गोमती नदी शुद्धिकरण: लखनऊ के 45 नालों की टैपिंग, नमामि गंगे के तहत बड़ा एक्शन प्लान तैयार
सारांश
मुख्य बातें
लखनऊ में गोमती नदी को सीवेज प्रदूषण से मुक्त करने के लिए योगी सरकार ने नमामि गंगे कार्यक्रम के अंतर्गत एक व्यापक और बहुस्तरीय कार्ययोजना तैयार की है। ड्रोन सर्वे के माध्यम से गोमती में गिरने वाले 45 नालों की पहचान की गई है, और इन सभी को चरणबद्ध ढंग से अलग-अलग सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) से जोड़ने की योजना पर काम जारी है। यह पहल राजधानी के लगभग 30 किलोमीटर के नदी-मार्ग को प्रदूषणमुक्त करने की दिशा में एक निर्णायक कदम मानी जा रही है।
सीवेज की स्थिति और चुनौती
वर्ष 2026 में लखनऊ की अनुमानित आबादी करीब 45.56 लाख है। शहर में 110 वार्ड और करीब 7.52 लाख घर हैं, जिनमें से केवल 4.01 लाख घर यानी 53.32 प्रतिशत ही सीवरेज नेटवर्क से जुड़े हैं। आंकड़ों के अनुसार, आबादी के सापेक्ष प्रतिदिन करीब 546.77 एमएलडी घरेलू सीवेज उत्पन्न होता है, जबकि वास्तविक डिस्चार्ज 880.70 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रति दिन) है। इसमें 690.33 एमएलडी नालों के माध्यम से और 190.71 एमएलडी सीवर नेटवर्क के ज़रिए प्रवाहित होता है।
यह ऐसे समय में आया है जब शहर की मौजूदा 10 एसटीपी की कुल शोधन क्षमता केवल 629.5 एमएलडी है — यानी वास्तविक डिस्चार्ज और शोधन क्षमता के बीच बड़ा अंतर बना हुआ है।
45 नालों का विवरण और टैपिंग की स्थिति
नगर निगम के पुराने रिकॉर्ड में गोमती में गिरने वाले 33 नालों का उल्लेख था। हालिया ड्रोन सर्वे के बाद 12 नए नाले और चिह्नित किए गए, जिससे कुल संख्या 45 हो गई। इनमें से 12 नालों से लगभग 75 एमएलडी डिस्चार्ज पहले ही टैप किया जा चुका है। 5 नालों में टैपिंग की आवश्यकता नहीं पाई गई। शेष 28 नाले अभी अनटैप्ड या आंशिक रूप से टैप्ड हैं, जिनका संयुक्त डिस्चार्ज करीब 260 एमएलडी है।
चल रही और प्रस्तावित परियोजनाएँ
नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत 39 एमएलडी क्षमता के एसटीपी का निर्माण 4 नवंबर 2024 को पूरा किया गया था और 5 नवंबर 2024 से इसका संचालन जारी है। एक अनटैप्ड नाले को टैप कर 3.5 एमएलडी बरीकलां एसटीपी से जोड़ने की परियोजना अक्टूबर 2026 तक पूरी होने का लक्ष्य है। इसी तरह दो अनटैप्ड और एक आंशिक टैप्ड नाले को 50 एमएलडी लोनियापुरवा एसटीपी से जोड़ने का काम जून 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
प्री-फिजिबिलिटी रिपोर्ट (पीएफआर) में शेष 28 नालों के शोधन के लिए 160 एमएलडी बसंतकुंज, 65 एमएलडी वजीरगंज, 150 एमएलडी जियामऊ और 65 एमएलडी नीलमथा में नए एसटीपी निर्माण का प्रस्ताव है। इसके अलावा मस्तेमऊ नाले पर नेचर बेस्ड तकनीक, पीपराघाट में 750 केएलडी और घैला में 100 केएलडी क्षमता के मॉड्यूलर एसटीपी की भी योजना है। भरवारा एसटीपी के अपग्रेडेशन और उससे जुड़े 19 नालों की मरम्मत, तथा दौलतगंज एसटीपी के अपग्रेडेशन के साथ उससे जुड़े 2 नालों की मरम्मत भी कार्ययोजना में शामिल है।
सरकार की प्रतिक्रिया
राज्य पेयजल एवं स्वच्छता मिशन के अधिशासी निदेशक जोगिंदर सिंह ने कहा कि 'नदियों को स्वच्छ बनाना हमारी प्राथमिकता है। विभाग ने नए नालों की पहचान की है, जिन्हें जल्द शोधित किया जाएगा। इससे शहर के बड़े हिस्से से गुजरने वाली गोमती नदी का स्वरूप बदलेगा।'
आगे क्या
गोमती के समेकित पुनरुद्धार की कार्ययोजना की रिपोर्ट 6 मई 2026 को राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी), नई दिल्ली को भेजी जा चुकी है। एनएमसीजी की स्वीकृति के बाद प्रस्तावित कार्यों का क्रियान्वयन शुरू होगा, जिससे अनटैप्ड और ओवरफ्लो हो रहे नालों पर नियंत्रण की दिशा में ठोस प्रगति अपेक्षित है।