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शामली जिम जिहाद कांड के बाद ट्रेनरों के सत्यापन पर सरकार सख्त, मौलाना कासमी ने किया स्वागत

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शामली जिम जिहाद कांड के बाद ट्रेनरों के सत्यापन पर सरकार सख्त, मौलाना कासमी ने किया स्वागत

सारांश

शामली में कथित जिम जिहाद और धर्मांतरण के मामले के बाद UP सरकार ने जिम ट्रेनरों के अनिवार्य सत्यापन का आदेश दिया है। मौलाना मुफ्ती मोहम्मद साजिद कासमी ने इस कदम को स्वागतयोग्य बताते हुए कहा कि स्वास्थ्य से जुड़े हर पेशे में योग्यता और पहचान की जाँच अनिवार्य होनी चाहिए।

मुख्य बातें

उत्तर प्रदेश सरकार ने शामली के कथित जिम जिहाद और धर्मांतरण मामले के बाद जिम ट्रेनरों और संचालकों के अनिवार्य सत्यापन के निर्देश जारी किए।
मौलाना मुफ्ती मोहम्मद साजिद कासमी ने सरकार के इस फैसले को स्वागतयोग्य बताया और कहा 'देर आए, दुरुस्त आए'।
अब जिम ट्रेनरों का आधार कार्ड या अन्य सरकारी पहचान पत्र सत्यापित होना और पंजीकरण अनिवार्य होगा।
मौलाना ने कहा कि जिम भी स्वास्थ्य से जुड़ा क्षेत्र है, इसलिए 'नीम हकीम खतरा-ए-जान' की तर्ज पर अयोग्य ट्रेनरों पर रोक जरूरी है।
इससे पहले जिम और फिटनेस उद्योग में ट्रेनरों की योग्यता या पहचान की कोई केंद्रीकृत सत्यापन व्यवस्था नहीं थी।

उत्तर प्रदेश के शामली में कथित 'जिम जिहाद' और धर्मांतरण के मामले के सामने आने के बाद राज्य सरकार ने जिम ट्रेनरों और संचालकों की पहचान एवं योग्यता की अनिवार्य जाँच के लिए सख्त निर्देश जारी किए हैं। इस फैसले को मौलाना मुफ्ती मोहम्मद साजिद कासमी ने स्वागतयोग्य बताते हुए कहा कि जनता की सुरक्षा के लिए प्रमाणित और स्पष्ट पहचान वाले पेशेवरों की जरूरत हर क्षेत्र में होती है।

मुख्य घटनाक्रम

शामली में सामने आई घटना के बाद सरकार ने निर्देश दिए हैं कि जिम चलाने या प्रशिक्षण देने वाले हर व्यक्ति का आधार कार्ड या अन्य सरकारी पहचान पत्र पहले से सत्यापित होना चाहिए। इसके साथ ही उनका पंजीकरण अनिवार्य किया गया है और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि वे अपने कार्य के लिए योग्य हैं। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में जिम और फिटनेस उद्योग में अप्रशिक्षित व्यक्तियों की भूमिका को लेकर सवाल उठते रहे हैं।

मौलाना कासमी का बयान

मौलाना मुफ्ती मोहम्मद साजिद कासमी ने कहा, 'मैं समझता हूँ कि कोई भी कार्य हो रहा है तो उससे जुड़े व्यक्ति की एक स्पष्ट पहचान होनी चाहिए। उसका पंजीकरण होना चाहिए और उसका आधार कार्ड या अन्य पहचान पत्र जाँच लिया जाना चाहिए। यह भी देखा जाना चाहिए कि वह उस कार्य के लिए योग्य है या नहीं।'

उन्होंने डॉक्टर के उदाहरण से बात को स्पष्ट करते हुए कहा कि यदि किसी के पास आवश्यक डिग्री नहीं है, तो उसे न डॉक्टर कहलाने का अधिकार है और न ही इलाज करने का। उन्होंने कहा कि इस्लाम सहित सभी धर्मों में योग्यता और ज्ञान को महत्व दिया गया है — इसीलिए कहा जाता है, 'नीम हकीम खतरा-ए-जान'

जिम और स्वास्थ्य का संबंध

मौलाना कासमी ने कहा कि जिम का मामला भी स्वास्थ्य से सीधे जुड़ा है। उनके अनुसार यदि कोई ट्रेनर अपनी पहचान के साथ आए, उसके दस्तावेज पहले से सत्यापित हों और वह प्रशिक्षण देने के लिए सक्षम माना जाए, तो यह सबके हित में है। गौरतलब है कि फिटनेस उद्योग में अब तक ऐसी कोई केंद्रीकृत या राज्यस्तरीय सत्यापन व्यवस्था नहीं थी।

सरकार के कदम पर प्रतिक्रिया

मौलाना ने इस आदेश के बारे में कहा, 'पहले ऐसी कोई व्यवस्था नहीं थी। लेकिन अगर अब यह कदम उठाया गया है तो देर आए, दुरुस्त आए। यह पहल भी अच्छी है और इसका स्वागत किया जाना चाहिए।' यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि एक मुस्लिम धर्मगुरु द्वारा इस कदम का समर्थन सामाजिक सहमति का संकेत देता है।

आगे क्या

राज्य सरकार के इन निर्देशों के बाद जिम संचालकों को अपने ट्रेनरों के दस्तावेज प्रशासन के समक्ष प्रस्तुत करने होंगे। यह देखना होगा कि क्या यह नीति केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित रहती है या अन्य राज्य भी इसी तर्ज पर कदम उठाते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी अब तक किसी ठोस नियामक ढाँचे के बिना चल रहा था। मौलाना कासमी का समर्थन राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह आदेश केवल एक प्रतिक्रियात्मक कदम है या इसे एक स्थायी नीति के रूप में लागू किया जाएगा। अब तक ऐसे आदेश घटनाओं के बाद जारी होते हैं और धीरे-धीरे ठंडे बस्ते में चले जाते हैं — जब तक क्रियान्वयन तंत्र और जवाबदेही स्पष्ट नहीं होगी, यह कदम भी उसी सूची में जुड़ने का जोखिम उठाता है।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शामली जिम जिहाद मामला क्या है?
उत्तर प्रदेश के शामली में एक जिम ट्रेनर पर कथित तौर पर धर्मांतरण से जुड़ी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप लगे, जिसे 'जिम जिहाद' कहा गया। इस मामले के सामने आने के बाद राज्य सरकार ने जिम ट्रेनरों और संचालकों की पहचान एवं योग्यता की जाँच के लिए सख्त निर्देश जारी किए।
UP सरकार के नए जिम ट्रेनर सत्यापन नियम क्या हैं?
सरकार के निर्देशों के अनुसार जिम ट्रेनरों और संचालकों का आधार कार्ड या अन्य सरकारी पहचान पत्र पहले से सत्यापित होना अनिवार्य होगा। उनका पंजीकरण भी जरूरी होगा और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि वे प्रशिक्षण देने के लिए योग्य हैं।
मौलाना कासमी ने जिम ट्रेनर सत्यापन पर क्या कहा?
मौलाना मुफ्ती मोहम्मद साजिद कासमी ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया और कहा कि जिम भी स्वास्थ्य से जुड़ा क्षेत्र है, इसलिए ट्रेनरों की पहचान और योग्यता की जाँच जरूरी है। उन्होंने कहा 'देर आए, दुरुस्त आए' और इसे एक सकारात्मक पहल बताया।
क्या पहले जिम ट्रेनरों के लिए कोई सत्यापन व्यवस्था थी?
नहीं, इससे पहले जिम और फिटनेस उद्योग में ट्रेनरों की पहचान या योग्यता की जाँच के लिए कोई केंद्रीकृत या राज्यस्तरीय अनिवार्य व्यवस्था नहीं थी। शामली की घटना के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने इस खामी को दूर करने के लिए ये निर्देश जारी किए हैं।
इस आदेश का आम जनता पर क्या असर होगा?
इस आदेश के लागू होने से जिम जाने वाले लोगों को प्रमाणित और पंजीकृत ट्रेनरों से ही प्रशिक्षण मिलेगा, जिससे स्वास्थ्य जोखिम कम होगा। साथ ही जिम संचालकों को अपने ट्रेनरों के दस्तावेज प्रशासन के समक्ष प्रस्तुत करने होंगे।
राष्ट्र प्रेस
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