11 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

गुलमर्ग केबल कार बचाव: 320 फंसे लोगों को 6 घंटे में निकाला, डीजीपी नलिन प्रभात ने कहा — यह सबसे कठिन चुनौती थी

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
गुलमर्ग केबल कार बचाव: 320 फंसे लोगों को 6 घंटे में निकाला, डीजीपी नलिन प्रभात ने कहा — यह सबसे कठिन चुनौती थी

सारांश

खराब मौसम, ऊँचाई और दुर्गम पहाड़ी इलाके — गुलमर्ग में केबल कार के केबिनों में फंसे 320 लोगों को 6 घंटे में निकालना आसान नहीं था। डीजीपी नलिन प्रभात ने खुद माना कि उन्हें आधी रात से पहले सफलता का भरोसा नहीं था। बचाव दलों को डीजी प्रशस्ति पदक से सम्मानित किया जाएगा।

मुख्य बातें

गुलमर्ग की केबल कार के केबिनों में फंसे 320 लोगों को 6 घंटे के बचाव अभियान में सुरक्षित निकाला गया।
डीजीपी नलिन प्रभात ने इसे जम्मू-कश्मीर की अब तक की सबसे कठिन बचाव चुनौतियों में से एक बताया।
अभियान में जम्मू-कश्मीर पुलिस , एनडीआरएफ , एसडीआरएफ , सेना , एमआरटी और स्थानीय बचाव दल शामिल रहे।
बचाव में भाग लेने वाले प्रत्येक कर्मी को डीजी प्रशस्ति पदक से सम्मानित किया जाएगा।
अभियान की निगरानी विशेष डीजीपी जावेद मुजतबा गिलानी , आईजीपी कश्मीर वीके बर्डी सहित वरिष्ठ अधिकारियों ने की।

जम्मू-कश्मीर के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) नलिन प्रभात ने मंगलवार, 26 मई को कहा कि गुलमर्ग की केबल कार के केबिनों में फंसे 320 लोगों को सुरक्षित निकालना अब तक के सबसे कठिन बचाव अभियानों में से एक था। उन्होंने बचाव दलों के साथ खड़े होकर इस सफलता को अपने लिए गर्व का क्षण बताया।

मुख्य घटनाक्रम

खराब मौसम और दुर्गम पहाड़ी इलाकों के बीच छह घंटे तक चले इस बचाव अभियान में जम्मू-कश्मीर पुलिस, राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ), राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ), भारतीय सेना और स्थानीय बचाव दल ने मिलकर काम किया। गुलमर्ग पुलिस स्टेशन की टीमें सबसे पहले घटनास्थल पर पहुँचीं, जिसके बाद अन्य एजेंसियाँ भी तत्काल जुट गईं।

डीजीपी नलिन प्रभात ने बचाव दलों को संबोधित करते हुए कहा, 'सच कहूं तो, मुझे विश्वास नहीं था कि हम आधी रात से पहले यह काम पूरा कर पाएंगे। आप सबके साथ खड़े होकर मुझे गर्व हो रहा है।'

बचाव की चुनौतियाँ

डीजीपी ने स्पष्ट किया कि जमीनी बचाव कार्य उतना कठिन नहीं था, जितना कि खराब मौसम में ऊँचाई पर केबल कार के केबिनों में फंसे लोगों को निकालना। उन्होंने कहा, 'जम्मू-कश्मीर में हमें हमेशा सबसे कठिन चुनौतियाँ दी गई हैं और हमने हमेशा उन्हें सफलतापूर्वक पूरा किया है।' यह बचाव अभियान पर्वतीय बचाव दल (एमआरटी), विशेष अभियान समूह (एसओजी) और जम्मू-कश्मीर सशस्त्र पुलिस की समन्वित भागीदारी से संभव हो सका।

सम्मान और पुरस्कार की घोषणा

डीजीपी नलिन प्रभात ने घोषणा की कि बचाव अभियान में भाग लेने वाले प्रत्येक कर्मी को उनकी बहादुरी और समर्पण के सम्मान में डीजी प्रशस्ति पदक से नवाज़ा जाएगा। जिन कर्मियों के पास पहले से यह पदक है, उन्हें पदोन्नति सहित अन्य माध्यमों से पुरस्कृत किया जाएगा। उन्होंने कहा, 'आप थके हुए, भूखे-प्यासे हो सकते हैं, लेकिन मुझे यकीन है कि आप सभी खुश हैं क्योंकि आज आपको एक उद्देश्य दिया गया था और आपने उसमें सफलता हासिल की।'

वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति

बचाव अभियान की निगरानी के दौरान डीजीपी के साथ विशेष डीजीपी जावेद मुजतबा गिलानी, विशेष डीजी एवं कमांडेंट जनरल होमगार्ड्स अब्दुल गनी मीर, आईजीपी कश्मीर वीके बर्डी और अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौजूद रहे। इन अधिकारियों की मौजूदगी ने अभियान को उच्च स्तरीय समन्वय और दिशा-निर्देश प्रदान किया।

आगे की राह

यह घटना गुलमर्ग जैसे पर्यटन स्थलों पर आपदा प्रबंधन की तैयारियों की अहमियत को एक बार फिर रेखांकित करती है। इस सफल अभियान के बाद संबंधित एजेंसियों से अपेक्षा है कि वे भविष्य में ऐसी आपात स्थितियों के लिए और अधिक सुदृढ़ प्रोटोकॉल विकसित करेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बताता है कि यह अभियान कितना अनिश्चित था। असली सवाल यह है कि क्या इस घटना के बाद गुलमर्ग गोंडोला जैसे उच्च-क्षमता पर्यटन बुनियादी ढाँचे के लिए मानक आपातकालीन प्रोटोकॉल और नियमित अभ्यास अनिवार्य किए जाएंगे — या यह सफलता केवल एक बार की वीरता बनकर रह जाएगी।
RashtraPress
11 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुलमर्ग केबल कार बचाव अभियान में कितने लोगों को बचाया गया?
गुलमर्ग की केबल कार के केबिनों में फंसे कुल 320 लोगों को सुरक्षित निकाला गया। यह अभियान लगभग 6 घंटे तक चला और खराब मौसम व दुर्गम पहाड़ी इलाकों के बीच पूरा किया गया।
गुलमर्ग बचाव अभियान में कौन-कौन सी एजेंसियाँ शामिल थीं?
इस अभियान में जम्मू-कश्मीर पुलिस, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, भारतीय सेना, विशेष अभियान समूह (एसओजी), पर्वतीय बचाव दल (एमआरटी) और स्थानीय बचाव दल शामिल रहे। गुलमर्ग पुलिस स्टेशन की टीमें सबसे पहले घटनास्थल पर पहुँची थीं।
डीजीपी नलिन प्रभात ने बचाव दलों को क्या पुरस्कार देने की घोषणा की?
डीजीपी नलिन प्रभात ने घोषणा की कि बचाव अभियान में भाग लेने वाले प्रत्येक कर्मी को डीजी प्रशस्ति पदक से सम्मानित किया जाएगा। जिन कर्मियों के पास यह पदक पहले से है, उन्हें पदोन्नति जैसे अन्य माध्यमों से पुरस्कृत किया जाएगा।
गुलमर्ग केबल कार बचाव अभियान इतना कठिन क्यों था?
डीजीपी के अनुसार, जमीनी बचाव की तुलना में खराब मौसम में ऊँचाई पर केबल कार के केबिनों में फंसे लोगों को निकालना कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण था। दुर्गम पहाड़ी इलाके और प्रतिकूल परिस्थितियों ने अभियान को असाधारण रूप से जटिल बना दिया।
बचाव अभियान की निगरानी कौन से वरिष्ठ अधिकारियों ने की?
अभियान की निगरानी डीजीपी नलिन प्रभात के नेतृत्व में विशेष डीजीपी जावेद मुजतबा गिलानी, विशेष डीजी एवं कमांडेंट जनरल होमगार्ड्स अब्दुल गनी मीर और आईजीपी कश्मीर वीके बर्डी ने की।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 सप्ताह पहले
  2. 3 सप्ताह पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 1 महीना पहले
  8. 5 महीने पहले