27 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में परीक्षा सुधार कार्यबल: ओडिशा CM माझी ने बताया ऐतिहासिक कदम

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में परीक्षा सुधार कार्यबल: ओडिशा CM माझी ने बताया ऐतिहासिक कदम

सारांश

पेपर लीक विवाद और छात्र आंदोलन के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में परीक्षा सुधार कार्यबल गठित किया। ओडिशा CM माझी ने इसे 'विकसित भारत' की दिशा में ऐतिहासिक पहल बताया। कार्यबल में इसरो प्रमुख सोमनाथ सहित छह विशेषज्ञ शामिल हैं।

मुख्य बातें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन्फोसिस सह-संस्थापक नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में परीक्षा सुधार कार्यबल के गठन की घोषणा की।
ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने एक्स पोस्ट के माध्यम से इस पहल का स्वागत किया और इसे 'विकसित भारत' की परिकल्पना के अनुरूप बताया।
कार्यबल में इसरो के पूर्व अध्यक्ष एस.
सोमनाथ , आईआईटी चेन्नई निदेशक वी.
कामाकोटी , पूर्व शिक्षा सचिव अनीता कारवाल सहित कुल 6 विशेषज्ञ शामिल हैं।
यह गठन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और कथित पेपर लीक के विरुद्ध छात्र आंदोलन समाप्त होने के एक दिन बाद हुआ।
कार्यबल की रिपोर्ट के आधार पर आगामी परीक्षाओं की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए शीघ्र कदम उठाए जाएंगे।

ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने 27 जुलाई 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा परीक्षा सुधारों पर गठित उच्चस्तरीय कार्यबल का स्वागत किया और इसे भारत की शिक्षा प्रणाली को पारदर्शी एवं भविष्य-सक्षम बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल करार दिया। इन्फोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में गठित यह कार्यबल परीक्षाओं की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए सिफारिशें तैयार करेगा।

मुख्यमंत्री माझी की प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री माझी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा एक पोस्ट में कहा कि नंदन नीलेकणी के नेतृत्व में इस कार्यबल का गठन परीक्षा प्रणाली में योग्यता, निष्पक्षता और उत्कृष्टता की रक्षा के प्रति प्रधानमंत्री की अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि भारत के छात्रों का भविष्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सर्वोपरि प्राथमिकता रही है।

माझी ने आगे कहा कि यह पहल लाखों छात्रों के विश्वास को मजबूत करेगी और 'विकसित भारत' की परिकल्पना को आगे बढ़ाने में सहायक होगी।

कार्यबल का गठन और पृष्ठभूमि

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को एक वीडियो संदेश के माध्यम से इस कार्यबल के गठन की घोषणा की। यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद कथित पेपर लीक के विरुद्ध छात्रों का आंदोलन समाप्त हुआ था। गौरतलब है कि आधार संख्या के सूत्रधार के रूप में पहचाने जाने वाले नंदन नीलेकणी को इस संवेदनशील जिम्मेदारी के लिए चुना गया है, जो प्रौद्योगिकी-आधारित समाधानों की ओर सरकार के झुकाव को दर्शाता है।

कार्यबल की संरचना

आधिकारिक बयान के अनुसार, कार्यबल में नंदन नीलेकणी के अतिरिक्त निम्नलिखित विशेषज्ञ शामिल हैं:

इसरो के पूर्व अध्यक्ष एस. सोमनाथ, सूचना एवं संचार सूचना विभाग के पूर्व निदेशक तपन डेका, आईआईटी चेन्नई के निदेशक वी. कामाकोटी, पूर्व शिक्षा सचिव अनीता कारवाल और रसद विशेषज्ञ अमृत लाल मीना। यह संरचना तकनीकी, प्रशासनिक और शैक्षणिक दृष्टिकोणों का संतुलन दर्शाती है।

कार्यबल का उद्देश्य और आगे की राह

प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट किया कि कार्यबल की रिपोर्ट के आधार पर आगामी परीक्षाओं की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए जल्द से जल्द कदम उठाए जाएंगे। यह पहल ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब देशभर में परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता को लेकर छात्रों और अभिभावकों में गहरी चिंता व्याप्त है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रौद्योगिकी-सक्षम निगरानी तंत्र ही भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने का स्थायी समाधान हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह कार्यबल केवल डिजिटल निगरानी तक सीमित रहेगा या परीक्षा एजेंसियों की संरचनागत खामियों को भी संबोधित करेगा। पेपर लीक की घटनाएँ वर्षों से दोहराई जा रही हैं — यह तीसरी या चौथी बार है जब किसी उच्चस्तरीय समिति का गठन हुआ है, पर पिछली समितियों की सिफारिशें लागू होने की गति धीमी रही है। छात्र आंदोलन के दबाव में लिया गया यह निर्णय स्वागत योग्य है, किंतु इसकी सफलता कार्यबल की रिपोर्ट की समयबद्ध प्रस्तुति और उसके क्रियान्वयन की पारदर्शिता पर निर्भर करेगी।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

परीक्षा सुधार कार्यबल क्या है और इसका गठन क्यों हुआ?
यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा गठित उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति है, जिसकी अध्यक्षता इन्फोसिस सह-संस्थापक नंदन नीलेकणी करेंगे। इसका उद्देश्य परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करना है, विशेषकर कथित पेपर लीक की घटनाओं के बाद उठे सवालों के मद्देनजर।
इस कार्यबल में कौन-कौन से विशेषज्ञ शामिल हैं?
आधिकारिक बयान के अनुसार कार्यबल में नंदन नीलेकणी (अध्यक्ष), इसरो के पूर्व अध्यक्ष एस. सोमनाथ, सूचना एवं संचार विभाग के पूर्व निदेशक तपन डेका, आईआईटी चेन्नई के निदेशक वी. कामाकोटी, पूर्व शिक्षा सचिव अनीता कारवाल और रसद विशेषज्ञ अमृत लाल मीना शामिल हैं।
ओडिशा के मुख्यमंत्री माझी ने इस कार्यबल पर क्या कहा?
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने एक्स पोस्ट में इसे ऐतिहासिक पहल बताया और कहा कि यह लाखों छात्रों के विश्वास को मजबूत करेगी तथा 'विकसित भारत' की परिकल्पना को आगे बढ़ाएगी। उन्होंने इसे प्रधानमंत्री मोदी की छात्रों के भविष्य के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का प्रमाण बताया।
यह कार्यबल किस संदर्भ में गठित किया गया?
यह गठन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और कथित पेपर लीक के विरुद्ध छात्र आंदोलन समाप्त होने के एक दिन बाद किया गया। इस पृष्ठभूमि में सरकार पर परीक्षा प्रणाली में सुधार का दबाव था।
इस कार्यबल की रिपोर्ट का उपयोग कैसे होगा?
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा है कि कार्यबल की रिपोर्ट के आधार पर आगामी परीक्षाओं की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए जल्द से जल्द कदम उठाए जाएंगे। रिपोर्ट प्रस्तुत करने की समयसीमा अभी आधिकारिक रूप से घोषित नहीं की गई है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 घंटा पहले
  2. 1 घंटा पहले
  3. 2 घंटे पहले
  4. 4 घंटे पहले
  5. 4 घंटे पहले
  6. 5 घंटे पहले
  7. 1 सप्ताह पहले
  8. 10 महीने पहले