गुजरात आईपीएस एसोसिएशन ने चुनाव आयोग को ज्ञापन सौंपा, AAP विधायक गोपाल इटालिया पर कार्रवाई की मांग
सारांश
Key Takeaways
- गुजरात आईपीएस एसोसिएशन ने २७ अप्रैल २०२६ को राज्य चुनाव आयोग को ज्ञापन सौंपा।
- AAP विधायक गोपाल इटालिया ने २६ अप्रैल को फेसबुक लाइव में पुलिस अधिकारियों पर कथित रूप से भड़काऊ टिप्पणियां कीं।
- एसोसिएशन के अध्यक्ष ज्ञानेंद्र सिंह मलिक और सचिव निपुणा एम. तोरावणे ने ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।
- टिप्पणियों को आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन और जनता में अविश्वास फैलाने का प्रयास बताया गया।
- ज्ञापन की प्रतियां गृह विभाग के प्रधान सचिव और पुलिस महानिदेशक को भी भेजी गईं।
गांधीनगर, २७ अप्रैल — गुजरात आईपीएस एसोसिएशन ने सोमवार को राज्य चुनाव आयोग को एक औपचारिक ज्ञापन सौंपते हुए आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक गोपाल इटालिया द्वारा सोशल मीडिया पर की गई टिप्पणियों को लेकर सख्त कार्रवाई की मांग की है। एसोसिएशन ने इन टिप्पणियों को पुलिस बल और चुनाव अधिकारियों के प्रति 'अपमानजनक, निंदनीय और मानहानिकारक' करार दिया है।
मुख्य घटनाक्रम: फेसबुक लाइव से उठा विवाद
यह पूरा विवाद २६ अप्रैल को गोपाल इटालिया द्वारा किए गए एक फेसबुक लाइव वीडियो के बाद सामने आया, जो बाद में विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर तेज़ी से फैल गया। कथित तौर पर इस वीडियो में इटालिया ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और कर्मियों के बारे में 'अत्यंत भड़काऊ भाषा' का इस्तेमाल किया। प्रसारण के विवरणों के अनुसार, विधायक ने पुलिस और चुनाव अधिकारियों के कुछ विभागों की कार्यप्रणाली और निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए तथा राजनीतिक गतिविधियों और प्रवर्तन कार्रवाइयों में पक्षपात का आरोप लगाया।
गौरतलब है कि यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब राज्य में चुनावी माहौल चरम पर है और आदर्श आचार संहिता लागू है। ऐसे संवेदनशील दौर में किसी निर्वाचित प्रतिनिधि द्वारा सुरक्षा बल पर इस तरह के आरोप गंभीर प्रश्न खड़े करते हैं।
ज्ञापन में क्या कहा गया
अहमदाबाद पुलिस आयुक्त एवं एसोसिएशन के अध्यक्ष ज्ञानेंद्र सिंह मलिक और सचिव निपुणा एम. तोरावणे द्वारा हस्ताक्षरित इस ज्ञापन में स्पष्ट किया गया है कि सार्वजनिक संस्थानों की आलोचना लोकतांत्रिक व्यवस्था का एक वैध हिस्सा है, किंतु 'चरित्र हनन किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है'। ज्ञापन में इन टिप्पणियों को बल के सदस्यों का 'व्यक्तिगत अपमान' और चुनाव काल में पुलिस व चुनाव तंत्र दोनों के प्रति 'जनता में अविश्वास भड़काने का सुनियोजित प्रयास' बताया गया है।
एसोसिएशन ने यह भी रेखांकित किया कि पुलिसकर्मी अत्यंत चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में कार्य करते हैं और उन पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने तथा सभी नागरिकों को निष्पक्ष सुरक्षा प्रदान करने की जिम्मेदारी है — विशेषकर चुनावों के दौरान।
आदर्श आचार संहिता उल्लंघन का आरोप
एसोसिएशन ने इन टिप्पणियों को आदर्श आचार संहिता का सीधा उल्लंघन बताते हुए चुनाव आयोग से विधायक के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग की है। संगठन का तर्क है कि ऐसे बयान स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने वाले संस्थानों में जनता के विश्वास को कमज़ोर करते हैं और चुनाव ड्यूटी में तैनात अधिकारियों का मनोबल गिराते हैं। यह पहली बार नहीं है जब किसी राज्य में पुलिस संगठन ने किसी नेता की भाषा को लेकर औपचारिक शिकायत दर्ज कराई हो, लेकिन चुनावी मौसम में ऐसा कदम विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण माना जा रहा है।
किन अधिकारियों को भेजी गई प्रतियां
इस ज्ञापन की प्रतियां गृह विभाग के प्रधान सचिव और गुजरात के पुलिस महानिदेशक एवं महानिरीक्षक को भी प्रेषित की गई हैं, जो इस मामले की गंभीरता को दर्शाता है। एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि वह इस मुद्दे पर उचित कार्रवाई होने तक अपनी आवाज़ उठाती रहेगी।
आने वाले दिनों में चुनाव आयोग इस ज्ञापन पर क्या रुख अपनाता है, यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा — क्योंकि इसका असर न केवल इस मामले पर, बल्कि चुनावी काल में निर्वाचित प्रतिनिधियों की जवाबदेही पर भी पड़ेगा।