27 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

परीक्षा सुधार टास्क फोर्स पर कांग्रेस का हमला: 'नीलेकणि पैनल मोदी की छवि बचाने की कोशिश'

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
परीक्षा सुधार टास्क फोर्स पर कांग्रेस का हमला: 'नीलेकणि पैनल मोदी की छवि बचाने की कोशिश'

सारांश

कांग्रेस का आरोप है कि नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में बनी परीक्षा सुधार टास्क फोर्स असल में मोदी की प्रभावित छवि को संभालने की कोशिश है। जयराम रमेश ने याद दिलाया कि 2024 में बनी राधाकृष्णन समिति की 101 सिफारिशें अभी तक पूरी तरह लागू नहीं हुई हैं।

मुख्य बातें

कांग्रेस ने 26 जुलाई 2026 को नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में गठित परीक्षा सुधार टास्क फोर्स की आलोचना की।
जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि यह टास्क फोर्स प्रधानमंत्री मोदी की प्रभावित छवि सुधारने की कोशिश है।
जून 2024 में बनी डॉ.
राधाकृष्णन समिति की 101 सिफारिशें अभी तक पूरी तरह लागू नहीं हुईं।
2024–2026 के बीच पेपर लीक के बावजूद एनटीए में पूर्णकालिक महानिदेशक नियुक्त नहीं किया गया।
सोमनाथ , तपन डेका , वी.
कामकोटि , अनीता करवाल और अमृत लाल मीणा शामिल।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद छात्र आंदोलन समाप्त होने पर टास्क फोर्स का गठन किया गया।

कांग्रेस ने रविवार, 26 जुलाई 2026 को नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में गठित परीक्षा सुधार टास्क फोर्स पर तीखा हमला बोला और आरोप लगाया कि यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रभावित हुई सार्वजनिक छवि को संभालने की राजनीतिक कोशिश है, न कि वास्तविक सुधार की इच्छाशक्ति। पार्टी ने यह भी सवाल उठाया कि जब 2024 में बनी डॉ. के. राधाकृष्णन समिति की 101 सिफारिशों को अभी तक पूरी तरह लागू नहीं किया गया, तो एक नई समिति का क्या औचित्य है।

कांग्रेस की आलोचना

कांग्रेस सांसद और संचार विभाग के प्रभारी महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर इस टास्क फोर्स के गठन की आलोचना की। उन्होंने लिखा, 'दोस्तों, जून 2024 में नीट-यूजी समेत कई परीक्षाओं में गड़बड़ी के बाद मोदी सरकार ने डॉ. के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति बनाई थी, जिसका उद्देश्य परीक्षाओं को पारदर्शी, सुचारू और निष्पक्ष तरीके से आयोजित करना सुनिश्चित करना था।'

रमेश ने आगे कहा, 'जुलाई 2026 में एक बार फिर नीट-यूजी और अन्य परीक्षाओं में गड़बड़ी के बाद मोदी सरकार ने परीक्षा सुधार पर ध्यान देने के लिए एक 'हाई पावर टास्क फोर्स' का गठन किया है।' उन्होंने आरोप लगाया कि नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता वाली यह टास्क फोर्स आखिरकार प्रधानमंत्री की प्रभावित छवि को सुधारने की कोशिश से अधिक कुछ नहीं है।

एनटीए और सरकार पर सवाल

कांग्रेस ने यह भी उजागर किया कि 2024 और 2026 के बीच पेपर लीक की घटनाओं के दौरान सरकार ने राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) के लिए पूर्णकालिक महानिदेशक तक नियुक्त नहीं किया। आलोचकों का कहना है कि यह प्रशासनिक उदासीनता दर्शाता है और नई टास्क फोर्स का गठन उसी पैटर्न का हिस्सा है — समस्या हल करने की बजाय दिखावटी कार्रवाई।

टास्क फोर्स का गठन और संरचना

इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन्फोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में परीक्षा सुधारों के लिए टास्क फोर्स बनाने की घोषणा की थी। प्रधानमंत्री ने कहा था कि टास्क फोर्स की रिपोर्ट के आधार पर आने वाली परीक्षाओं की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए जाएंगे।

एक आधिकारिक बयान के अनुसार, आधार परियोजना में प्रमुख भूमिका निभाने वाले तकनीकी विशेषज्ञ नंदन नीलेकणि के अलावा टास्क फोर्स में इसरो के पूर्व अध्यक्ष एस. सोमनाथ, पूर्व आईबी निदेशक तपन डेका, आईआईटी चेन्नई के निदेशक वी. कामकोटि, पूर्व शिक्षा सचिव अनीता करवाल और लॉजिस्टिक्स विशेषज्ञ अमृत लाल मीणा भी शामिल होंगे।

राजनीतिक पृष्ठभूमि

यह टास्क फोर्स उस समय गठित की गई जब पेपर लीक के आरोपों को लेकर छात्रों का आंदोलन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद समाप्त हुआ। गौरतलब है कि यह दूसरी बार है जब सरकार ने परीक्षा विवाद के बाद उच्चस्तरीय समिति का सहारा लिया है — पहली बार जून 2024 में और अब जुलाई 2026 में।

आगे क्या

अब सवाल यह है कि क्या नई टास्क फोर्स वह काम करेगी जो राधाकृष्णन समिति की 101 सिफारिशें अब तक नहीं कर सकीं। छात्र संगठन और विपक्षी दल इस बार ठोस समयसीमा और जवाबदेही तंत्र की माँग कर रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

इच्छाशक्ति और जवाबदेही की कमी है। नंदन नीलेकणि की तकनीकी साख निर्विवाद है, लेकिन एनटीए में वर्षों तक पूर्णकालिक महानिदेशक न होना यह दर्शाता है कि संस्थागत उपेक्षा गहरी है। असली परीक्षा यह होगी कि इस बार सरकार टास्क फोर्स की रिपोर्ट को फाइलों में दफन करती है या समयबद्ध तरीके से लागू करती है।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

परीक्षा सुधार टास्क फोर्स क्या है और इसे क्यों बनाया गया?
यह केंद्र सरकार द्वारा गठित एक उच्चस्तरीय टास्क फोर्स है जिसकी अध्यक्षता इन्फोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि कर रहे हैं। इसे जुलाई 2026 में नीट-यूजी और अन्य परीक्षाओं में गड़बड़ी के बाद परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए बनाया गया है।
कांग्रेस ने इस टास्क फोर्स पर क्या आपत्ति जताई है?
कांग्रेस के जयराम रमेश ने आरोप लगाया है कि यह टास्क फोर्स वास्तविक सुधार की बजाय प्रधानमंत्री मोदी की प्रभावित छवि को सुधारने की कोशिश है। पार्टी का कहना है कि 2024 में बनी राधाकृष्णन समिति की 101 सिफारिशें अभी तक पूरी तरह लागू नहीं हुई हैं।
राधाकृष्णन समिति और नई टास्क फोर्स में क्या अंतर है?
डॉ. के. राधाकृष्णन समिति जून 2024 में नीट-यूजी विवाद के बाद बनाई गई थी और उसने 101 सिफारिशें दी थीं। नई टास्क फोर्स जुलाई 2026 में फिर से उसी तरह की गड़बड़ियों के बाद गठित की गई है, जिससे सवाल उठता है कि पहली समिति की सिफारिशें क्यों लागू नहीं हुईं।
टास्क फोर्स में कौन-कौन शामिल हैं?
टास्क फोर्स में नंदन नीलेकणि (अध्यक्ष), इसरो के पूर्व अध्यक्ष एस. सोमनाथ, पूर्व आईबी निदेशक तपन डेका, आईआईटी चेन्नई के निदेशक वी. कामकोटि, पूर्व शिक्षा सचिव अनीता करवाल और लॉजिस्टिक्स विशेषज्ञ अमृत लाल मीणा शामिल हैं।
एनटीए में पूर्णकालिक महानिदेशक की नियुक्ति क्यों नहीं हुई?
कांग्रेस के अनुसार, 2024 और 2026 के बीच पेपर लीक की घटनाओं के दौरान भी सरकार ने राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी के लिए पूर्णकालिक महानिदेशक नियुक्त नहीं किया। इस पर सरकार की ओर से अभी तक कोई स्पष्टीकरण नहीं आया है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 23 मिनट पहले
  2. 58 मिनट पहले
  3. 1 घंटा पहले
  4. 1 घंटा पहले
  5. 3 घंटे पहले
  6. 3 घंटे पहले
  7. 4 घंटे पहले
  8. 1 महीना पहले