गाजियाबाद में जिम संचालकों के लिए आईडी कार्ड अनिवार्य, भाजपा विधायक नंद किशोर गुर्जर ने किया स्वागत
सारांश
मुख्य बातें
गाजियाबाद जिला प्रशासन ने 13 जून 2026 को एक महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए जिले के सभी जिम संचालकों के लिए आईडी कार्ड धारण करना अनिवार्य कर दिया है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि बिना आईडी कार्ड के किसी भी जिम का संचालन स्वीकार्य नहीं होगा। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक नंद किशोर गुर्जर ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे जरूरी कदम बताया।
मुख्य घटनाक्रम
विधायक नंद किशोर गुर्जर ने शनिवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि गाजियाबाद में कुछ जिम संचालक अपनी असली पहचान छिपाकर जिम चला रहे थे और इसके ज़रिए लड़कियों को निशाना बनाते थे। उन्होंने कहा, 'कैसे किसी को जिहादी तंत्र में शामिल करना है, इसके लिए इन लोगों ने बाकायदा पूरी रूपरेखा निर्धारित कर ली थी।' उनके अनुसार, इसी रूपरेखा को देखते हुए जिला प्रशासन ने यह आदेश जारी किया।
विधायक की दलीलें
गुर्जर ने कहा कि ऐसे मामले सामने आए हैं जहाँ कुछ लोग अपनी असली पहचान छिपाते हुए जिम चलाते हैं और बाद में लड़कियों को अपने जाल में फँसाते हैं। उन्होंने कहा, 'अगर आप हिंदू हैं, तो आखिर ऐसी क्या मजबूरी है कि आपको अपनी पहचान छिपानी पड़ रही है — आपको खुलकर अपनी पहचान ज़ाहिर करनी चाहिए।' उन्होंने इंदौर में एक युवती के साथ हुई कथित घटना का भी उल्लेख किया, जिसे वे इस आदेश की ज़रूरत की पृष्ठभूमि के रूप में प्रस्तुत करते हैं।
आदेश का व्यावहारिक असर
विधायक के अनुसार, अब गाजियाबाद के सभी जिम संचालकों को गले में आईडी कार्ड डालकर काम करना होगा। बिना आईडी कार्ड के जिम संचालन की अनुमति नहीं दी जाएगी। गुर्जर ने स्पष्ट किया कि 'मामला यहाँ पर धर्म का नहीं है, यहाँ पर गंभीरता बरतने का है — अब किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं होगी।'
विधायक की चेतावनी
गुर्जर ने कहा कि जो भी व्यक्ति इस तरह के नेटवर्क में संलिप्त पाया जाएगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा, 'यह एक ऐसी कार्रवाई होगी कि उसकी आने वाली सात पीढ़ियाँ भी याद रखेंगी।' उन्होंने यह भी कहा कि गाजियाबाद जिला प्रशासन पहले से ही बड़े अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए जाना जाता है।
आगे क्या
जिला प्रशासन की ओर से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि आदेश का पालन सख्ती से हो। जिम संचालकों को आईडी कार्ड की अनिवार्यता के तहत पंजीकरण कराना होगा। यह देखना होगा कि प्रशासन इस आदेश के क्रियान्वयन की निगरानी कैसे करता है और उल्लंघन पर क्या दंडात्मक प्रावधान लागू होंगे।