नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में परीक्षा सुधार कार्यबल: ओडिशा CM माझी ने बताया ऐतिहासिक कदम
सारांश
मुख्य बातें
ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने 27 जुलाई 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा परीक्षा सुधारों पर गठित उच्चस्तरीय कार्यबल का स्वागत किया और इसे भारत की शिक्षा प्रणाली को पारदर्शी एवं भविष्य-सक्षम बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल करार दिया। इन्फोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में गठित यह कार्यबल परीक्षाओं की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए सिफारिशें तैयार करेगा।
मुख्यमंत्री माझी की प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री माझी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा एक पोस्ट में कहा कि नंदन नीलेकणी के नेतृत्व में इस कार्यबल का गठन परीक्षा प्रणाली में योग्यता, निष्पक्षता और उत्कृष्टता की रक्षा के प्रति प्रधानमंत्री की अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि भारत के छात्रों का भविष्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सर्वोपरि प्राथमिकता रही है।
माझी ने आगे कहा कि यह पहल लाखों छात्रों के विश्वास को मजबूत करेगी और 'विकसित भारत' की परिकल्पना को आगे बढ़ाने में सहायक होगी।
कार्यबल का गठन और पृष्ठभूमि
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को एक वीडियो संदेश के माध्यम से इस कार्यबल के गठन की घोषणा की। यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद कथित पेपर लीक के विरुद्ध छात्रों का आंदोलन समाप्त हुआ था। गौरतलब है कि आधार संख्या के सूत्रधार के रूप में पहचाने जाने वाले नंदन नीलेकणी को इस संवेदनशील जिम्मेदारी के लिए चुना गया है, जो प्रौद्योगिकी-आधारित समाधानों की ओर सरकार के झुकाव को दर्शाता है।
कार्यबल की संरचना
आधिकारिक बयान के अनुसार, कार्यबल में नंदन नीलेकणी के अतिरिक्त निम्नलिखित विशेषज्ञ शामिल हैं:
इसरो के पूर्व अध्यक्ष एस. सोमनाथ, सूचना एवं संचार सूचना विभाग के पूर्व निदेशक तपन डेका, आईआईटी चेन्नई के निदेशक वी. कामाकोटी, पूर्व शिक्षा सचिव अनीता कारवाल और रसद विशेषज्ञ अमृत लाल मीना। यह संरचना तकनीकी, प्रशासनिक और शैक्षणिक दृष्टिकोणों का संतुलन दर्शाती है।
कार्यबल का उद्देश्य और आगे की राह
प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट किया कि कार्यबल की रिपोर्ट के आधार पर आगामी परीक्षाओं की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए जल्द से जल्द कदम उठाए जाएंगे। यह पहल ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब देशभर में परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता को लेकर छात्रों और अभिभावकों में गहरी चिंता व्याप्त है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रौद्योगिकी-सक्षम निगरानी तंत्र ही भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने का स्थायी समाधान हो सकता है।