यूपी विधानसभा चुनाव 2027: 2022 में गोरखपुर की सभी 9 सीटों पर भाजपा की जीत, योगी का गढ़ अभेद्य
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच पूर्वी उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले की राजनीतिक तस्वीर एक बार फिर चर्चा में है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कर्मभूमि माने जाने वाले इस जिले में 9 विधानसभा सीटें हैं — कैम्पियरगंज, पिपराइच, गोरखपुर शहरी, गोरखपुर ग्रामीण, सहजनवां, खजनी, चौरी-चौरा, बांसगांव और चिल्लूपार — और फिलहाल इन सभी पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का कब्जा है। 2022 विधानसभा चुनाव में भाजपा ने यहाँ विपक्ष का पूरी तरह सफाया कर दिया था।
2022 में भाजपा का क्लीन स्वीप
2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने गोरखपुर जिले की सभी नौ सीटों पर जीत दर्ज की, जिससे समाजवादी पार्टी (SP) सहित पूरा विपक्ष खाली हाथ रह गया। जिले की सबसे बड़ी जीत गोरखपुर शहरी सीट से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हासिल की। उन्होंने समाजवादी पार्टी की उम्मीदवार सुभावती शुक्ला को 1,03,390 वोटों के विशाल अंतर से पराजित किया, और स्वयं 1.65 लाख से अधिक मत प्राप्त किए — जो जिले की सबसे बड़ी जीतों में गिनी जाती है।
गौरतलब है कि योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बनने से पूर्व लंबे समय तक गोरखपुर लोकसभा सीट का नेतृत्व करते रहे थे। सीएम बनने के बाद उन्होंने पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ा और इस लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली सभी विधानसभा सीटों पर भाजपा ने बाजी मारी।
सीटवार प्रदर्शन: अंतर और प्रतिनिधि
पिपराइच सीट से भाजपा के महेंद्र पाल सिंह ने करीब 65 हजार वोटों के बड़े अंतर से जीत दर्ज की — जो जिले की दूसरी सबसे बड़ी जीत रही। कैम्पियरगंज से फतेह बहादुर सिंह ने लगभग 42 हजार वोटों से विजय पाई। सहजनवां में प्रदीप शुक्ला ने करीब 43 हजार वोटों से, और गोरखपुर ग्रामीण से विपिन सिंह ने लगभग 24 हजार वोटों के अंतर से जीत हासिल की।
अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित खजनी सीट से श्रीराम चौहान ने लगभग 37 हजार वोटों और बांसगांव से विमलेश पासवान ने करीब 32 हजार वोटों से जीत दर्ज की। चौरी-चौरा से सरवन कुमार निषाद विधायक बने, जिनकी जीत का अंतर लगभग 41 हजार वोट रहा।
जिले की सबसे चर्चित सीटों में शामिल चिल्लूपार पर भाजपा के राजेश त्रिपाठी ने करीब 21,645 वोटों से जीत दर्ज की। यह सीट कभी पूर्व मंत्री हरिशंकर तिवारी के राजनीतिक प्रभाव का केंद्र मानी जाती थी और वर्षों तक तिवारी परिवार का मजबूत प्रभुत्व यहाँ बना रहा।
जातीय समीकरण और राजनीतिक इतिहास
गोरखपुर की राजनीति में ठाकुर, ब्राह्मण, निषाद, दलित, यादव और मुस्लिम वोट बैंक अहम भूमिका निभाते हैं। चौरी-चौरा सीट पर निषाद, राजभर और पिछड़े वर्ग के समीकरण हमेशा चुनावी परिणामों को प्रभावित करते रहे हैं। कैम्पियरगंज और चिल्लूपार में स्थानीय नेताओं की व्यक्तिगत पकड़ भी चुनाव में निर्णायक रही है।
यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब पिछले एक दशक में गोरखपुर शहरी, पिपराइच, सहजनवां और बांसगांव जैसी सीटों पर भाजपा का प्रभाव लगातार बढ़ा है, जबकि चिल्लूपार और चौरी-चौरा जैसी परंपरागत रूप से प्रतिस्पर्धी सीटों पर भी पार्टी ने पकड़ मजबूत की है।
2027 की चुनौती: क्या बरकरार रहेगा भगवा दबदबा?
वर्तमान में गोरखपुर जिले को भाजपा का सबसे मजबूत गढ़ माना जाता है। 2022 में सभी नौ सीटों पर जीत ने इस स्थिति को और सुदृढ़ किया। 2027 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी दलों के लिए यह जिला सबसे कठिन परीक्षा में से एक होगा। योगी आदित्यनाथ की व्यक्तिगत लोकप्रियता, संगठनात्मक मजबूती और उनके सीएम के रूप में पाँच वर्षों के कार्यकाल का प्रदर्शन — ये सभी कारक 2027 के नतीजों को निर्धारित करने में भूमिका निभाएंगे।