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नंदन नीलेकणि को परीक्षा सुधार की कमान: PM मोदी ने हाई पावर टास्क फोर्स का किया ऐलान

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नंदन नीलेकणि को परीक्षा सुधार की कमान: PM मोदी ने हाई पावर टास्क फोर्स का किया ऐलान

सारांश

कांग्रेस सरकार ने जिन्हें आधार की कमान सौंपी थी, अब भाजपा सरकार ने उन्हीं नंदन नीलेकणि को परीक्षा सुधार की जिम्मेदारी दी है। इंफोसिस के सह-संस्थापक, UPI और FASTag जैसी प्रणालियों के शिल्पकार अब शिक्षा क्षेत्र में तकनीकी क्रांति लाने की चुनौती संभालेंगे।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी ने 26 जुलाई को वीडियो संदेश जारी कर नंदन नीलेकणि के नेतृत्व में हाई पावर टास्क फोर्स गठित करने की घोषणा की।
टास्क फोर्स का लक्ष्य परीक्षा प्रणाली में तकनीक के अधिकतम उपयोग को सुनिश्चित करना है।
नीलेकणि इंफोसिस के सह-संस्थापक हैं और 2002–2007 तक इसके CEO रहे।
2009 में UIDAI अध्यक्ष के रूप में उन्होंने आधार , UPI , FASTag और GST प्रणालियों की नींव रखी।
2014 में उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर बेंगलुरु दक्षिण से चुनाव लड़ा और BJP के अनंत कुमार से हारे।
परीक्षा सुधार पर कठोर कानून बनाने हेतु सोमवार को संसद में चर्चा का ऐलान किया गया।

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार, 26 जुलाई की शाम एक वीडियो संदेश जारी कर घोषणा की कि परीक्षा प्रणाली में तकनीकी सुधार के लिए नंदन नीलेकणि के नेतृत्व में एक हाई पावर टास्क फोर्स गठित की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि छात्रों के भविष्य की रक्षा के लिए कठोर कानून बनाने पर सोमवार को संसद में विचार-विमर्श होगा।

कौन हैं नंदन नीलेकणि

नंदन नीलेकणि भारत के सबसे प्रतिष्ठित प्रौद्योगिकी उद्यमियों, नीति-विशेषज्ञों और समाजसेवियों में गिने जाते हैं। उनका जन्म 2 जून 1955 को बेंगलुरु में हुआ था। उन्होंने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) बॉम्बे से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की।

इंफोसिस से डिजिटल इंडिया तक का सफर

नीलेकणि ने 1981 में एन.आर. नारायण मूर्ति और अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर इंफोसिस की नींव रखी — जो आज भारत की अग्रणी आईटी कंपनियों में से एक है। वह 2002 से 2007 तक इंफोसिस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) रहे और 2007 से 2009 तक चेयरमैन पद पर आसीन रहे।

गौरतलब है कि 2009 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने नीलेकणि को भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) का अध्यक्ष नियुक्त किया था। इस भूमिका में उन्होंने देश की डिजिटल पहचान प्रणाली आधार को आकार देने में निर्णायक भूमिका निभाई। इसके अलावा, UPI, FASTag और GST जैसी तकनीकी प्रणालियों की बुनियाद तैयार करने में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है।

राजनीति में कदम और हार

2014 के लोकसभा चुनाव में नीलेकणि ने कांग्रेस के टिकट पर बेंगलुरु दक्षिण सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवार अनंत कुमार से हार का सामना करना पड़ा। यह तथ्य विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि जिस नेता पर कांग्रेस ने भरोसा किया, उन्हें अब भाजपा सरकार के प्रधानमंत्री ने भी राष्ट्रीय जिम्मेदारी सौंपी है।

लेखक और विचारक के रूप में पहचान

नीलेकणि ने 'Imagining India: Ideas for the New Century' (इमेजनिंग इंडिया: आइडियाज फॉर द न्यू सेंचुरी) नामक चर्चित पुस्तक लिखी है, जिसमें भारत के विकास, चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं का गहन विश्लेषण किया गया है। वह शिक्षा और सामाजिक विकास से जुड़ी परियोजनाओं में भी सक्रिय रूप से योगदान देते रहे हैं।

परीक्षा सुधार में क्या होगा आगे

प्रधानमंत्री मोदी द्वारा गठित हाई पावर टास्क फोर्स का मुख्य उद्देश्य परीक्षा प्रणाली में तकनीक के अधिकतम उपयोग को सुनिश्चित करना है। यह ऐसे समय में आया है जब देश में परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। नीलेकणि की आधार और डिजिटल भुगतान प्रणालियों में सिद्ध विशेषज्ञता को देखते हुए सरकार ने उन्हें यह संवेदनशील जिम्मेदारी सौंपी है। टास्क फोर्स की सिफारिशों के आधार पर आने वाले समय में परीक्षा सुधार का एक व्यापक रोडमैप तैयार किए जाने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

दल-निरपेक्ष तकनीकी विश्वसनीयता का प्रतीक बन गई हैं। लेकिन असली सवाल यह है कि क्या एक टास्क फोर्स उस प्रणालीगत खामी को दूर कर सकती है जो परीक्षाओं में पारदर्शिता की कमी से जन्मी है। आधार और UPI की सफलता तकनीकी निष्पादन की थी — परीक्षा सुधार में राजनीतिक इच्छाशक्ति और जवाबदेही तंत्र की भी उतनी ही ज़रूरत होगी। बिना स्वतंत्र निगरानी और समयबद्ध सिफारिशों के, यह टास्क फोर्स भी एक और उच्चस्तरीय समिति बनकर रह सकती है।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नंदन नीलेकणि कौन हैं और उन्हें क्यों चुना गया?
नंदन नीलेकणि इंफोसिस के सह-संस्थापक और भारत की डिजिटल पहचान प्रणाली आधार के शिल्पकार हैं। उन्होंने UIDAI अध्यक्ष के रूप में UPI, FASTag और GST जैसी तकनीकी प्रणालियों की नींव रखी, इसलिए परीक्षा प्रणाली में तकनीकी सुधार के लिए उनका चयन किया गया है।
परीक्षा सुधार के लिए गठित हाई पावर टास्क फोर्स का क्या काम होगा?
यह टास्क फोर्स परीक्षा प्रणाली में तकनीक के अधिकतम उपयोग को बढ़ावा देने के उपाय सुझाएगी। PM मोदी ने 26 जुलाई को वीडियो संदेश में इसकी घोषणा की और कहा कि इससे छात्रों के भविष्य को सुरक्षित किया जाएगा।
क्या नंदन नीलेकणि का किसी राजनीतिक दल से संबंध है?
नंदन नीलेकणि ने 2014 में कांग्रेस के टिकट पर बेंगलुरु दक्षिण लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था, लेकिन BJP उम्मीदवार अनंत कुमार से हार गए थे। इसके बाद वह सक्रिय राजनीति से दूर रहे हैं।
नंदन नीलेकणि का आधार और डिजिटल इंडिया में क्या योगदान रहा है?
2009 में UIDAI के अध्यक्ष के रूप में नीलेकणि ने आधार परियोजना का नेतृत्व किया, जो दुनिया की सबसे बड़ी बायोमेट्रिक पहचान प्रणाली बनी। इसके अलावा UPI, FASTag और GST जैसी डिजिटल प्रणालियों की बुनियाद तैयार करने में भी उनकी केंद्रीय भूमिका रही।
परीक्षा सुधार पर संसद में क्या होने वाला है?
PM मोदी ने घोषणा की कि परीक्षा प्रणाली में कठोर कानून बनाने के लिए सोमवार को संसद में चर्चा की जाएगी। यह कदम देश में परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर उठे सवालों के बीच उठाया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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