नंदन नीलेकणी की अगुवाई में परीक्षा सुधार कार्य बल: गुजरात के CM भूपेंद्र पटेल और डिप्टी CM हर्ष संघवी ने किया स्वागत
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने 26 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस निर्णय का खुलकर समर्थन किया, जिसमें इंफोसिस के सह-संस्थापक और भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) के संस्थापक अध्यक्ष नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में परीक्षा सुधारों पर एक उच्चस्तरीय कार्य बल गठित किया गया है। दोनों नेताओं ने इस पहल को देश की परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, विश्वसनीयता और प्रौद्योगिकी-आधारित निष्पक्षता सुनिश्चित करने की दिशा में एक निर्णायक कदम बताया।
कार्य बल का गठन और उद्देश्य
प्रधानमंत्री मोदी ने रविवार को घोषणा की कि केंद्र सरकार ने यह कार्य बल गठित कर दिया है। इसका मुख्य उद्देश्य देश की सार्वजनिक परीक्षा प्रणाली को अधिक विश्वसनीय, पारदर्शी और तकनीक-आधारित बनाने के लिए ठोस सुधार सिफारिशें तैयार करना है। नंदन नीलेकणी की नियुक्ति को तकनीकी दक्षता और प्रशासनिक अनुभव के संयोजन के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि उन्होंने आधार परियोजना के माध्यम से डिजिटल गवर्नेंस में उल्लेखनीय भूमिका निभाई है।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की प्रतिक्रिया
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कहा कि यह 'हमारे युवाओं के भविष्य की रक्षा और परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित करने की दिशा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक दूरदर्शी कदम है।' उन्होंने यह भी कहा कि नीलेकणी के नेतृत्व में यह कार्य बल 'देश भर में परीक्षाओं में पारदर्शिता, विश्वास और प्रौद्योगिकी-आधारित निष्पक्षता सुनिश्चित करेगा।'
उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी का बयान
उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने इस निर्णय को शासन-दक्षता का प्रतीक बताते हुए कहा कि 'राजनीति भले ही विभाजनकारी हो, लेकिन राष्ट्र निर्माण के लिए सर्वश्रेष्ठ प्रतिभाओं की आवश्यकता होती है।' संघवी ने आगे कहा कि यह निर्णय 'एक ऐसे शासन मॉडल को दर्शाता है जो राजनीतिक संबद्धताओं से ऊपर योग्यता, अनुभव और परिणामों को महत्व देता है।'
व्यापक संदर्भ: परीक्षा प्रणाली पर सवाल
यह ऐसे समय में आया है जब देश में सार्वजनिक परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। गौरतलब है कि हाल के वर्षों में कई बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई हैं, जिसने लाखों परीक्षार्थियों का भरोसा हिलाया है। ऐसे में एक तकनीकी विशेषज्ञ के नेतृत्व में उच्चस्तरीय कार्य बल का गठन एक संरचनात्मक समाधान की दिशा में प्रयास माना जा रहा है।
आगे की राह
कार्य बल से अपेक्षा है कि वह सार्वजनिक परीक्षाओं की विश्वसनीयता को मजबूत करने के लिए समयबद्ध सिफारिशें प्रस्तुत करेगा। इसमें परीक्षा प्रक्रिया के डिजिटलीकरण, निगरानी तंत्र को कड़ा करने और पेपर लीक रोकने के उपाय शामिल हो सकते हैं। देशभर के लाखों युवा परीक्षार्थियों और उनके परिवारों की निगाहें अब इस कार्य बल की सिफारिशों पर टिकी हैं।