गुलमर्ग केबल कार बचाव: 320 फंसे लोगों को 6 घंटे में निकाला, डीजीपी नलिन प्रभात ने कहा — यह सबसे कठिन चुनौती थी
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) नलिन प्रभात ने मंगलवार, 26 मई को कहा कि गुलमर्ग की केबल कार के केबिनों में फंसे 320 लोगों को सुरक्षित निकालना अब तक के सबसे कठिन बचाव अभियानों में से एक था। उन्होंने बचाव दलों के साथ खड़े होकर इस सफलता को अपने लिए गर्व का क्षण बताया।
मुख्य घटनाक्रम
खराब मौसम और दुर्गम पहाड़ी इलाकों के बीच छह घंटे तक चले इस बचाव अभियान में जम्मू-कश्मीर पुलिस, राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ), राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ), भारतीय सेना और स्थानीय बचाव दल ने मिलकर काम किया। गुलमर्ग पुलिस स्टेशन की टीमें सबसे पहले घटनास्थल पर पहुँचीं, जिसके बाद अन्य एजेंसियाँ भी तत्काल जुट गईं।
डीजीपी नलिन प्रभात ने बचाव दलों को संबोधित करते हुए कहा, 'सच कहूं तो, मुझे विश्वास नहीं था कि हम आधी रात से पहले यह काम पूरा कर पाएंगे। आप सबके साथ खड़े होकर मुझे गर्व हो रहा है।'
बचाव की चुनौतियाँ
डीजीपी ने स्पष्ट किया कि जमीनी बचाव कार्य उतना कठिन नहीं था, जितना कि खराब मौसम में ऊँचाई पर केबल कार के केबिनों में फंसे लोगों को निकालना। उन्होंने कहा, 'जम्मू-कश्मीर में हमें हमेशा सबसे कठिन चुनौतियाँ दी गई हैं और हमने हमेशा उन्हें सफलतापूर्वक पूरा किया है।' यह बचाव अभियान पर्वतीय बचाव दल (एमआरटी), विशेष अभियान समूह (एसओजी) और जम्मू-कश्मीर सशस्त्र पुलिस की समन्वित भागीदारी से संभव हो सका।
सम्मान और पुरस्कार की घोषणा
डीजीपी नलिन प्रभात ने घोषणा की कि बचाव अभियान में भाग लेने वाले प्रत्येक कर्मी को उनकी बहादुरी और समर्पण के सम्मान में डीजी प्रशस्ति पदक से नवाज़ा जाएगा। जिन कर्मियों के पास पहले से यह पदक है, उन्हें पदोन्नति सहित अन्य माध्यमों से पुरस्कृत किया जाएगा। उन्होंने कहा, 'आप थके हुए, भूखे-प्यासे हो सकते हैं, लेकिन मुझे यकीन है कि आप सभी खुश हैं क्योंकि आज आपको एक उद्देश्य दिया गया था और आपने उसमें सफलता हासिल की।'
वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति
बचाव अभियान की निगरानी के दौरान डीजीपी के साथ विशेष डीजीपी जावेद मुजतबा गिलानी, विशेष डीजी एवं कमांडेंट जनरल होमगार्ड्स अब्दुल गनी मीर, आईजीपी कश्मीर वीके बर्डी और अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौजूद रहे। इन अधिकारियों की मौजूदगी ने अभियान को उच्च स्तरीय समन्वय और दिशा-निर्देश प्रदान किया।
आगे की राह
यह घटना गुलमर्ग जैसे पर्यटन स्थलों पर आपदा प्रबंधन की तैयारियों की अहमियत को एक बार फिर रेखांकित करती है। इस सफल अभियान के बाद संबंधित एजेंसियों से अपेक्षा है कि वे भविष्य में ऐसी आपात स्थितियों के लिए और अधिक सुदृढ़ प्रोटोकॉल विकसित करेंगी।