गुरु अर्जन देव जी के शहीदी दिवस पर 541 सिख श्रद्धालुओं का जत्था पाकिस्तान रवाना, 20 जून तक लौटेंगे
सारांश
मुख्य बातें
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) ने 10 जून 2026 को अमृतसर से 541 सिख श्रद्धालुओं का एक विशेष जत्था पाकिस्तान स्थित ऐतिहासिक गुरुधामों के दर्शन के लिए रवाना किया। पाँचवें पातशाह श्री गुरु अर्जन देव जी के शहीदी दिवस के पावन अवसर पर यह जत्था अटारी-वाघा सीमा के रास्ते पाकिस्तान के लिए रवाना हुआ और 20 जून तक विभिन्न गुरुधामों के दर्शन कर भारत वापस लौटेगा।
जत्थे की अगुवाई और संख्या
इस जत्थे का नेतृत्व एसजीपीसी सदस्य भूपिंदर सिंह भलवान कर रहे हैं, जबकि गुरमीत सिंह बहू को उप-नेता नियुक्त किया गया है। कुल 561 श्रद्धालुओं के पासपोर्ट वीजा के लिए पाकिस्तान उच्चायोग को भेजे गए थे, जिनमें से 541 को वीजा मिला, जबकि 20 श्रद्धालुओं के आवेदन अस्वीकार कर दिए गए।
श्रद्धालुओं की भावनाएँ
मोगा जिले के श्रद्धालु मेजर सिंह ने बताया कि उन्हें दस दिन का वीजा मिला है और वे पहली बार इन पवित्र स्थलों के दर्शन के लिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पूरा परिवार इस यात्रा को लेकर बेहद खुश और उत्साहित है।
समाजसेवी लखविंदर सिंह लखा सलेमपुरी ने कहा कि 'वर्षों से अरदास में जिन गुरुधामों के दर्शन की कामना करते थे, वह आज पूरी होने जा रही है।' उनके अनुसार जत्था सबसे पहले ननकाना साहिब पहुँचेगा, इसके बाद पंजा साहिब, करतारपुर साहिब और लाहौर स्थित डेरा साहिब में गुरु अर्जन देव जी के शहीदी दिवस के समागम में शामिल होगा।
धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व
श्रद्धालुओं का कहना है कि यह यात्रा केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सिख इतिहास और विरासत से जुड़ने का भी महत्वपूर्ण अवसर है। गुरु नानक देव जी के जन्मस्थान ननकाना साहिब सहित पाकिस्तान में स्थित ये गुरुधाम सिख समुदाय के लिए अत्यंत पवित्र हैं। यह ऐसे समय में आया है जब भारत-पाकिस्तान के बीच धार्मिक यात्राओं को लेकर संवेदनशीलता बनी रहती है, फिर भी एसजीपीसी के प्रयासों से यह जत्था संभव हो सका।
आगे का कार्यक्रम
जत्था 20 जून 2026 तक पाकिस्तान में रहेगा और विभिन्न ऐतिहासिक गुरुधामों के दर्शन के बाद भारत वापस लौटेगा। 'बोले सो निहाल, सत श्री अकाल' के जयघोष के साथ अटारी-वाघा सीमा से रवाना हुए इस जत्थे को परिवारों और रिश्तेदारों ने भावभीनी विदाई दी।