23 अगस्त 2026
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घोंघा नदी में बहे तीन मासूम: बिलासपुर के समडील गांव में स्कूली बच्चों के शव बरामद

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घोंघा नदी में बहे तीन मासूम: बिलासपुर के समडील गांव में स्कूली बच्चों के शव बरामद

सारांश

बिलासपुर के समडील गांव में स्कूल से लौट रहे तीन बच्चे — 7, 8 और 9 साल के — घोंघा नदी के अचानक उठे बहाव में बह गए। घंटों के सर्च ऑपरेशन के बाद तीनों के शव बरामद हुए। मानसून में नदियों के अप्रत्याशित उफान ने एक बार फिर ग्रामीण बच्चों की सुरक्षा का सवाल उठाया।

मुख्य बातें

23 अगस्त को बिलासपुर जिले के समडील गांव में घोंघा नदी पार करते समय तीन स्कूली बच्चे तेज बहाव में बह गए।
मृतकों की पहचान 7 वर्षीय अनमोल जायसवाल , 9 वर्षीय स्तुति जायसवाल और 8 वर्षीय शिक्षा जायसवाल के रूप में हुई।
सुबह नदी में पानी कम था, लेकिन दोपहर तक जलस्तर बढ़ जाने से बच्चे बहाव की चपेट में आए।
पुलिस और ग्रामीणों के घंटों के सर्च ऑपरेशन के बाद तीनों के शव बरामद किए गए।
थाना प्रभारी अवनीश पासवान के नेतृत्व में एसडीआरएफ (SDRF) टीम ने बचाव अभियान में भाग लिया।
घटना ने मानसून के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूली बच्चों की नदी सुरक्षा पर सवाल उठाए।

बिलासपुर जिले के तखतपुर क्षेत्र स्थित ग्राम पंचायत समडील में 23 अगस्त को एक दिल दहला देने वाली त्रासदी सामने आई, जब सरकारी स्कूल से छुट्टी के बाद घर लौट रहे तीन बच्चे घोंघा नदी पार करते समय अचानक उठे तेज बहाव में बह गए। घंटों चले सर्च ऑपरेशन के बाद तीनों बच्चों के शव बरामद कर लिए गए हैं।

हादसे का घटनाक्रम

मृतक बच्चों की पहचान 7 वर्षीय अनमोल जायसवाल, 9 वर्षीय स्तुति जायसवाल और 8 वर्षीय शिक्षा जायसवाल के रूप में हुई है — तीनों समडील गांव के निवासी थे। अनमोल और स्तुति के पिता भुनेश्वर जायसवाल हैं, जबकि शिक्षा के पिता विजय जायसवाल हैं।

बताया जा रहा है कि सुबह स्कूल जाते समय नदी में पानी कम था, इसलिए बच्चे खेलते-खेलते नदी पार कर गए थे। स्कूल से लौटते वक्त वे उसी रास्ते से वापस आने लगे, लेकिन तब तक नदी का जलस्तर काफी बढ़ चुका था। अचानक आए तेज बहाव ने तीनों को अपनी चपेट में ले लिया। गौरतलब है कि स्कूल जाने के लिए एक अलग सुरक्षित रास्ता भी उपलब्ध है।

सर्च ऑपरेशन और बचाव कार्य

हादसे की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण नदी किनारे पहुंचे और तलाश शुरू कर दी। तखतपुर पुलिस की टीम भी मौके पर पहुंची और ग्रामीणों के साथ मिलकर कई घंटों तक सर्च ऑपरेशन चलाया। थाना प्रभारी अवनीश पासवान ने बताया कि नदी में पानी कम था, लेकिन बच्चे तेज बहाव की चपेट में आ गए। उन्होंने यह भी बताया कि एसडीआरएफ (SDRF) की टीम को भी सर्च ऑपरेशन के लिए बुलाया गया था।

प्रारंभिक खोज में एक बच्चे का शव मिला, जबकि दो अन्य उस समय लापता थे। बाद में चलाए गए विस्तृत अभियान में तीनों के शव बरामद कर लिए गए।

गांव में पसरा मातम

इस दुखद हादसे के बाद समडील गांव में शोक की लहर है। तीनों बच्चों के परिजन गहरे सदमे में हैं। ग्रामीण भी नदी किनारे डटे रहे और बचाव दल के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहे। यह हादसा ऐसे समय में हुआ है जब मानसून के कारण छत्तीसगढ़ की नदियों में जलस्तर अप्रत्याशित रूप से बढ़ता-घटता रहता है।

आम जनता पर असर और सुरक्षा का सवाल

यह घटना ग्रामीण इलाकों में स्कूली बच्चों की सुरक्षा और नदी पार करने के वैकल्पिक मार्गों की उपलब्धता पर गंभीर सवाल खड़े करती है। आलोचकों का कहना है कि जब नदी पार करने का सुरक्षित रास्ता मौजूद था, तो बच्चों को उसी का उपयोग करने के लिए जागरूक किया जाना चाहिए था। मानसून के मौसम में नदियों के अचानक उफान से बच्चों को सुरक्षित रखना प्रशासन और अभिभावकों दोनों की साझा जिम्मेदारी है। आगे की जांच और परिवारों को राहत देने की प्रक्रिया जारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी बच्चे नदी से गुजरे — यह दर्शाता है कि जागरूकता और निगरानी दोनों की कमी है। छत्तीसगढ़ में हर साल मानसून में ऐसी घटनाएं दोहराई जाती हैं, लेकिन स्थायी समाधान — पुल निर्माण, मानसून-पूर्व सुरक्षा प्रशिक्षण, स्कूल स्तर पर अभिभावक संवाद — अभी भी प्राथमिकता सूची में नीचे हैं। तीन परिवारों का दर्द एक नीतिगत विफलता की कीमत है।
RashtraPress
23 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

घोंघा नदी हादसे में कौन से बच्चे बहे थे?
बिलासपुर के समडील गांव के तीन बच्चे — 7 वर्षीय अनमोल जायसवाल, 9 वर्षीय स्तुति जायसवाल और 8 वर्षीय शिक्षा जायसवाल — 23 अगस्त को स्कूल से लौटते समय घोंघा नदी के तेज बहाव में बह गए। तीनों के शव बाद में बरामद किए गए।
बचाव अभियान में कौन शामिल था?
थाना प्रभारी अवनीश पासवान के नेतृत्व में पुलिस टीम और बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने मिलकर कई घंटों तक सर्च ऑपरेशन चलाया। एसडीआरएफ (SDRF) की टीम को भी बचाव कार्य में लगाया गया।
मृत बच्चों के परिजन कौन हैं?
अनमोल और स्तुति जायसवाल के पिता भुनेश्वर जायसवाल हैं, जबकि शिक्षा जायसवाल के पिता विजय जायसवाल हैं। हादसे के बाद परिवारों में गहरा शोक है।
इस हादसे से क्या सबक लिया जाना चाहिए?
यह घटना मानसून के दौरान ग्रामीण इलाकों में बच्चों की नदी-सुरक्षा की गंभीर कमी को उजागर करती है। विशेषज्ञों के अनुसार, पुल निर्माण, मानसून-पूर्व सुरक्षा जागरूकता और स्कूल स्तर पर अभिभावक संवाद जैसे कदम ऐसी दुर्घटनाओं को रोकने में सहायक हो सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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