गुजरात में PMFBY लागू क्यों नहीं? कांग्रेस ने भूपेंद्र पटेल सरकार से माँगा जवाब
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात कांग्रेस ने 30 जून 2026 को अहमदाबाद में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में राज्य की भूपेंद्र पटेल सरकार पर सीधा निशाना साधा और पूछा कि केंद्रीय कृषि मंत्रालय के बार-बार आग्रह के बावजूद प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) को गुजरात में लागू क्यों नहीं किया गया। पार्टी ने माँग की कि राज्य सरकार इस चूक के लिए किसानों से माफी माँगे और योजना तत्काल प्रभाव से लागू करे।
पत्रों से खुलासा
कांग्रेस के प्रवक्ता और पूर्व राज्यसभा सांसद शक्तिसिंह गोहिल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल को लिखे पत्रों की प्रतियाँ सार्वजनिक कीं। गोहिल के अनुसार, 25 नवंबर 2025 को लिखे एक पत्र में केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया था कि देश के लगभग सभी राज्य PMFBY लागू कर रहे हैं और इस योजना ने बेमौसम बारिश, अत्यधिक वर्षा तथा अन्य प्राकृतिक आपदाओं के दौरान किसानों को बड़ी राहत दी है।
गोहिल ने दावा किया, 'पूरा देश फसल बीमा योजना का लाभ ले रहा है, लेकिन गुजरात सरकार ने बार-बार अनुरोध के बावजूद इसे स्वीकार नहीं किया।' उनके अनुसार, गुजरात देश का एकमात्र राज्य है जहाँ यह केंद्रीय योजना लागू नहीं है।
राज्यसभा में उठाया था मुद्दा
गोहिल ने बताया कि उन्होंने 5 दिसंबर 2025 को राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान गुजरात में बेमौसम बारिश से प्रभावित किसानों को मुआवजे का मुद्दा उठाया था। इसके जवाब में केंद्र सरकार ने लिखित रूप से स्वीकार किया था कि गुजरात सरकार के PMFBY न अपनाने के कारण केंद्र इस योजना के माध्यम से गुजरात के किसानों को मुआवजा देने में असमर्थ है।
किसानों को करोड़ों का नुकसान
गोहिल ने दावा किया कि पिछले वर्ष बेमौसम भारी बारिश के कारण किसानों को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ। उन्होंने कहा, 'अगर राज्य सरकार ने PMFBY लागू की होती तो किसानों को पूरा मुआवजा मिल सकता था। इसके बजाय राज्य सरकार ने केवल कुछ सीमित क्षेत्रों के किसानों को इतना सीमित मुआवजा दिया, जो बीज और खेती की लागत निकालने के लिए भी पर्याप्त नहीं था।'
गौरतलब है कि केंद्रीय मंत्री के पत्र में PMFBY को बुआई से लेकर फसल कटाई तक के नुकसान पर मुआवजा देने वाली योजना बताया गया था, जो सभी फसलों के साथ-साथ सब्जियों और पेड़ों को हुई क्षति पर भी सहायता प्रदान करती है।
गुजरात सरकार का पक्ष
उल्लेखनीय है कि गुजरात सरकार ने 2020 में PMFBY से बाहर निकलते हुए इसके विकल्प के रूप में मुख्यमंत्री किसान सहाय योजना शुरू की थी। राज्य सरकार का तर्क था कि बीमा कंपनियों द्वारा अधिक प्रीमियम दरें माँगे जाने के कारण यह निर्णय लिया गया। मुख्यमंत्री किसान सहाय योजना के तहत किसानों को प्राकृतिक आपदाओं से फसल नुकसान होने पर बिना किसी बीमा प्रीमियम के वित्तीय सहायता दी जाती है, और राहत कार्य राज्य आपदा मोचन कोष के माध्यम से किए जाते हैं।
कांग्रेस की माँगें और आगे का रास्ता
कांग्रेस ने माँग की कि राज्य सरकार स्पष्ट करे कि 2019-20 से गुजरात के किसान PMFBY से बाहर क्यों हैं और पिछले वर्ष हुए नुकसान का पूरा मुआवजा दिया जाए। मानसून में संभावित देरी और एल नीनो के प्रभाव का हवाला देते हुए पार्टी ने बिना देरी किए योजना लागू करने की अपील की। यह राजनीतिक विवाद ऐसे समय में उभरा है जब खरीफ बुआई का मौसम शुरू हो रहा है और किसानों के लिए फसल सुरक्षा की माँग तेज़ हो रही है।