परीक्षा सुधार टास्क फोर्स पर कांग्रेस का हमला: 'नीलेकणि पैनल मोदी की छवि बचाने की कोशिश'
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस ने रविवार, 26 जुलाई 2026 को नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में गठित परीक्षा सुधार टास्क फोर्स पर तीखा हमला बोला और आरोप लगाया कि यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रभावित हुई सार्वजनिक छवि को संभालने की राजनीतिक कोशिश है, न कि वास्तविक सुधार की इच्छाशक्ति। पार्टी ने यह भी सवाल उठाया कि जब 2024 में बनी डॉ. के. राधाकृष्णन समिति की 101 सिफारिशों को अभी तक पूरी तरह लागू नहीं किया गया, तो एक नई समिति का क्या औचित्य है।
कांग्रेस की आलोचना
कांग्रेस सांसद और संचार विभाग के प्रभारी महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर इस टास्क फोर्स के गठन की आलोचना की। उन्होंने लिखा, 'दोस्तों, जून 2024 में नीट-यूजी समेत कई परीक्षाओं में गड़बड़ी के बाद मोदी सरकार ने डॉ. के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति बनाई थी, जिसका उद्देश्य परीक्षाओं को पारदर्शी, सुचारू और निष्पक्ष तरीके से आयोजित करना सुनिश्चित करना था।'
रमेश ने आगे कहा, 'जुलाई 2026 में एक बार फिर नीट-यूजी और अन्य परीक्षाओं में गड़बड़ी के बाद मोदी सरकार ने परीक्षा सुधार पर ध्यान देने के लिए एक 'हाई पावर टास्क फोर्स' का गठन किया है।' उन्होंने आरोप लगाया कि नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता वाली यह टास्क फोर्स आखिरकार प्रधानमंत्री की प्रभावित छवि को सुधारने की कोशिश से अधिक कुछ नहीं है।
एनटीए और सरकार पर सवाल
कांग्रेस ने यह भी उजागर किया कि 2024 और 2026 के बीच पेपर लीक की घटनाओं के दौरान सरकार ने राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) के लिए पूर्णकालिक महानिदेशक तक नियुक्त नहीं किया। आलोचकों का कहना है कि यह प्रशासनिक उदासीनता दर्शाता है और नई टास्क फोर्स का गठन उसी पैटर्न का हिस्सा है — समस्या हल करने की बजाय दिखावटी कार्रवाई।
टास्क फोर्स का गठन और संरचना
इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन्फोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में परीक्षा सुधारों के लिए टास्क फोर्स बनाने की घोषणा की थी। प्रधानमंत्री ने कहा था कि टास्क फोर्स की रिपोर्ट के आधार पर आने वाली परीक्षाओं की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए जाएंगे।
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, आधार परियोजना में प्रमुख भूमिका निभाने वाले तकनीकी विशेषज्ञ नंदन नीलेकणि के अलावा टास्क फोर्स में इसरो के पूर्व अध्यक्ष एस. सोमनाथ, पूर्व आईबी निदेशक तपन डेका, आईआईटी चेन्नई के निदेशक वी. कामकोटि, पूर्व शिक्षा सचिव अनीता करवाल और लॉजिस्टिक्स विशेषज्ञ अमृत लाल मीणा भी शामिल होंगे।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
यह टास्क फोर्स उस समय गठित की गई जब पेपर लीक के आरोपों को लेकर छात्रों का आंदोलन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद समाप्त हुआ। गौरतलब है कि यह दूसरी बार है जब सरकार ने परीक्षा विवाद के बाद उच्चस्तरीय समिति का सहारा लिया है — पहली बार जून 2024 में और अब जुलाई 2026 में।
आगे क्या
अब सवाल यह है कि क्या नई टास्क फोर्स वह काम करेगी जो राधाकृष्णन समिति की 101 सिफारिशें अब तक नहीं कर सकीं। छात्र संगठन और विपक्षी दल इस बार ठोस समयसीमा और जवाबदेही तंत्र की माँग कर रहे हैं।