19 सितंबर 2026
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जनरल धीरज सेठ ने सेंट पीटर्सबर्ग आर्टिलरी अकादमी का दौरा किया, भारत-रूस सैन्य सहयोग को मिली नई धार

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जनरल धीरज सेठ ने सेंट पीटर्सबर्ग आर्टिलरी अकादमी का दौरा किया, भारत-रूस सैन्य सहयोग को मिली नई धार

सारांश

भारतीय थल सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ की रूस यात्रा सिर्फ औपचारिक नहीं थी — सेंट पीटर्सबर्ग की आर्टिलरी अकादमी में तोपखाने के आधुनिकीकरण पर सीधी बातचीत और पीटर एंड पॉल फोर्ट्रेस में तोप दागने के सम्मान ने भारत-रूस रक्षा साझेदारी को नई प्रतीकात्मक और व्यावहारिक गहराई दी।

मुख्य बातें

जनरल धीरज सेठ ने सेंट पीटर्सबर्ग स्थित मिखाइलोव्स्काया मिलिट्री आर्टिलरी अकादमी का दौरा किया और संकाय से तोपखाने के आधुनिकीकरण पर चर्चा की।
जनरल सेठ को पीटर एंड पॉल फोर्ट्रेस में पारंपरिक तोप दागने का विशेष सम्मान दिया गया।
मास्को में रशियन लैंड फोर्सेस लीडरशिप के साथ सैन्य सहयोग एवं प्रशिक्षण पर विस्तृत वार्ता हुई।
नेशनल डिफेंस कंट्रोल सेंटर और अनाम सैनिकों के स्मृति स्थल का दौरा भी यात्रा कार्यक्रम में शामिल रहा।
यह तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा भारत-रूस के दीर्घकालिक रक्षा साझेदारी को संस्थागत स्तर पर मज़बूत करने के उद्देश्य से की गई।

भारतीय थल सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने रूस की तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा के दौरान 19 सितंबर 2026 को सेंट पीटर्सबर्ग स्थित ऐतिहासिक मिखाइलोव्स्काया मिलिट्री आर्टिलरी अकादमी का दौरा किया, जहाँ उन्होंने संकाय सदस्यों के साथ तोपखाने के आधुनिकीकरण और आधुनिक प्रशिक्षण पद्धतियों पर विस्तृत चर्चा की। यह दौरा भारत-रूस के दीर्घकालिक रक्षा सहयोग को संस्थागत स्तर पर और मज़बूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

अकादमी दौरे के प्रमुख बिंदु

मिखाइलोव्स्काया मिलिट्री आर्टिलरी अकादमी रूस के सबसे प्रतिष्ठित सैन्य प्रशिक्षण संस्थानों में से एक है। जनरल सेठ ने अकादमी के वरिष्ठ संकाय सदस्यों के साथ बैठक में आधुनिक युद्धकला की ज़रूरतों के अनुसार आर्टिलरी को विकसित करने, अत्याधुनिक तकनीकों को प्रशिक्षण में समाहित करने और सर्वोत्तम प्रक्रियाओं के आदान-प्रदान पर जोर दिया।

भारतीय सेना के आधिकारिक बयान के अनुसार, इस संवाद में 'सैन्य प्रशिक्षण में अनुभव साझा करना, सर्वोत्तम प्रक्रियाओं से सीखना और संस्थागत आदान-प्रदान को मज़बूत करना' प्रमुख विषय रहे।

पीटर एंड पॉल फोर्ट्रेस में विशेष सम्मान

भारतीय सेना के अनुसार, यात्रा के दौरान जनरल धीरज सेठ को सेंट पीटर्सबर्ग के ऐतिहासिक पीटर एंड पॉल फोर्ट्रेस में पारंपरिक तोप दागने का विशेष सम्मान प्रदान किया गया। यह सम्मान रूस में उच्च-स्तरीय सैन्य अतिथियों को दिया जाने वाला एक प्रतिष्ठित रिवाज़ है, जो दोनों देशों के बीच संबंधों की गहराई को दर्शाता है।

यात्रा के अन्य प्रमुख कार्यक्रम

सेंट पीटर्सबर्ग दौरे से पहले मास्को में भी जनरल सेठ की व्यस्त कार्यसूची रही। उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया और उन्होंने अनाम सैनिकों के स्मृति स्थल पर श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके अलावा उन्होंने रशियन लैंड फोर्सेस लीडरशिप के साथ सैन्य सहयोग एवं प्रशिक्षण पर विस्तृत चर्चा की तथा नेशनल डिफेंस कंट्रोल सेंटर का दौरा किया।

भारत-रूस रक्षा सहयोग का व्यापक संदर्भ

गौरतलब है कि भारत और रूस के बीच दशकों पुराना रक्षा साझेदारी का इतिहास रहा है। भारतीय सेना के पास बड़ी संख्या में रूसी मूल के हथियार और उपकरण हैं, और तोपखाने के आधुनिकीकरण में भी रूसी तकनीक की उल्लेखनीय भूमिका रही है। यह यात्रा ऐसे समय में हुई है जब भारत अपनी आर्टिलरी क्षमताओं को 'मेक इन इंडिया' के तहत स्वदेशीकरण की ओर ले जाने का प्रयास कर रहा है।

भारतीय सेना के अनुसार, 'ऐसे संस्थागत संपर्क दोनों देशों की सेनाओं के बीच पेशेवर संबंधों को मज़बूत करने और सैन्य प्रशिक्षण तथा आधुनिकीकरण के क्षेत्र में अनुभव साझा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।'

आगे क्या होगा

जनरल सेठ की इस यात्रा से उभरे संस्थागत संपर्क आने वाले समय में संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रमों और तकनीकी आदान-प्रदान का आधार बन सकते हैं। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के उच्च-स्तरीय दौरे द्विपक्षीय सैन्य समझ को व्यावहारिक धरातल पर मज़बूत करते हैं और भविष्य की रक्षा खरीद एवं प्रशिक्षण साझेदारी की दिशा तय करने में सहायक होते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि अकादमी-स्तर की यह बातचीत भारतीय आर्टिलरी की परिचालन क्षमता पर मापनीय प्रभाव डालती है या नहीं।
RashtraPress
19 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जनरल धीरज सेठ की रूस यात्रा का उद्देश्य क्या था?
जनरल धीरज सेठ तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर रूस गए, जिसका मुख्य उद्देश्य भारत-रूस के बीच सैन्य प्रशिक्षण सहयोग को मज़बूत करना और तोपखाने के आधुनिकीकरण से जुड़े अनुभव साझा करना था। मास्को और सेंट पीटर्सबर्ग दोनों में उच्च-स्तरीय सैन्य बैठकें आयोजित हुईं।
मिखाइलोव्स्काया मिलिट्री आर्टिलरी अकादमी में क्या चर्चा हुई?
अकादमी के संकाय सदस्यों के साथ बैठक में आधुनिक युद्धकला की ज़रूरतों के अनुसार आर्टिलरी के विकास, प्रशिक्षण पद्धतियों में नई तकनीकों को अपनाने और सर्वोत्तम सैन्य प्रक्रियाओं के आदान-प्रदान पर चर्चा हुई। यह संस्थागत संवाद दोनों देशों के बीच पेशेवर सैन्य संबंधों को गहरा करने का हिस्सा है।
जनरल सेठ को पीटर एंड पॉल फोर्ट्रेस में क्या सम्मान मिला?
भारतीय सेना के अनुसार, जनरल धीरज सेठ को सेंट पीटर्सबर्ग के ऐतिहासिक पीटर एंड पॉल फोर्ट्रेस में पारंपरिक तोप दागने का विशेष सम्मान दिया गया। रूस में यह सम्मान उच्च-स्तरीय विदेशी सैन्य अतिथियों को दिए जाने वाले महत्वपूर्ण प्रोटोकॉल का हिस्सा है।
इस यात्रा में मास्को में कौन-से कार्यक्रम हुए?
मास्को में जनरल सेठ को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया, उन्होंने अनाम सैनिकों के स्मृति स्थल पर श्रद्धांजलि अर्पित की, रशियन लैंड फोर्सेस लीडरशिप के साथ सैन्य सहयोग पर चर्चा हुई और नेशनल डिफेंस कंट्रोल सेंटर का दौरा किया गया।
भारत-रूस सैन्य सहयोग क्यों महत्वपूर्ण है?
भारत और रूस के बीच दशकों पुराना रक्षा साझेदारी का इतिहास है, जिसमें तोपखाने सहित अनेक सैन्य उपकरण रूसी मूल के हैं। संस्थागत सैन्य आदान-प्रदान प्रशिक्षण, आधुनिकीकरण और भविष्य की रक्षा साझेदारी की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाता है।
राष्ट्र प्रेस
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