होर्मुज स्ट्रेट पर ट्रंप का बड़ा दावा: 'पूरा नियंत्रण अमेरिका का, ईरान कुछ नहीं कर सकता'
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 12 अगस्त को दावा किया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अमेरिका का 'पूरा नियंत्रण' है और वॉशिंगटन इस रणनीतिक जलमार्ग पर अपनी पकड़ बनाए रखने का इरादा रखता है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर यह बयान जारी किया, जिसमें ईरान की सैन्य और आर्थिक स्थिति को बुरी तरह कमज़ोर बताया गया।
ट्रंप का दावा: 'स्टील की दीवार' जैसी नाकेबंदी
ट्रंप ने 'ट्रुथ सोशल' पर लिखा, 'होर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिका का पूरा कंट्रोल है। मुझे लगता है कि हम इसे बनाए रखेंगे।' उन्होंने अमेरिकी नौसैनिक घेराबंदी का हवाला देते हुए कहा कि ईरान इसे चुनौती देने में असमर्थ है। उनके अनुसार, 'हर कोई हमारी नौसैनिक घेराबंदी को 'स्टील की दीवार' कह रहा है और ईरान इसके बारे में कुछ नहीं कर सकता।'
गौरतलब है कि ट्रंप ने इस घेराबंदी से जुड़े किसी भी अभियान की परिचालन जानकारी साझा नहीं की। उन्होंने यह भी स्पष्ट नहीं किया कि यह नियंत्रण कितने समय तक बनाए रखा जाएगा या किन शर्तों पर यह अभियान समाप्त हो सकता है।
ईरान की सैन्य क्षमता पर हमला
ट्रंप ने अपनी पोस्ट में ईरान की सेना और राजनीतिक व्यवस्था को कमज़ोर बताने की कोशिश की। उन्होंने कथित तौर पर दावा किया, 'उनके पास न तो नौसेना है, न ही वायुसेना। उनके बचे हुए सैनिकों को वेतन नहीं मिल रहा है। आईआरजीसी (IRGC) बर्बाद हो चुकी है और भाग रही है। उनकी 'लीडरशिप' की स्थिति भी बहुत अनिश्चित है।' हालाँकि, इन दावों के समर्थन में ट्रंप ने कोई स्वतंत्र साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया और न ही उन ईरानी नेताओं के नाम बताए जिनकी स्थिति को उन्होंने अनिश्चित कहा।
ईरान की आर्थिक स्थिति पर ट्रंप के आरोप
ट्रंप ने यह भी दावा किया कि ईरान गहरे आर्थिक संकट में है। उन्होंने कहा, 'उनके पास पैसे नहीं हैं। उनका देश बर्बाद हो चुका है। उनके पास सिर्फ फेक न्यूज और 300 प्रतिशत महंगाई है, और हालात और खराब होते जा रहे हैं।' आलोचकों का कहना है कि ईरान की अर्थव्यवस्था पर अमेरिकी प्रतिबंधों का दबाव वास्तविक है, लेकिन ट्रंप के इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
मध्य-पूर्व में ईरान के प्रभाव पर सवाल
ट्रंप ने इस पोस्ट के ज़रिए ईरान की क्षेत्रीय भूमिका को भी चुनौती दी। उन्होंने कहा कि ईरान अब मध्य-पूर्व में वैसा प्रभाव नहीं डाल सकता, जैसा पहले हुआ करता था। उनके शब्दों में, 'ईरान सिर्फ बातें करता है, कोई काम नहीं करता। वह अब मिडिल ईस्ट का 'दादा' नहीं रहा।' यह बयान तेहरान के खिलाफ ट्रंप की बयानबाज़ी में एक और आक्रामक कड़ी है।
आगे क्या
यह ऐसे समय में आया है जब होर्मुज स्ट्रेट — जिससे होकर दुनिया का एक बड़ा हिस्सा तेल आपूर्ति प्राप्त करता है — पर किसी भी तरह की सैन्य गतिविधि वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों को प्रभावित कर सकती है। अमेरिकी नीति के अगले कदम और ईरान की आधिकारिक प्रतिक्रिया पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नज़रें टिकी हैं।