पीएम-कुसुम योजना से हांसी के किसानों को मिली राहत, सोलर पंप से डीजल-बिजली का झंझट खत्म
सारांश
मुख्य बातें
हरियाणा के हांसी में केंद्र सरकार की पीएम-कुसुम योजना किसानों की खेती की तस्वीर बदल रही है। इस योजना के तहत सोलर पंप लगाने पर सब्सिडी मिलती है, जिससे सिंचाई के लिए महंगे डीजल और अनिश्चित बिजली आपूर्ति पर निर्भरता काफी हद तक कम हो गई है। 13 अक्टूबर 2026 को इस योजना के लाभार्थी किसानों ने अपने अनुभव साझा किए।
लाभार्थियों के अनुभव
हांसी के गाँव ढाणा कलां के सेवानिवृत्त सैनिक संदीप फौजी ने बताया कि पहले उनके खेत में इंजन-चालित ट्यूबवेल था, जिस पर डीजल का खर्च बहुत अधिक आता था। इस कारण खेती सीमित दायरे में ही हो पाती थी।
उन्होंने कहा, 'अब पीएम कुसुम योजना के तहत सोलर पंप लगने के बाद न बिजली का इंतजार करना पड़ता है और न ही महंगा डीजल खर्च करना पड़ता है। सूरज निकलते ही पंप का बटन दबाते हैं और खेत में पानी पहुँच जाता है।' उन्होंने इस सुविधा का फायदा उठाते हुए अपना हरा-भरा बाग 4 एकड़ में फैलाया है और विभिन्न प्रकार की सब्जियाँ उगानी शुरू की हैं।
रोज़गार और आमदनी पर असर
संदीप फौजी के अनुसार, पर्याप्त सिंचाई जल उपलब्ध होने से उन्होंने अपनी खेती का दायरा बढ़ाया और बाग लगाया, जिससे स्थानीय स्तर पर रोज़गार के अवसर भी बने हैं। एक अन्य किसान अशोक यादव ने बताया कि पहले वे केवल गेहूं और एक-दो फसलें ले पाते थे, लेकिन अब अधिक फसलें उगाई जा रही हैं, जिससे आमदनी में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है।
यादव ने कहा कि इस योजना से काफी बचत हो रही है और उन्होंने सभी किसान भाइयों से अपील की कि वे इस योजना का लाभ ज़रूर उठाएँ।
पीएम-कुसुम योजना: पृष्ठभूमि
प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (PM-KUSUM) केंद्र सरकार की एक प्रमुख कृषि-ऊर्जा योजना है। इसके तहत किसानों को सोलर पंप लगाने पर केंद्र और राज्य सरकार की ओर से संयुक्त सब्सिडी दी जाती है। गौरतलब है कि यह योजना कृषि क्षेत्र में नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने और किसानों की आय बढ़ाने के दोहरे उद्देश्य से लागू की गई है।
यह ऐसे समय में और भी प्रासंगिक हो जाती है जब हरियाणा सहित कई राज्यों में किसान बिजली कटौती और बढ़ती डीजल कीमतों से जूझ रहे हैं।
किसानों की अपील
संदीप फौजी ने सभी किसानों से अपील की कि जब भी इस योजना के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हो, वे अवश्य आवेदन करें। उन्होंने केंद्र सरकार की नीतियों — खासकर सेना और किसानों के लिए — की सराहना करते हुए कहा कि यह योजना सीधे ज़मीनी स्तर पर लाभ पहुँचा रही है।
आगे की राह
हांसी के किसानों का यह अनुभव उन हजारों लाभार्थियों की कहानी का हिस्सा है जो सोलर तकनीक अपनाकर खेती की लागत घटा रहे हैं। यदि पीएम-कुसुम योजना की आवेदन प्रक्रिया नियमित रूप से खुलती रही और सब्सिडी वितरण समयबद्ध रहा, तो हरियाणा के अन्य जिलों में भी इसी तरह के सकारात्मक परिणाम सामने आ सकते हैं।