गुंटूर के 41 मेधावी छात्रों ने उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन से की मुलाकात, शिक्षा और संघर्ष पर मिला संदेश

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गुंटूर के 41 मेधावी छात्रों ने उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन से की मुलाकात, शिक्षा और संघर्ष पर मिला संदेश

सारांश

आंध्र प्रदेश के गुंटूर के 41 सरकारी स्कूली छात्र — जिनमें 27 छात्राएँ — दिल्ली पहुँचे और उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन से मिले। राधाकृष्णन ने खुद सरकारी स्कूल से पढ़े होने का जिक्र करते हुए कहा कि शिक्षा ही असली बदलाव की ताकत है।

मुख्य बातें

गुंटूर के सरकारी स्कूलों के 41 मेधावी छात्रों ने 21 मई 2026 को उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन से उपराष्ट्रपति भवन में मुलाकात की।
इस समूह में 27 छात्राएँ शामिल थीं, जिसे राधाकृष्णन ने नारी सशक्तिकरण का प्रतीक बताया।
उपराष्ट्रपति ने बताया कि उन्होंने स्वयं सरकारी स्कूल में तमिल माध्यम से पढ़ाई की थी।
छात्रों को तीन सूत्री मंत्र दिया — ईमानदार मेहनत, सफलता में विनम्रता, और ज्ञान का समाज-कल्याण में उपयोग।
उन्होंने सांसदों-विधायकों से सरकारी स्कूलों के सुधार पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया।

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन से आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले के सरकारी स्कूलों के 41 मेधावी छात्रों के एक प्रतिनिधिमंडल ने 21 मई 2026 को उपराष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली में मुलाकात की। इन छात्रों ने कक्षा 10 की परीक्षाओं में असाधारण प्रदर्शन किया था और वे दिल्ली के शैक्षिक दौरे पर आए हुए थे। इस समूह में 27 छात्राएँ शामिल थीं, जिन्हें उपराष्ट्रपति ने नारी सशक्तिकरण का प्रतीक बताया।

दौरे की पृष्ठभूमि और पहल

गरीब और वंचित पृष्ठभूमि से आने वाले इन सरकारी स्कूली छात्रों को राजधानी दिल्ली के शैक्षिक दौरे पर लाने की पहल की उपराष्ट्रपति ने सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे दौरे छात्रों को कक्षा की चारदीवारी से बाहर निकलकर सीखने और अपने ज्ञान का विस्तार करने का अवसर देते हैं। गौरतलब है कि वंचित तबके के होनहार छात्रों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रेरणा देने की यह कोशिश शैक्षिक समानता की दिशा में एक सकारात्मक कदम मानी जा रही है।

उपराष्ट्रपति का प्रेरणादायक संदेश

सीपी राधाकृष्णन ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि जीवन में सफल होने वाले हर व्यक्ति को संघर्ष, असफलता और बाधाओं का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा, 'कठिनाइयाँ किसी व्यक्ति को अधिक मजबूत, अधिक आत्मविश्वासी और सफलता के प्रति अधिक दृढ़संकल्पित बनाती हैं।' छात्रों को उनकी वर्तमान आर्थिक स्थिति से निराश न होने की सलाह देते हुए उन्होंने जोर दिया कि शिक्षा ही उन्हें जीवन में आगे बढ़ने का सबसे बड़ा हथियार देगी।

सरकारी स्कूलों की अहमियत पर जोर

उपराष्ट्रपति ने बताया कि उन्होंने स्वयं एक सरकारी स्कूल में तमिल माध्यम से शिक्षा प्राप्त की थी। उन्होंने कहा कि देश के अनेक महान वैज्ञानिक, प्रशासक, शिक्षक, नवप्रवर्तक, उद्यमी और राजनीतिज्ञ सरकारी स्कूलों और सार्वजनिक संस्थानों की ही देन हैं। उन्होंने सांसदों और विधायकों से आग्रह किया कि वे सरकारी स्कूलों के सुधार और सुदृढ़ीकरण को प्राथमिकता दें।

विकसित भारत और छात्रों की भूमिका

पिछले एक दशक में भारत की आर्थिक प्रगति का उल्लेख करते हुए राधाकृष्णन ने कहा कि भारत विश्व की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक बन चुका है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है, और इस यात्रा में इन छात्रों के सपने और आकांक्षाएँ उतनी ही महत्वपूर्ण हैं।

छात्रों को तीन सूत्री मंत्र

उपराष्ट्रपति ने छात्रों को तीन मूल सिद्धांत सदा याद रखने की सलाह दी — ईमानदारी से कड़ी मेहनत करना, सफलता में विनम्र रहना और अर्जित ज्ञान का उपयोग समाज के कल्याण के लिए करना। उन्होंने यह भी चेताया कि छात्र मादक पदार्थों और हानिकारक व्यसनों से दूर रहें, जिनमें सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग भी शामिल है। उन्होंने खेलकूद, पठन-पाठन और रचनात्मकता को जीवन में प्राथमिकता देने का आह्वान किया।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो यह संदेश नीति-निर्माताओं के लिए उतना ही महत्वपूर्ण है जितना छात्रों के लिए। सांसदों और विधायकों से सरकारी स्कूलों पर ध्यान देने का आग्रह सीधे उस खाई की ओर इशारा करता है जो सरकारी और निजी शिक्षा के बीच दशकों से चौड़ी होती जा रही है। सवाल यह है कि क्या यह प्रेरक संवाद नीतिगत बदलाव में तब्दील होगा, या केवल एक यादगार तस्वीर बनकर रह जाएगा।
RashtraPress
21 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुंटूर के कितने छात्र उपराष्ट्रपति से मिले और वे कहाँ से आए थे?
आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले के सरकारी स्कूलों के 41 मेधावी छात्र 21 मई 2026 को उपराष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली में सीपी राधाकृष्णन से मिले। इन सभी छात्रों ने कक्षा 10 की परीक्षाओं में असाधारण प्रदर्शन किया था और वे दिल्ली के शैक्षिक दौरे पर थे।
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने छात्रों को क्या संदेश दिया?
उपराष्ट्रपति ने छात्रों को तीन सूत्री मंत्र दिया — ईमानदारी से कड़ी मेहनत, सफलता में विनम्रता और ज्ञान का उपयोग समाज-कल्याण के लिए। उन्होंने यह भी कहा कि कठिनाइयाँ व्यक्ति को और मजबूत बनाती हैं तथा शिक्षा जीवन बदलने का सबसे शक्तिशाली माध्यम है।
उपराष्ट्रपति ने सरकारी स्कूलों के बारे में क्या कहा?
सीपी राधाकृष्णन ने बताया कि उन्होंने स्वयं एक सरकारी स्कूल में तमिल माध्यम से शिक्षा प्राप्त की थी। उन्होंने कहा कि देश के अनेक महान वैज्ञानिक, प्रशासक और उद्यमी सरकारी स्कूलों से ही निकले हैं और सांसदों-विधायकों को इन स्कूलों के सुधार पर ध्यान देना चाहिए।
इस शैक्षिक दौरे में 27 छात्राओं की भागीदारी को उपराष्ट्रपति ने किस रूप में देखा?
उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने 41 में से 27 छात्राओं की उपस्थिति पर प्रसन्नता व्यक्त की और इसे देश में नारी सशक्तिकरण का प्रमाण बताया। उनके अनुसार यह आँकड़ा दर्शाता है कि लड़कियाँ शिक्षा के क्षेत्र में आगे आ रही हैं।
उपराष्ट्रपति ने छात्रों को किन चीजों से दूर रहने की सलाह दी?
उपराष्ट्रपति ने छात्रों को मादक पदार्थों और हानिकारक व्यसनों से दूर रहने की सलाह दी, जिसमें सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग भी शामिल है। उन्होंने खेलकूद, पठन-पाठन और रचनात्मकता को जीवन में प्राथमिकता देने का आह्वान किया।
राष्ट्र प्रेस
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