गुजरात पुलिस का 'ऑपरेशन डेल्टा हंट': 568 कथित अवैध बांग्लादेशी नागरिक गिरफ्तार, अभियान जारी
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात पुलिस ने 'ऑपरेशन डेल्टा हंट' के तहत राज्य में कथित तौर पर अवैध रूप से रह रहे 568 बांग्लादेशी नागरिकों को हिरासत में लिया है। 5 जून 2026 को सुबह 8 बजे IST तक दर्ज आँकड़ों के अनुसार, यह अभियान डिप्टी मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री हर्ष संघवी की प्रत्यक्ष देखरेख में पूरे गुजरात में एक साथ संचालित किया गया। हिरासत में लिए गए लोगों में 172 पुरुष, 282 महिलाएँ और 114 बच्चे शामिल हैं।
अभियान का विस्तार और आँकड़े
यह अभियान 3 जून 2026 को शुरू हुआ, जब पुलिस ने पहले दिन 362 संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिकों को हिरासत में लिया। 4 जून को यह संख्या बढ़कर 501 हो गई और 5 जून की सुबह तक 568 तक पहुँच गई। अधिकारियों के अनुसार, वेरिफिकेशन प्रक्रिया के तहत सैकड़ों अन्य संदिग्धों से भी पूछताछ जारी है।
खुफिया तंत्र और तकनीकी निगरानी
पुलिस के अनुसार, छापेमारी शुरू होने से पहले टेलीकॉम एनालिसिस, तकनीकी निगरानी, ह्यूमन इंटेलिजेंस और फील्ड वेरिफिकेशन के माध्यम से 6,200 से अधिक संदिग्ध व्यक्तियों का डेटाबेस तैयार किया गया था। अभियान के प्रारंभिक चरण में संदिग्धों को लक्षित क्षेत्रों से बाहर जाने से रोकने के लिए बस स्टेशनों, हाईवे और रेलवे स्टेशनों पर चेकपॉइंट स्थापित किए गए थे।
नेटवर्क की जाँच
जाँचकर्ता उन कथित नेटवर्कों की भी पड़ताल कर रहे हैं, जिन्होंने राज्य में कथित तौर पर अवैध रूप से रह रहे लोगों के लिए रहने की जगह, रोज़गार और दस्तावेज़ों की व्यवस्था की। राज्य के अधिकारियों ने बताया कि विशेष टीमें अन्य संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान की पुष्टि करने और मामले से जुड़े स्थानों की जाँच कर रही हैं।
सरकार की प्रतिक्रिया
गृह मंत्री हर्ष संघवी ने राज्य सरकार के एक बयान में कहा कि 'राज्य की सुरक्षा और शांति से कोई समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि घुसपैठ और अनधिकृत बसावट के विरुद्ध इसी तरह के अभियान भविष्य में भी जारी रहेंगे। सरकार ने बताया कि हिरासत में लिए गए लोगों के खिलाफ लागू कानूनों के अनुसार कानूनी कार्यवाही शुरू कर दी गई है।
आगे क्या होगा
गौरतलब है कि कई जिलों में तलाशी और वेरिफिकेशन अभियान अभी भी जारी हैं, और हिरासत की संख्या में और वृद्धि की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। यह अभियान ऐसे समय में आया है जब केंद्र और विभिन्न राज्य सरकारें अवैध प्रवासन के मुद्दे पर सख्त रुख अपना रही हैं।