प्रज्वल रेवन्ना की बैरक से मोबाइल और OTT ऐप्स बरामद, खड़गे बोले- मैंने दिया था छापे का आदेश
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने बुधवार, 12 अगस्त को स्पष्ट किया कि बेंगलुरु की परप्पना अग्रहारा सेंट्रल जेल में केंद्रीय अपराध शाखा (CCB) की छापेमारी का आदेश उन्होंने स्वयं दिया था। इस कार्रवाई में जेल परिसर से 10 से अधिक मोबाइल फोन बरामद हुए, जिनमें पूर्व सांसद प्रज्वल रेवन्ना की बैरक से मिला एक मोबाइल फोन भी शामिल है — जिसमें कई OTT ऐप्स इंस्टॉल पाए गए।
छापेमारी का आदेश और पृष्ठभूमि
खड़गे ने बताया कि वे दो सप्ताह पहले परप्पना अग्रहारा जेल का दौरा कर चुके थे, जहाँ उन्हें कई कमियाँ नज़र आई थीं। उन्होंने कहा, 'CCB की छापेमारी मैंने करवाई थी। छापा डालने के लिए गृह विभाग की अनुमति आवश्यक होती है। मुख्यमंत्री की मंजूरी लेकर मैंने छापेमारी के आदेश दिए।' गृह मंत्री ने यह भी कहा कि विभाग की जिम्मेदारी संभालने के दो महीने के भीतर उन्होंने यह कार्रवाई सुनिश्चित की।
बरामदगी का विवरण
जेल विभाग के डीजीपी आलोक कुमार ने पुष्टि की कि प्रज्वल रेवन्ना की बैरक से एक मोबाइल फोन और चार्जर बरामद किया गया है। फोन में कई OTT ऐप्स मौजूद थे। इसके अलावा जेल के विभिन्न हिस्सों से चार्जर और अन्य प्रतिबंधित सामान भी जब्त किए गए। डीजीपी ने कहा कि यह भी जाँचा जाएगा कि कहीं जेल के वाईफाई नेटवर्क का इस्तेमाल तो नहीं किया गया।
अधिकारियों पर कार्रवाई
लापरवाही के मामले में सहायक अधीक्षक ईरन्ना को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। वहीं जेल अधीक्षक अंशुकुमार को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब माँगा गया है। खड़गे ने कहा कि जिन अधिकारियों ने अनियमितताओं को बढ़ावा दिया, उन्हें निलंबित करने के निर्देश दे दिए गए हैं।
राज्यभर की जेलों में होगी कार्रवाई
गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह अभियान केवल परप्पना अग्रहारा जेल तक सीमित नहीं रहेगा। उन्होंने कहा, 'राज्य की सभी जेलों में ऐसी कार्रवाई की जाएगी। कुछ अधिकारी अपनी पुरानी आदतें नहीं छोड़ रहे हैं और उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।' डीजीपी आलोक कुमार ने भी चेतावनी दी कि यदि किसी अधिकारी की कैदियों के साथ मिलीभगत साबित हुई तो उसे बिना हिचकिचाहट निलंबित किया जाएगा।
आगे की जाँच
अधिकारियों ने बताया कि जब्ती और पंचनामा की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही विस्तृत जानकारी सार्वजनिक की जाएगी। यह पता लगाने के लिए विस्तृत जाँच की जाएगी कि प्रतिबंधित सामान जेल के भीतर कैसे पहुँचा और इसमें किसी अधिकारी या बाहरी व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं। डीजीपी ने यह भी आशंका जताई कि पहले जेल में पहुँचाए गए कुछ मोबाइल अब भी अंदर हो सकते हैं।