रिलायंस और बीपी से गैस हेराफेरी के आरोप में सरकार ने मांगे 2.81 अरब डॉलर: मंत्री

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रिलायंस और बीपी से गैस हेराफेरी के आरोप में सरकार ने मांगे 2.81 अरब डॉलर: मंत्री

सारांश

भारत सरकार ने ओएनजीसी के तेल क्षेत्र से गैस हेराफेरी के आरोप में रिलायंस और बीपी से 2.81 अरब डॉलर की मांग की है। यह मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। जानें क्या है पूरा मामला।

Key Takeaways

  • सरकार ने 2.81 अरब डॉलर की मांग की है।
  • यह मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है।
  • रिलायंस ने आरोपों का खंडन किया है।
  • दिल्ली हाईकोर्ट ने सरकार के पक्ष में फैसला दिया।
  • गैस की हेराफेरी के आरोप गंभीर हैं।

नई दिल्ली, 16 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। भारत सरकार ने पूर्वी तटवर्ती केजी बेसिन में स्थित ओएनजीसी के तेल क्षेत्र से कथित गैस हेराफेरी के मामले में रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) और ब्रिटेन की तेल कंपनी बीपी से 2.81 अरब डॉलर की राशि की मांग की है। यह जानकारी सोमवार को संसद में प्रस्तुत की गई।

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने राज्यसभा में लिखित उत्तर में बताया कि सरकार ने रिलायंस और बीपी से यह राशि मांगी है। उन्होंने कहा कि यह मामला वर्तमान में भारत के सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है।

मंत्री का यह उत्तर राज्यसभा सांसद दीपक प्रकाश के द्वारा पूछे गए प्रश्न के जवाब में आया। सांसद ने पूछा था कि क्या यह सच है कि सरकार ने ओएनजीसी के पूर्वी तट के गैस ब्लॉक्स से कथित गैस चोरी या निकासी के मामले में निजी कंपनियों से 2 अरब डॉलर से अधिक की मांग की है।

सांसद ने यह भी जानकारी मांगी थी कि इस मामले में शामिल निजी कंपनियों के नाम और उनसे अब तक प्राप्त भुगतान की स्थिति क्या है।

जानकारी के अनुसार, मार्च 2026 तक भारत सरकार ने रिलायंस इंडस्ट्रीज और उसकी साझेदार कंपनी बीपी से लगभग 2.81 अरब डॉलर (लगभग 25,983 करोड़ रुपए) की मांग की है। यह मांग फरवरी 2025 में दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के बाद की गई, जिसमें 2018 के उस आर्बिट्रेशन अवॉर्ड को रद्द कर दिया गया था जिसने पहले रिलायंस को इस मामले में जिम्मेदारी से मुक्त किया था।

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय का आरोप है कि 2004 से 2013-14 के बीच रिलायंस के केजी-डी6 ब्लॉक से पास के ओएनजीसी ब्लॉक्स की गैस निकल गई, जिससे कंपनी को 1.55 अरब डॉलर से अधिक का अनुचित लाभ हुआ, जिस पर ब्याज भी जोड़ा गया है।

दिल्ली हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने 14 फरवरी 2025 को सरकार के पक्ष में फैसला दिया था, और पहले दिए गए उस सिंगल जज के फैसले को पलट दिया था जिसमें रिलायंस के पक्ष में निर्णय दिया गया था और सरकार की मांग को 'अनसस्टेनेबल' बताया गया था।

हालांकि रिलायंस का कहना है कि यह गैस 'माइग्रेटरी' थी, यानी प्राकृतिक रूप से एक ब्लॉक से दूसरे ब्लॉक में चली गई थी, इसलिए कंपनी इसके लिए जिम्मेदार नहीं है।

कंपनी ने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जहां इस मामले की सुनवाई जारी है।

Point of View

बल्कि यह भारत की ऊर्जा नीति और न्याय प्रणाली पर भी सवाल उठाता है। सरकार की इस मांग से बाजार में हलचल हो सकती है और इसे ध्यान में रखते हुए सभी पक्षों को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी।
NationPress
19/03/2026

Frequently Asked Questions

सरकार ने रिलायंस और बीपी से कितनी राशि की मांग की है?
सरकार ने रिलायंस और बीपी से 2.81 अरब डॉलर की मांग की है।
यह मामला किस अदालत में विचाराधीन है?
यह मामला वर्तमान में भारत के सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है।
क्या रिलायंस ने आरोपों का खंडन किया है?
हाँ, रिलायंस का कहना है कि यह गैस प्राकृतिक रूप से माइग्रेटरी थी।
इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट का क्या फैसला था?
दिल्ली हाईकोर्ट ने सरकार के पक्ष में फैसला दिया था और पहले के निर्णय को पलट दिया था।
सरकार का आरोप क्या है?
सरकार का आरोप है कि रिलायंस ने ओएनजीसी के ब्लॉक्स से गैस की हेराफेरी की।
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