी समझिए।'

गहलोत ने चुनाव आयोग की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि बंगाल में 29 लाख वोट हटाए गए। उन्होंने कहा, 'भारत के चुनाव आयोग का रवैया — एसआईआर करना, वोट हटाना — यह चिंताजनक है। सर्वोच्च न्यायालय ने भी टिप्पणी की कि 'अगर इस बार नहीं, तो अगली बार वोट देंगे' — यह इतनी कठोर, कड़वी और विचारहीन टिप्पणी थी कि देश के लोग इसे कभी नहीं भूल पाएंगे।'

शेखावत के सूखे वाले बयान पर कड़ी निंदा

केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कथित तौर पर कहा था कि राजस्थान में सूखे की गंभीर स्थिति के बारे में संबंधित अधिकारियों को चिट्ठी लिख देना ही पर्याप्त कदम है।

गहलोत ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा, 'ऐसा लगता है जैसे लंबे समय से सूखे के हालात हैं और अब वे कह रहे हैं कि उन्होंने चिट्ठी लिखी है — यह मामले से पल्ला झाड़ लेना है।' उन्होंने कहा कि एक केंद्रीय मंत्री के लिए यह कहना कि 'चिट्ठी लिखना काफी है', बेहद अपर्याप्त और गैरज़िम्मेदाराना रवैया है।

गहलोत ने शेखावत को सुझाव दिया कि उन्हें व्यक्तिगत रूप से सूखाग्रस्त इलाकों का दौरा करना चाहिए। उन्होंने अपना उदाहरण देते हुए कहा, 'मैंने व्यक्तिगत रूप से, जब मैं सांसद था, जोधपुर में उनकी जगह पर 20 साल तक दौरा किया है।'

गहलोत की मुख्य चिंताएँ

गहलोत के इस संबोधन में तीन मुद्दे केंद्र में रहे — केंद्र सरकार का कथित लोकतांत्रिक संस्थाओं पर दबाव, मतदाता सूची से नाम हटाने का मुद्दा, और राजस्थान में सूखे की स्थिति पर केंद्र की कथित उदासीनता। गौरतलब है कि राजस्थान में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) और विपक्षी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के बीच 2024 से ही तीव्र राजनीतिक तनाव बना हुआ है।

यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों का विरोध तेज हो रहा है।

राजनीतिक पृष्ठभूमि

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत राजस्थान कांग्रेस के सबसे वरिष्ठ नेताओं में से एक हैं और तीन बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं। दिसंबर 2023 में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की हार के बाद वे विपक्ष की भूमिका में हैं। उनके बयान राष्ट्रीय राजनीतिक बहस में कांग्रेस की आक्रामक रणनीति का हिस्सा माने जा रहे हैं।

आने वाले दिनों में यह देखना होगा कि केंद्र सरकार गहलोत के आरोपों पर किस तरह की प्रतिक्रिया देती है, और क्या सूखा राहत के मुद्दे पर राजस्थान को कोई ठोस आश्वासन मिलता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि 2029 की तैयारी में कांग्रेस की आक्रामक रणनीति का संकेत है — जहाँ लोकतांत्रिक संस्थाओं पर सवाल उठाना विपक्ष का मुख्य हथियार बनता जा रहा है। हालाँकि बंगाल में '29 लाख वोट हटाने' जैसे आरोप गंभीर हैं, लेकिन इनकी स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है — ऐसे दावों को बिना सत्यापन के दोहराना मीडिया के लिए भी जोखिम भरा है। शेखावत वाला मुद्दा ज़्यादा ठोस है: राजस्थान के सूखाग्रस्त जिलों में ज़मीनी राहत की माँग और केंद्र की प्रतिक्रिया के बीच की खाई को पाटने की जवाबदेही तय होनी चाहिए — चिट्ठी से नहीं, दौरे और संसाधनों से।
RashtraPress
14 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अशोक गहलोत ने बीकानेर में क्या कहा?
अशोक गहलोत ने 14 अक्टूबर 2026 को बीकानेर में कहा कि देश में लोकतंत्र खतरे में है और केंद्र सरकार संस्थाओं पर दबाव बना रही है। उन्होंने अमित शाह के 2029 चुनाव संबंधी बयान को बेमानी बताया और गजेंद्र सिंह शेखावत के सूखे पर दिए गए बयान की कड़ी निंदा की।
गहलोत ने अमित शाह पर क्या आरोप लगाए?
गहलोत ने कहा कि अमित शाह के बयानों को गंभीरता से लेने की ज़रूरत नहीं और मोदी सरकार अगले चुनाव में सत्ता से बाहर होगी। उन्होंने चुनाव आयोग की एसआईआर प्रक्रिया और बंगाल में कथित तौर पर 29 लाख वोट हटाए जाने का भी मुद्दा उठाया।
गजेंद्र सिंह शेखावत के किस बयान की निंदा की गई?
केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कथित तौर पर कहा था कि राजस्थान में सूखे की स्थिति के बारे में चिट्ठी लिख देना पर्याप्त कदम है। गहलोत ने इसे 'मामले से पल्ला झाड़ना' बताते हुए कहा कि मंत्री को सूखाग्रस्त इलाकों का व्यक्तिगत दौरा करना चाहिए।
राजस्थान में सूखे की स्थिति पर विवाद क्या है?
राजस्थान के कई जिलों में गंभीर सूखे की स्थिति बताई जा रही है। विपक्षी कांग्रेस का आरोप है कि केंद्र सरकार ने राहत के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए और केंद्रीय मंत्री की 'चिट्ठी लिखने' वाली प्रतिक्रिया इस गंभीरता को नहीं दर्शाती।
क्या गहलोत के आरोपों पर केंद्र सरकार ने कोई जवाब दिया?
फिलहाल केंद्र सरकार या भारतीय जनता पार्टी की ओर से गहलोत के बयानों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आने वाले दिनों में BJP का पलटवार अपेक्षित है।
राष्ट्र प्रेस
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