28 अक्टूबर 2026
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गुजरात बम धमकी: अहमदाबाद के 35 स्थानों को ईमेल, तार बांग्लादेश-पाकिस्तान तक पहुँचे

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गुजरात बम धमकी: अहमदाबाद के 35 स्थानों को ईमेल, तार बांग्लादेश-पाकिस्तान तक पहुँचे

सारांश

अहमदाबाद को मिली बम धमकियों की डिजिटल कड़ी बांग्लादेश के रंगपुर और रावलपिंडी-लाहौर तक जा पहुँची है। हैक खाते, क्रिप्टोकरेंसी भुगतान और टेलीग्राम नेटवर्क — यह सिर्फ धमकी नहीं, एक सुनियोजित साइबर-दहशत का नमूना है।

मुख्य बातें

अहमदाबाद साइबर क्राइम ब्रांच ने 28 अक्टूबर 2026 को बताया कि बम धमकी वाले ईमेल बांग्लादेश और पाकिस्तान से संचालित खातों से भेजे गए।
दो अलग-अलग ईमेल — 7 अक्टूबर और 27 अक्टूबर — में कुल 35 स्थानों को निशाना बनाने की धमकी दी गई, जिनमें 24 स्कूल , अदालतें और नरेंद्र मोदी स्टेडियम शामिल थे।
7 अक्टूबर का ईमेल बांग्लादेश व रावलपिंडी से, और 27 अक्टूबर का ईमेल बांग्लादेश के रंगपुर व लाहौर से संचालित पाया गया।
एक पुराने मामले में पश्चिम बंगाल से गिरफ्तार आरोपी ने हैक खाते बांग्लादेश के रास्ते पाकिस्तान तक बेचे और क्रिप्टोकरेंसी में भुगतान लिया।
दोनों मामलों में बीएनएस और आईटी अधिनियम 2000 की धारा 66(सी) के तहत एफआईआर दर्ज; केंद्रीय एजेंसियों के साथ मिलकर जाँच जारी।

अहमदाबाद साइबर क्राइम ब्रांच ने 28 अक्टूबर 2026 को खुलासा किया कि अक्टूबर माह में अहमदाबाद के स्कूलों, अदालतों, सरकारी कार्यालयों और नरेंद्र मोदी स्टेडियम को भेजे गए बम धमकी वाले दो अलग-अलग ईमेल के स्रोत बांग्लादेश और पाकिस्तान से जुड़े पाए गए हैं। जाँचकर्ताओं के अनुसार, इन संदेशों को हैक किए गए या पुराने ईमेल अकाउंट्स के जरिए भेजा गया था।

धमकियों का विवरण और निशाने पर रहे स्थान

7 अक्टूबर को भेजे गए पहले ईमेल में 16 स्थानों पर बम विस्फोट की धमकी दी गई थी। इनमें 10 स्कूल, मेयर कार्यालय, गुजरात हाईकोर्ट, सोला कोर्ट, घीकांटा मेट्रो कोर्ट, अहमदाबाद जिला एवं सत्र न्यायालय और नरेंद्र मोदी क्रिकेट स्टेडियम शामिल थे। संदेश में खालिस्तानी संगठनों का जिक्र करते हुए लोगों से पंजाबी गायक-अभिनेता दिलजीत दोसांझ के कार्यक्रमों में शामिल न होने की अपील की गई थी।

इसी ईमेल में 21 नवंबर को नरेंद्र मोदी स्टेडियम और 1 नवंबर को दिल्ली के जेएलएन स्टेडियम में विस्फोट की चेतावनी दी गई थी। संदेश में 1984 के सिख विरोधी दंगों का हवाला देते हुए खालिस्तान नेशनल आर्मी और बब्बर खालसा जैसे संगठनों के नाम भी लिए गए थे।

27 अक्टूबर को एक अलग आईडी से भेजे गए दूसरे ईमेल में 19 स्थानों को निशाना बनाने की धमकी दी गई — जिनमें 14 स्कूल, मेयर कार्यालय, दाणापीठ के दो कार्यालय, घीकांटा मेट्रो कोर्ट, अहमदाबाद सिटी सिविल कोर्ट और नरेंद्र मोदी क्रिकेट स्टेडियम शामिल थे। इस संदेश में आईफोन के जरिए विस्फोट करने की धमकी दी गई और लोगों को 21 नवंबर को मोटेरा स्टेडियम मेट्रो स्टेशन से यात्रा न करने की चेतावनी भी दी गई थी।

ईमेल के तकनीकी सुराग: बांग्लादेश और पाकिस्तान का संबंध

साइबर क्राइम ब्रांच के अनुसार, पुलिस ने प्रभावित स्कूलों और अदालत परिसरों का दौरा किया तथा ईमेल हेडर और जीमेल से प्राप्त तकनीकी जानकारी का विश्लेषण किया। प्रारंभिक जाँच में पता चला कि 7 अक्टूबर का ईमेल बांग्लादेश और पाकिस्तान के रावलपिंडी से संचालित खातों से भेजा गया, जबकि 27 अक्टूबर के ईमेल के तार बांग्लादेश के रंगपुर और पाकिस्तान के लाहौर से जुड़े पाए गए।

गौरतलब है कि जाँचकर्ताओं ने खालिस्तानी संगठनों के नाम पर भेजी गई इसी तरह की एक पुरानी धमकी के मामले का भी अध्ययन किया। उस मामले में पश्चिम बंगाल से एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया था, जिसने हैक किए गए जीमेल अकाउंट बांग्लादेश में रहने वाले एक व्यक्ति को बेचे थे। पूछताछ में उस व्यक्ति ने स्वीकार किया था कि उसने वे अकाउंट आगे पाकिस्तान में मौजूद किसी को बेचे और भुगतान क्रिप्टोकरेंसी के जरिए प्राप्त किया था।

धमकियों का मकसद: दहशत फैलाना

जाँचकर्ताओं का दावा है कि पाकिस्तान में बैठे कुछ लोग त्योहारों और महत्वपूर्ण आयोजनों से पहले लोगों में डर और दहशत फैलाने के उद्देश्य से ऐसे ईमेल भेज रहे थे। पुलिस के अनुसार, ये लोग टेलीग्राम और व्हाट्सऐप समूहों के माध्यम से बांग्लादेश और अन्य देशों से पुराने या हैक किए गए ईमेल खाते हासिल कर रहे थे।

कानूनी कार्रवाई और आगे की जाँच

पुलिस ने दोनों मामलों में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 66(सी) के तहत एफआईआर दर्ज कर ली है। साइबर क्राइम ब्रांच ने बताया कि दोनों मामलों की जाँच केंद्रीय एजेंसियों के सहयोग से जारी है। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में स्कूलों और सार्वजनिक स्थलों को फर्जी बम धमकियाँ मिलने की घटनाएँ बढ़ी हैं, जिनमें से कई के तार बाहरी देशों से जुड़े पाए गए हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्रिप्टोकरेंसी और सीमापार मध्यस्थों की परतें हैं। चिंताजनक यह है कि स्कूलों जैसे अति-संवेदनशील लक्ष्यों को चुना गया — जो प्रशासनिक प्रतिक्रिया को मजबूर करने और अधिकतम सामाजिक दहशत फैलाने के लिए सुविचारित रणनीति है। ईमेल हेडर विश्लेषण से बांग्लादेश-पाकिस्तान कड़ी की पुष्टि होती है, लेकिन असली सवाल यह है कि जीमेल जैसे वैश्विक प्लेटफॉर्म हैक खातों की सीमापार खरीद-बिक्री पर अंकुश लगाने में कहाँ चूक रहे हैं। केंद्रीय एजेंसियों की भागीदारी सही दिशा में कदम है, पर जब तक खाता-बाज़ार तोड़ा न जाए, यह खेल दोहराता रहेगा।
RashtraPress
28 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अहमदाबाद बम धमकी ईमेल मामला क्या है?
अक्टूबर 2026 में अहमदाबाद के 35 स्थानों — 24 स्कूल, अदालतें, मेयर कार्यालय और नरेंद्र मोदी स्टेडियम — को दो अलग-अलग ईमेल के जरिए बम विस्फोट की धमकी दी गई। अहमदाबाद साइबर क्राइम ब्रांच की जाँच में पता चला कि ये ईमेल बांग्लादेश और पाकिस्तान से संचालित हैक खातों से भेजे गए थे।
बम धमकी वाले ईमेल किन-किन स्थानों से संचालित पाए गए?
जाँचकर्ताओं के अनुसार 7 अक्टूबर का ईमेल बांग्लादेश और पाकिस्तान के रावलपिंडी से जुड़े खातों से, जबकि 27 अक्टूबर का ईमेल बांग्लादेश के रंगपुर और पाकिस्तान के लाहौर से संचालित होता पाया गया। दोनों मामलों में हैक किए गए जीमेल अकाउंट इस्तेमाल किए गए थे।
हैक ईमेल खाते कैसे बांग्लादेश-पाकिस्तान तक पहुँचे?
एक पुराने संबंधित मामले में पश्चिम बंगाल से गिरफ्तार आरोपी ने खुलासा किया कि उसने हैक किए गए जीमेल खाते बांग्लादेश में रहने वाले एक व्यक्ति को बेचे। उस व्यक्ति ने वे खाते पाकिस्तान में किसी को आगे बेचे और भुगतान क्रिप्टोकरेंसी के जरिए लिया। टेलीग्राम और व्हाट्सऐप समूह इस खाता-व्यापार का माध्यम थे।
पुलिस ने इन मामलों में क्या कार्रवाई की है?
अहमदाबाद साइबर क्राइम ब्रांच ने दोनों मामलों में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 66(सी) के तहत एफआईआर दर्ज कर ली है। केंद्रीय एजेंसियों के सहयोग से जाँच जारी है।
इन ईमेल में दिलजीत दोसांझ का नाम क्यों आया?
दोनों ईमेल में खालिस्तानी संगठनों का हवाला देते हुए लोगों से गायक-अभिनेता दिलजीत दोसांझ के कार्यक्रमों में न जाने की अपील की गई थी। 21 नवंबर को नरेंद्र मोदी स्टेडियम में उनके कार्यक्रम से जुड़े बम हमले की धमकी भी दी गई थी और मोटेरा मेट्रो स्टेशन से यात्रा न करने की चेतावनी भी थी।
राष्ट्र प्रेस
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