11 अगस्त 2026
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सूरत में ₹16 करोड़ के 'नारी संरक्षण गृह' की आधारशिला, 101 पीड़ित महिलाओं को मिलेगा आश्रय

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सूरत में ₹16 करोड़ के 'नारी संरक्षण गृह' की आधारशिला, 101 पीड़ित महिलाओं को मिलेगा आश्रय

सारांश

गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने सूरत में ₹16 करोड़ की लागत से बनने वाले 'नारी संरक्षण गृह' की आधारशिला रखी — जो 101 पीड़ित महिलाओं को आश्रय देगा। साथ ही हलपति और आदिवासी समुदायों के आवास अधिकारों पर भी महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक हुई।

मुख्य बातें

उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने 20 जून 2026 को सूरत के घोड़दौड़ रोड पर ₹16 करोड़ के 'नारी संरक्षण गृह' की आधारशिला रखी।
नया 'जी प्लस 2' आश्रय गृह एक साथ 101 महिलाओं को आश्रय दे सकेगा — घरेलू हिंसा व शोषण पीड़ितों के लिए।
वर्तमान में अंबोली, कामरेज तालुका के जननिधाम कैंपस में 24 महिलाएँ और 1 बच्चा आश्रय में हैं।
हलपति हाउसिंग स्कीम की समीक्षा में जिला प्रशासन, सूरत नगर निगम, जिला पंचायत और हलपति हाउसिंग बोर्ड की संयुक्त समिति बनाने का निर्णय।
प्रधानमंत्री स्वामित्व योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को संपत्ति दस्तावेज़ शीघ्र जारी करने के निर्देश दिए गए।

गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने 20 जून 2026 को सूरत के घोड़दौड़ रोड पर ₹16 करोड़ की अनुमानित लागत से निर्मित होने वाले 'नारी संरक्षण गृह' की आधारशिला रखी। यह आश्रय गृह हिंसा और शोषण की शिकार महिलाओं को तत्काल सुरक्षा एवं पुनर्वास सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से बनाया जा रहा है।

नई सुविधा की मुख्य विशेषताएँ

प्रस्तावित 'जी प्लस 2' संरचना में एक साथ 101 महिलाओं के रहने की क्षमता होगी। अधिकारियों के अनुसार, इस केंद्र का मकसद घरेलू हिंसा, लिंग-आधारित हिंसा और अन्य प्रकार के उत्पीड़न से पीड़ित महिलाओं को त्वरित सुरक्षा उपलब्ध कराना है। वर्तमान में कामरेज तालुका के अंबोली स्थित जननिधाम कैंपस में संचालित नारी संरक्षण गृह में 24 महिलाएँ और एक बच्चा आश्रय ले रहे हैं। निर्माण पूरा होने के बाद इन सभी को नई सुविधा में स्थानांतरित किए जाने की योजना है।

हलपति हाउसिंग स्कीम की समीक्षा

आधारशिला समारोह के बाद उपमुख्यमंत्री संघवी ने सूरत कलेक्टर कार्यालय में 'हलपति हाउसिंग स्कीम' की प्रगति पर एक विस्तृत समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में सूरत शहर और सूरत अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी (SUDA) क्षेत्रों में हलपति और आदिवासी समुदायों के लिए घर आवंटन, भूमि स्वामित्व और विरासत अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गई।

बैठक में उन मामलों की विशेष समीक्षा हुई जिनमें पात्र लाभार्थी प्रशासनिक या तकनीकी अड़चनों के कारण योजना का लाभ नहीं उठा सके। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब राज्य सरकार हाशिये पर खड़े समुदायों को भूमि अधिकार दिलाने की दिशा में सक्रिय कदम उठा रही है।

संयुक्त समिति का गठन

बैठक में यह निर्णय लिया गया कि जिला प्रशासन, सूरत नगर निगम, जिला पंचायत और हलपति हाउसिंग बोर्ड के प्रतिनिधियों को मिलाकर एक संयुक्त समिति गठित की जाएगी। यह समिति लंबित आवेदनों में आ रही रुकावटों की पहचान कर उनका समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करेगी।

अधिकारियों को प्रॉपर्टी कार्ड जारी करने की प्रक्रिया में तेज़ी लाने, प्रशासनिक खामियों को दूर करने और लंबे समय से अटके विरासत के मामलों को सुलझाने के लिए आवश्यक कानूनी परामर्श देने के निर्देश दिए गए।

प्रधानमंत्री स्वामित्व योजना की भी समीक्षा

बैठक के दौरान जिले में प्रधानमंत्री स्वामित्व योजना के क्रियान्वयन की भी समीक्षा की गई। इसमें पात्र लाभार्थियों को भूमि और संपत्ति के स्वामित्व दस्तावेज़ शीघ्र जारी करने पर विशेष ज़ोर दिया गया। गौरतलब है कि स्वामित्व योजना ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में भूमि अधिकारों को औपचारिक रूप देने की केंद्र सरकार की एक प्रमुख पहल है।

आगे की राह

नारी संरक्षण गृह का निर्माण पूरा होते ही सूरत को महिला सुरक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचा प्राप्त होगा। साथ ही संयुक्त समिति के गठन से हलपति और आदिवासी समुदायों के लंबित आवास मामलों के शीघ्र निपटारे की उम्मीद जगी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि निर्माण की समय-सीमा और संचालन की गुणवत्ता सुनिश्चित कैसे होगी — क्योंकि देश भर में ऐसे कई शेल्टर होम कागज़ पर मज़बूत दिखते हैं, पर ज़मीन पर कर्मचारियों की कमी और फंडिंग की अनियमितता से जूझते हैं। हलपति और आदिवासी समुदायों के आवास अधिकारों पर बैठक महत्वपूर्ण है, लेकिन 'संयुक्त समिति' के गठन की घोषणाएँ अक्सर नौकरशाही की देरी को और लंबा खींच देती हैं। स्वामित्व योजना की समीक्षा सकारात्मक संकेत है, पर लाभार्थियों तक दस्तावेज़ पहुँचने की वास्तविक गति ही इस बैठक की सार्थकता तय करेगी।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सूरत का 'नारी संरक्षण गृह' क्या है और इसमें क्या सुविधाएँ होंगी?
यह सूरत के घोड़दौड़ रोड पर ₹16 करोड़ की लागत से बनने वाला 'जी प्लस 2' महिला आश्रय गृह है, जिसमें एक साथ 101 महिलाओं के रहने की क्षमता होगी। यह केंद्र घरेलू हिंसा, लिंग-आधारित हिंसा और अन्य प्रकार के शोषण से पीड़ित महिलाओं को तत्काल सुरक्षा और पुनर्वास सहायता प्रदान करेगा।
अभी सूरत में महिलाओं के लिए कौन-सा आश्रय गृह संचालित है?
वर्तमान में कामरेज तालुका के अंबोली स्थित जननिधाम कैंपस में नारी संरक्षण गृह चल रहा है, जहाँ 24 महिलाएँ और एक बच्चा आश्रय ले रहे हैं। नया भवन तैयार होने के बाद इन सभी को नई सुविधा में स्थानांतरित किए जाने की योजना है।
हलपति हाउसिंग स्कीम क्या है और इसकी समीक्षा क्यों की गई?
हलपति हाउसिंग स्कीम गुजरात सरकार की एक आवास योजना है, जो हलपति और आदिवासी समुदायों को घर आवंटन, भूमि स्वामित्व और विरासत अधिकार दिलाने के लिए बनाई गई है। 20 जून की बैठक में उन लंबित मामलों की समीक्षा हुई जिनमें पात्र लाभार्थियों को प्रशासनिक या तकनीकी अड़चनों के कारण अब तक लाभ नहीं मिल सका था।
हलपति हाउसिंग स्कीम की रुकावटें दूर करने के लिए क्या कदम उठाए गए?
जिला प्रशासन, सूरत नगर निगम, जिला पंचायत और हलपति हाउसिंग बोर्ड के प्रतिनिधियों की एक संयुक्त समिति बनाने का निर्णय लिया गया है। अधिकारियों को प्रॉपर्टी कार्ड शीघ्र जारी करने और लंबित विरासत मामलों के निपटारे के लिए कानूनी परामर्श देने के निर्देश दिए गए।
प्रधानमंत्री स्वामित्व योजना का सूरत में क्या हाल है?
20 जून की बैठक में सूरत जिले में प्रधानमंत्री स्वामित्व योजना के क्रियान्वयन की भी समीक्षा हुई। अधिकारियों को पात्र लाभार्थियों को भूमि और संपत्ति के स्वामित्व दस्तावेज़ जल्द से जल्द जारी करने पर ज़ोर देने के निर्देश दिए गए।
राष्ट्र प्रेस
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