गुजरात: सीएम पटेल ने कांग्रेस पर लगाया महिलाओं का विरोध करने का आरोप
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गांधीनगर, 19 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने रविवार को कहा कि जो भी शक्तियां महिलाओं का विरोध करती हैं, वे न कभी बची हैं और न ही भविष्य में बच पाएंगी।
यह बयान उन्होंने तब दिया जब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं ने कांग्रेस और उसके सहयोगियों पर 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम संशोधन विधेयक' को संसद में रोकने का आरोप लगाया।
मुख्यमंत्री पटेल ने गांधीनगर में प्रदेश भाजपा मुख्यालय में आयोजित प्रेस बैठक में कहा कि यह प्रस्तावित कानून केवल एक कानून नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था, जिसमें लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान था।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस एक ओर महिलाओं के कल्याण की बात करती है, तो दूसरी ओर उनके कानूनी अधिकारों को रोकने का प्रयास करती है। उनके दोहरे मापदंड अब स्पष्ट हो गए हैं।
केंद्रीय मंत्री और महाराष्ट्र की सांसद रक्षा खडसे ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह विधेयक महिलाओं के अधिकारों और गरिमा को सुनिश्चित करने हेतु लाया गया था, लेकिन इसे लोकसभा में बाधित किया गया।
उन्होंने कहा कि महिला-विरोधी कांग्रेस ने इस विधेयक को रोककर देश की महिलाओं और युवाओं के भविष्य के साथ विश्वासघात किया है। 2023 के कानून में स्पष्ट प्रावधान हैं कि यह केवल परिसीमन के बाद लागू होगा, फिर भी कांग्रेस ने इसे राजनीतिक रंग दिया और महिलाओं के साथ अन्याय किया।
खडसे ने कहा कि यह कदम हर महिला और युवा के लिए था, न कि किसी एक पार्टी के लिए। उन्होंने यह भी बताया कि परिसीमन से लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ेगी। महिलाओं को उम्मीद थी कि कांग्रेस और उसके सहयोगी इस विधेयक का समर्थन करेंगे।
उन्होंने केंद्र सरकार की विभिन्न पहलों का जिक्र किया, जिन्हें उन्होंने महिला सशक्तिकरण की दिशा में उठाए गए कदमों के रूप में वर्णित किया।
खडसे ने कहा, "2014 से काम केवल कागजों पर नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर भी किया गया है। इसमें उज्ज्वला योजना के तहत 11 करोड़ से अधिक परिवारों को गैस कनेक्शन प्रदान करना और स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को सशक्त बनाना शामिल है।"
केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि कई राज्यों ने स्थानीय निकाय चुनावों में महिलाओं को 50 प्रतिशत तक आरक्षण दिया है, फिर भी संसद और विधानसभाओं में उनके प्रतिनिधित्व को बढ़ाने का यह महत्वपूर्ण कदम रोका गया है।
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष जगदीश विश्वकर्मा ने कहा कि संसद में हुए घटनाक्रम न केवल एक विधेयक की हार थे, बल्कि 70 करोड़ माताओं, बहनों और बेटियों के सपनों पर सीधा हमला थे।
उन्होंने कहा कि अपने ही परिवारों की महिलाओं को बढ़ावा देना, जबकि आम महिलाओं का मार्ग रोकना, कांग्रेस की मानसिकता को दर्शाता है। मंत्री ने यह भी कहा कि पार्टी को डर था कि गैर-राजनीतिक पृष्ठभूमि की महिलाएं संसद में आएंगी और 'वंशवादी राजनीति' को चुनौती देंगी।
विश्वकर्मा ने आरोप लगाया कि विपक्षी दलों ने जानबूझकर इस विधेयक को आवश्यक बहुमत हासिल करने से रोका।
उन्होंने कहा, "महिलाओं को सशक्त बनाना हमारे लिए सत्ता का मामला नहीं, बल्कि समानता और अधिकारों का मामला है। पूरे देश की महिलाएं इन घटनाक्रमों को देख रही हैं।"
भाजपा नेताओं ने कहा कि इस कानून का उद्देश्य राजनीतिक सीमाओं से परे महिलाओं के प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित करना था और यह संतुलित निर्वाचन क्षेत्रों को सुनिश्चित करने के लिए परिसीमन प्रक्रिया से जुड़ा था।