घोंघा नदी में बहे तीन मासूम: बिलासपुर के समडील गांव में स्कूली बच्चों के शव बरामद
सारांश
मुख्य बातें
बिलासपुर जिले के तखतपुर क्षेत्र स्थित ग्राम पंचायत समडील में 23 अगस्त को एक दिल दहला देने वाली त्रासदी सामने आई, जब सरकारी स्कूल से छुट्टी के बाद घर लौट रहे तीन बच्चे घोंघा नदी पार करते समय अचानक उठे तेज बहाव में बह गए। घंटों चले सर्च ऑपरेशन के बाद तीनों बच्चों के शव बरामद कर लिए गए हैं।
हादसे का घटनाक्रम
मृतक बच्चों की पहचान 7 वर्षीय अनमोल जायसवाल, 9 वर्षीय स्तुति जायसवाल और 8 वर्षीय शिक्षा जायसवाल के रूप में हुई है — तीनों समडील गांव के निवासी थे। अनमोल और स्तुति के पिता भुनेश्वर जायसवाल हैं, जबकि शिक्षा के पिता विजय जायसवाल हैं।
बताया जा रहा है कि सुबह स्कूल जाते समय नदी में पानी कम था, इसलिए बच्चे खेलते-खेलते नदी पार कर गए थे। स्कूल से लौटते वक्त वे उसी रास्ते से वापस आने लगे, लेकिन तब तक नदी का जलस्तर काफी बढ़ चुका था। अचानक आए तेज बहाव ने तीनों को अपनी चपेट में ले लिया। गौरतलब है कि स्कूल जाने के लिए एक अलग सुरक्षित रास्ता भी उपलब्ध है।
सर्च ऑपरेशन और बचाव कार्य
हादसे की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण नदी किनारे पहुंचे और तलाश शुरू कर दी। तखतपुर पुलिस की टीम भी मौके पर पहुंची और ग्रामीणों के साथ मिलकर कई घंटों तक सर्च ऑपरेशन चलाया। थाना प्रभारी अवनीश पासवान ने बताया कि नदी में पानी कम था, लेकिन बच्चे तेज बहाव की चपेट में आ गए। उन्होंने यह भी बताया कि एसडीआरएफ (SDRF) की टीम को भी सर्च ऑपरेशन के लिए बुलाया गया था।
प्रारंभिक खोज में एक बच्चे का शव मिला, जबकि दो अन्य उस समय लापता थे। बाद में चलाए गए विस्तृत अभियान में तीनों के शव बरामद कर लिए गए।
गांव में पसरा मातम
इस दुखद हादसे के बाद समडील गांव में शोक की लहर है। तीनों बच्चों के परिजन गहरे सदमे में हैं। ग्रामीण भी नदी किनारे डटे रहे और बचाव दल के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहे। यह हादसा ऐसे समय में हुआ है जब मानसून के कारण छत्तीसगढ़ की नदियों में जलस्तर अप्रत्याशित रूप से बढ़ता-घटता रहता है।
आम जनता पर असर और सुरक्षा का सवाल
यह घटना ग्रामीण इलाकों में स्कूली बच्चों की सुरक्षा और नदी पार करने के वैकल्पिक मार्गों की उपलब्धता पर गंभीर सवाल खड़े करती है। आलोचकों का कहना है कि जब नदी पार करने का सुरक्षित रास्ता मौजूद था, तो बच्चों को उसी का उपयोग करने के लिए जागरूक किया जाना चाहिए था। मानसून के मौसम में नदियों के अचानक उफान से बच्चों को सुरक्षित रखना प्रशासन और अभिभावकों दोनों की साझा जिम्मेदारी है। आगे की जांच और परिवारों को राहत देने की प्रक्रिया जारी है।