29 जून 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

गोवा के डाबोलिम में अवैध पेट्रोलियम गोदाम पर क्राइम ब्रांच का छापा, ₹1.5 करोड़ के टैंकर और ईंधन जब्त

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
गोवा के डाबोलिम में अवैध पेट्रोलियम गोदाम पर क्राइम ब्रांच का छापा, ₹1.5 करोड़ के टैंकर और ईंधन जब्त

सारांश

गोवा की क्राइम ब्रांच ने डाबोलिम में बिना लाइसेंस चल रहे पेट्रोलियम गोदाम पर छह घंटे की तलाशी में ₹1.5 करोड़ के 6 टैंकर और ईंधन जब्त किए। संचालक देवेंद्र नाइक उर्फ राजू चव्हाण पर काला बाज़ार में ईंधन बेचने का आरोप है और कई कानूनों के तहत मामला दर्ज किया गया है।

मुख्य बातें

गोवा क्राइम ब्रांच ने 28 जून 2026 को डाबोलिम में अवैध पेट्रोलियम भंडारण केंद्र पर छापा मारा।
करीब ₹1.5 करोड़ मूल्य के 6 ईंधन टैंकर और 1 टिपर ट्रक सहित पेट्रोलियम उत्पाद जब्त किए गए।
परिसर सांक्वेलिम निवासी देवेंद्र नाइक उर्फ राजू चव्हाण द्वारा कथित तौर पर संचालित था।
जब्त ईंधन को कथित तौर पर काला बाज़ार में ऊँचे दामों पर बेचा जा रहा था।
मामले में BNS धारा 287 , पेट्रोलियम अधिनियम 1934 , आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 और पर्यावरण अधिनियम 1986 के तहत केस दर्ज।
छापेमारी IOCL अधिकारियों और फॉरेंसिक विशेषज्ञों की उपस्थिति में संपन्न हुई।

गोवा पुलिस की क्राइम ब्रांच ने 28 जून 2026 को डाबोलिम क्षेत्र में अवैध रूप से संचालित एक पेट्रोलियम भंडारण केंद्र पर छापा मारकर लगभग ₹1.5 करोड़ मूल्य के ईंधन टैंकर और पेट्रोलियम उत्पाद जब्त किए। अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई विशेष गुप्त सूचना के आधार पर की गई और परिसर में किसी भी वैध लाइसेंस के बिना ज्वलनशील पेट्रोलियम पदार्थों का भंडारण किया जा रहा था।

छापेमारी का घटनाक्रम

क्राइम ब्रांच की टीम ने डाबोलिम स्थित परिसर में करीब छह घंटे तक तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान छह ईंधन टैंकरों और एक टिपर ट्रक की विस्तृत जाँच की गई। टैंकरों में ज्वलनशील पेट्रोलियम पदार्थ भरा पाया गया, जिसके नमूने एकत्र कर सील कर दिए गए।

यह कार्रवाई फॉरेंसिक विशेषज्ञों और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) के अधिकारियों की मौजूदगी में संपन्न हुई, जिससे जब्ती की प्रक्रिया में तकनीकी और कानूनी दोनों पहलुओं का ध्यान रखा गया।

मुख्य आरोपी की पहचान

प्रारंभिक जाँच में सामने आया कि यह परिसर और जब्त वाहन गोवा के सांक्वेलिम निवासी देवेंद्र नाइक उर्फ राजू चव्हाण द्वारा संचालित किए जा रहे थे। जाँच में यह भी उजागर हुआ कि यहाँ संग्रहित पेट्रोलियम उत्पादों को कथित तौर पर ऊँचे दामों पर काला बाज़ार में बेचा जा रहा था।

कानूनी उल्लंघन और सार्वजनिक खतरा

तेल विशेषज्ञों के अनुसार, इस परिसर में पेट्रोलियम उत्पादों का अवैध भंडारण पेट्रोलियम अधिनियम, 1934, आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 और पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 का उल्लंघन है। इसके अतिरिक्त, घनी आबादी के निकट ज्वलनशील पदार्थों का अनधिकृत भंडारण सार्वजनिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न कर सकता था।

दर्ज धाराएँ और आगे की जाँच

पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 287, पेट्रोलियम अधिनियम, 1934 की धारा 23, आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की धारा 3 और 7 तथा पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 की धारा 8 और 15 के तहत मामला दर्ज कर लिया है। सभी जब्त वाहन, टैंकर और अन्य साक्ष्य आगे की जाँच के लिए सुरक्षित रखे गए हैं।

गौरतलब है कि गोवा में ईंधन की तस्करी और अवैध भंडारण की घटनाएँ पहले भी सामने आती रही हैं। यह कार्रवाई राज्य में पेट्रोलियम उत्पादों की काला बाज़ारी पर अंकुश लगाने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा के लिए भी गंभीर जोखिम है। असली परीक्षा यह होगी कि क्या इस मामले में आपूर्तिकर्ता नेटवर्क की भी जाँच होती है, या कार्रवाई केवल भंडारण केंद्र तक सीमित रहती है।
RashtraPress
29 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गोवा के डाबोलिम में क्राइम ब्रांच ने क्या जब्त किया?
क्राइम ब्रांच ने डाबोलिम स्थित अवैध पेट्रोलियम भंडारण केंद्र से 6 ईंधन टैंकर, 1 टिपर ट्रक और बड़ी मात्रा में पेट्रोलियम उत्पाद जब्त किए, जिनकी कुल अनुमानित कीमत ₹1.5 करोड़ है। यह कार्रवाई 28 जून 2026 को विशेष सूचना के आधार पर की गई।
इस मामले में मुख्य आरोपी कौन है?
प्रारंभिक जाँच में सामने आया कि परिसर और जब्त वाहन गोवा के सांक्वेलिम निवासी देवेंद्र नाइक उर्फ राजू चव्हाण द्वारा संचालित किए जा रहे थे। उन पर बिना लाइसेंस पेट्रोलियम भंडारण और काला बाज़ार में ईंधन बेचने का आरोप है।
अवैध पेट्रोलियम भंडारण पर कौन-से कानून लागू होते हैं?
विशेषज्ञों के अनुसार इस तरह का अवैध भंडारण पेट्रोलियम अधिनियम 1934, आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 और पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम 1986 का उल्लंघन है। इस मामले में BNS की धारा 287 सहित इन सभी अधिनियमों की संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है।
क्या यह ईंधन काला बाज़ार में बेचा जा रहा था?
जाँच में कथित तौर पर सामने आया कि परिसर में संग्रहित पेट्रोलियम उत्पादों को ऊँचे दामों पर काला बाज़ार में बेचा जा रहा था। हालाँकि, इसकी पूरी पुष्टि जाँच पूरी होने के बाद ही होगी।
छापेमारी में IOCL की भूमिका क्या थी?
इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) के अधिकारी फॉरेंसिक विशेषज्ञों के साथ छापेमारी के दौरान मौजूद थे। उनकी उपस्थिति जब्त ईंधन की तकनीकी पहचान और गुणवत्ता जाँच सुनिश्चित करने के लिए थी।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 4 महीने पहले
  6. 6 महीने पहले
  7. 6 महीने पहले
  8. 8 महीने पहले