2030 तक गुजरात बनेगा भारत का बायोटेक हब: GRIT रिपोर्ट में ₹300 बिलियन बायो-इकोनॉमी का रोडमैप
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात राज्य संस्थान फॉर ट्रांसफॉर्मेशन (GRIT) ने 28 जून 2026 को एक महत्वाकांक्षी रिपोर्ट जारी की, जिसमें 2030 तक गुजरात को भारत का अग्रणी बायोटेक्नोलॉजी और बायोमैन्युफैक्चरिंग हब बनाने का विस्तृत रोडमैप प्रस्तुत किया गया है। 'गुजरात बायो-इकोनॉमी 2030 स्ट्रेटजिक स्किल आर्किटेक्चर एंड वर्कफोर्स डेवलपमेंट' शीर्षक वाली इस रिपोर्ट में कुशल कार्यबल निर्माण, विशेषीकृत शिक्षा और उद्योग-आधारित प्रशिक्षण को केंद्र में रखा गया है।
बायो-इकोनॉमी की विकास यात्रा
रिपोर्ट के अनुसार, भारत की बायो-इकोनॉमी 2014 में लगभग 10 बिलियन डॉलर से बढ़कर 2024 में 150 बिलियन डॉलर से अधिक हो गई है — यानी एक दशक में 15 गुना की वृद्धि। केंद्र सरकार की BioE3 नीति (Economy, Environment और Employment के लिए Biotechnology) के समर्थन से देश ने दशक के अंत तक 300 बिलियन डॉलर की बायो-इकोनॉमी हासिल करने का लक्ष्य रखा है। रिपोर्ट में गुजरात को इस राष्ट्रीय लक्ष्य में निर्णायक भूमिका निभाने वाला राज्य बताया गया है।
गुजरात की मौजूदा ताकत
रिपोर्ट में रेखांकित किया गया है कि गुजरात पहले से ही भारत के फार्मास्यूटिकल उत्पादन का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा है और देश के अग्रणी रासायनिक विनिर्माण केंद्रों में शुमार है। राज्य की अन्य विशेषताओं में 1,600 किलोमीटर लंबी तटरेखा, विविध कृषि आधार, सक्रिय अनुसंधान संस्थान और अनुकूल नीति ढाँचा शामिल हैं।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में राज्य का उद्देश्य अपने मौजूदा औद्योगिक आधार का लाभ उठाकर और कुशल प्रतिभा पूल को विस्तार देकर बायोटेक्नोलॉजी और बायोमैन्युफैक्चरिंग में अपनी स्थिति सुदृढ़ करना है।'
विकास के प्रमुख क्षेत्र
रिपोर्ट में बायोफार्मा, बायो-इंडस्ट्रियल मैन्युफैक्चरिंग और बायो-एग्रीकल्चर को भविष्य की वृद्धि के तीन मुख्य चालकों के रूप में चिह्नित किया गया है। बायोफार्मा क्षेत्र, जो इस सेक्टर में लगभग 35 प्रतिशत का योगदान देता है, वैक्सीन, थेराप्यूटिक्स और डायग्नोस्टिक्स से आगे बढ़ रहा है। उल्लेखनीय है कि भारत अभी वैश्विक वैक्सीन माँग का 35 प्रतिशत से अधिक आपूर्ति करता है, और वायरल वेक्टर जैसी तकनीकों में प्रगति से यह क्षमता और बढ़ने की संभावना है।
बायो-इंडस्ट्रियल सेगमेंट, जो सेक्टर का 47 प्रतिशत हिस्सा है, में बायो-आधारित रसायनों की बढ़ती माँग और देश के इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम — जिसने अपना 20 प्रतिशत का लक्ष्य निर्धारित समय से पहले हासिल कर लिया — की वजह से फर्मेंटेशन टेक्नोलॉजी विशेषज्ञों की माँग तेज़ी से बढ़ रही है। वहीं, जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के चलते CRISPR-आधारित फसलों और बायो-फर्टिलाइजर जैसी तकनीकें अब शोध प्रयोगशालाओं से निकलकर खेतों तक पहुँच रही हैं।
शिक्षा और कार्यबल विकास
GRIT ने पूरे गुजरात में बायोटेक्नोलॉजी और संबंधित कार्यक्रम संचालित करने वाले 23 संस्थानों का विश्लेषण किया। अध्ययन का निष्कर्ष है कि राज्य में पहले से ही एक सुदृढ़ शैक्षणिक आधार मौजूद है, हालाँकि शैक्षणिक पाठ्यक्रम को उभरती उद्योग आवश्यकताओं के अनुरूप और अधिक संरेखित करने की आवश्यकता है।
रिपोर्ट में कहा गया है, 'विशेष शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण में निवेश करने से कुशल पेशेवरों का पलायन कम हो सकता है, कार्यबल पुनः प्रशिक्षण की ज़रूरत घट सकती है और टिकाऊ औद्योगिक विकास को समर्थन मिल सकता है।' गुजरात राज्य बायोटेक्नोलॉजी नीति 2022-27 का हवाला देते हुए रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि राज्य का इरादा जेनेरिक दवाओं के बड़े पैमाने पर उत्पादन से आगे बढ़कर इनोवेटिव बायोलॉजिक्स के विकास में विस्तार करना है — जो पारंपरिक औद्योगिक विनिर्माण से ज्ञान-आधारित बायो-इकोनॉमी की दिशा में एक निर्णायक बदलाव है।
आगे की राह
BioE3 नीति उच्च-प्रदर्शन बायोमैन्युफैक्चरिंग के लिए कुशल कार्यबल निर्माण पर विशेष ज़ोर देती है। रिपोर्ट के अनुसार, सही प्रतिभा और सहायक अवसंरचना की उपस्थिति से यह सेक्टर अपनी उत्पादन क्षमता को अधिकतम कर सकेगा। यह रिपोर्ट गुजरात के लिए एक स्पष्ट संकेत है कि वैश्विक बायो-इकोनॉमी में बड़ी भूमिका पाने की दौड़ में नीति, शिक्षा और उद्योग तीनों को एक साथ चलना होगा।