गुलमर्ग गोंडोला हादसा: भारतीय सेना ने 184 पर्यटकों को सुरक्षित बचाया, 65 केबल कारें प्रभावित
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर के गुलमर्ग में सोमवार, 25 मई 2026 को प्रसिद्ध गुलमर्ग गोंडोला सेवा में तकनीकी खराबी आने से 65 केबल कारों में सवार सैकड़ों पर्यटक हवा में लटक गए। भारतीय सेना, एसडीआरएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस के संयुक्त बचाव अभियान में शाम तक कुल 184 पर्यटकों को सुरक्षित निकाल लिया गया। खराब मौसम, घने बादलों और ठंडी हवाओं के बीच चलाया गया यह रेस्क्यू ऑपरेशन सेना की त्वरित प्रतिक्रिया का उदाहरण बना।
हादसे का घटनाक्रम
गोंडोला की बेस स्टेशन से फेज-1 कोंगडोरी के बीच सेवा अचानक तकनीकी खराबी के कारण रुक गई, जिससे कई पर्यटक हवा में लटकी केबल कारों में फंस गए। स्थिति गंभीर होते ही जम्मू-कश्मीर पुलिस और गोंडोला प्रबंधन प्राधिकरण ने भारतीय सेना से सहायता का अनुरोध किया। सूचना मिलते ही सेना तत्काल सक्रिय हो गई और बुटापथरी बटालियन क्षेत्र से विशेष बचाव दल रवाना किए गए।
बचाव अभियान की रणनीति
सेना ने दुर्गम पहाड़ी रास्तों पर राहत कार्य को गति देने के लिए ऑल-टेरेन व्हीकल (एटीवी) तैनात किए। गुलमर्ग एटीवी एसोसिएशन की अतिरिक्त गाड़ियाँ भी इस अभियान में लगाई गईं, क्योंकि गोंडोला सेवा के शीघ्र सामान्य होने की संभावना नहीं थी। राहत टीमों ने फेज-1 की ओर से 14 केबल कारों को खाली कराया, जबकि बेस स्टेशन की ओर से 12 केबल कारों से पर्यटकों को सुरक्षित बाहर निकाला गया।
बचाव के आँकड़े
सेना के अनुसार, शाम 5.40 बजे तक 148 पर्यटकों को सुरक्षित निकाला जा चुका था। अभियान जारी रहने के साथ अंततः कुल 184 पर्यटकों को सकुशल बाहर निकाल लिया गया। तकनीकी खराबी से प्रभावित कुल 65 केबल कारों में से सभी को खाली कराने का कार्य पूरा किया गया। यह ऑपरेशन खराब मौसम और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद बिना किसी जनहानि के संपन्न हुआ।
जाँच और आगे की कार्रवाई
बचाव अभियान के समानांतर तकनीकी विशेषज्ञों की टीम गोंडोला प्रणाली में आई खराबी की जाँच में जुट गई। गौरतलब है कि गुलमर्ग गोंडोला जम्मू-कश्मीर का प्रमुख पर्यटन आकर्षण है और पर्यटन सीज़न में यहाँ हज़ारों सैलानी प्रतिदिन आते हैं। इस हादसे ने गोंडोला प्रणाली के नियमित तकनीकी रखरखाव और आपातकालीन प्रोटोकॉल पर सवाल खड़े किए हैं। सहायता और निगरानी अभियान लगातार जारी रहा।